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ई-बक

ु : रचनाकार http://rachanakar.blogspot.com क तत


कशोर उपयास

नया सवेरा

यशवत कोठार

खट। खट॥

''कौन ? ‘‘

''जी। पोटमैन। बाबू जी आपक रिजटर है। आकर ले ल+ । ‘‘अ-भमयु घर से


बाहर आया। दतखत कये। -लफाफा -लया। खोला। पढ़ा। और खशी
ु से 4च5ला पड़ा।

‘‘माँ। माँ मझे


ु नौकर -मल गयी। ‘‘

अ-भमयु तेजी से दौड़ पड़ा। खशी


ु के मारे उसके पांव जमीन पर नहं पड़ रहे
थे। <पछले तीन वष? से वह नरतर इधर उधर अिजBयां भेज रहा था, साCाDकार दे
रहा था मगर नतीजा वह ढाक के तीन पात। हर बार या तो उसक अजF नरत हो
जाती या फर साCाDकार म+ उसे अयोGय घो<षत कर Hदया जाता। मगर इस बार उसे
पर
ू उIमीद थी JयKक यह नौकर मेLरट के आधार पर द जानी थी और मेLरट म+
उसका थान पहला था। तमाम -सफाLरशी लोग रह गये और अ-भमयु को यह
नौकर -मल गयी। उसने घर के अदर आकर माँ बापू के चरण छए।
ु उहKने आशीष
द। बढ़
ू , पथरायी, पनयल आँखK म+ खशी
ु के आंसू छलक पड़े उनके बढ़
ु ापे क एक
माO आशा थी अ-भमय।ु अ-भमयु क आंखK म+ भी खशी
ु छा गयी। कमला ने पछा।

‘‘ भैया कैसी नौकर है और कहां लगी है '' ?

‘‘ अर पगल। नौकर तो अPयापक क है , मगर साथ म+ मझे


ु छाOK के छाOावास
का वाडBन भी बनाया गया है । यहां से पचास कलोमीटर दरू जो कबा है न वहं पर
जाना है , सोचता हंू परसK सोमवार को Rयट
ू पर लग जाउं । अब दे र करने से Jया
फायदा। '' JयK बाप।ू

‘‘ हां बेटा अब जाकर भगवान ने हमार सनी


ु है तम
ु तो मन लगाकर काम करना।
ईSवर म+ आथा रखना। ईमानदार व सTचाई का दामन थामे रखना। '' कमला इसका
सटक
ू े स तैयार कर दे । भागवान राते के -लए कछ
ु बना दे ना ताक जाते ह बेटे को
तकलफ न हो ''

‘‘ अरे तो Jया सार नसीहत+ आज ह बाँट दोगे। जाओ जाकर सबसे पहले गल-
मोह5ले म+ यह खशखबर
ु सनाओ
ु और सनो
ु सबको -मठाई भी बंटवा दो। '' अ-भमयु
क माँ ने कहा।

अ-भमयु के बापू गल मोह5लK म+ यह समाचार सनाने


ु के -लए बाहर चले
गये। अ-भमयु अपने दोतK से बतयाने चला गया। कमला और उसक माँ ने
अ-भमयु के जाने क तैयार शV
ु कर द।

अ-भमयु का गांव एक छोटा सा गांव है । Wामीण पLरवेश के बावजद



अ-भमयु ने पास के कबे म+ रहकर पढ़ाई क । पढ़ाई म+ हमेशा अXवल आता था।
छाOविD
ृ त, Zयशन
ू तथा घर क खेती के सहारे पढ़ गया। अPयापक क [े नंग भी कर
ल। वह नौकर क तलाश के साथ-साथ गांव के बTचK क Zयशन
ू करता रहा। वह
एक हं समख
ु , खबसरत
ू ू जवान लड़का था जो अपने गांव म+ एक आदशB के Vप म+ दे खा
जाता था उसने गांव के कूल को सेक\डर कूल म+ बदलने के -लए काफ को-शश
क , लगातार सरकार को -लखता रहा। अफसरK से -मलता रहा कूल क आवSयकता
पर उसने थानीय अखबारK म+ भी -लखा और अत म+ अपने गांव म+ कूल खलवाने

म+ कामयाब हआ।
ु दसर
ू ओर वह तयोगी परCाओं म+ भी बैठने क तैयार कर रहा
था।

उसके मां-बाप औसत भारतीय Wामीण लोगK क तरह सीधे, सTचे और सरल
थे। कछ
ु खेतीबाड़ी थी, मोटा खाते थे मोटा पहनते थे, तथा घर म+ कल
ु चार ाणी थे
अ-भमयु उसक छोट बहन कमला और मां-बाप। कमला भी पढ़ रह थी। अ-भमयु
उसक पढ़ाई क ओर <वशेष Pयान दे ता था।

गांव छोटा था, मगर आपसी सौहादB था। भाईचारा था। गांव के झगड़े आपस म+
-मल बैठ कर नपटा -लये जाते थे। बड़े बजगे
ु ु र् ा का सIमान था। छोटK के पत नेह
और बराबर के लोग आपस म+ ेम भाव रखते थे। सां दायक झगड़K से कोसK दरू था
गांव। सवBधमBसमभाव था।

अ-भमयु घर से बाहर नकला तो उसे अकबर -मल गया। जो कभी उसके


साथ पढ़ता था, मगर अपनी पSु तैनी दकान
ु पर बैठकर Xयापार म+ Xयत रहता था।
उसने अकबर से कहा-

‘‘ अकबर। सन
ु मझे
ु नौकर -मल गयी है। और म^ सोमवार को जा रहा हंू ।''

‘‘ अTछा। बहत
ु बहत
ु बधाई। ओर सन
ु अब -मठाई _खलाने वापस आयेगा या अभी
_खलायेगा। ''

‘‘ -मठाई तो मां-बाबजी
ू बांट रहे हे । ''

‘‘ अब हमार कमत म+ तो दकान


ु -लखी है, सो भगत
ु रहे ह^। ''

‘‘ इसम+ भगतना
ु Jया है , भाई , मझे
ु पLरिथतयK के कारण नौकर करनी पड़ रह
है । ''

‘‘ अTछा सन।
ु वहां रहकर हम+ भल
ू मत जाना, गांव आते जाते रहना। ''

‘‘ कैसी बात करता है अकबर तू भी। तू मेरा सबसे `यारा दोत है और रहेगा।''

‘‘ अTछा आ गांव का चJकर लगाकर आते ह^। ''

‘‘ कल जाने क तैयार कVंगा और सोचता हंू वहं रहकर तयोगी परCाओं क


तैयार भी कVं ।''

‘‘ ठaक है। तI
ु ह+ पढ़ने का शौक है और हम+ मत रहने का। '' दोनो हंस पड़े।

0 0 0
अ-भमयु क नयिJ
ु त िजस छोटे कबे के आवासीय <वbालय म+ हई
ु थी, उस
का नाम राजपरु था। यह िजला मc
ु यालय के पास था। और यहां पर सभी कार क
स<वधाएं
ु भी थी। अ-भमयु ातः ह अपने सामान के साथ चल पड़ा और बस से
राजपरु आ गया। राजपरु म+ अ-भमयु सीधा अपने <वbालय म+ चला आया। वहां पर
आते आते दस बज चक
ु े थे। उसने <वbालय म+ वेश कया। और मन ह मन <वbा
के मिदर को णाम कया। <वbालय बहतु बड़ा नहं था मगर अय थानK क
तलना
ु म+ भवन आHद ठaक थे। पास म+ ह छाOावास था, जहां पर इस <वbालय के
छाO रहते थे। उसने कदम ाचायB कC क ओर बढ़ाये। बाहर बैठे चतथB
ु eेणी
कमBचार से उसने पछा
ू -

‘‘ < ं-सपल साहब ह^ ? ''

‘‘ हां है । मगर Xयत ह^। ''

‘‘ उनसे कहना अ-भमयु बाबू -मलना चाहते ह^, मेर नयिJ


ु त इसी <वbालय म+
हई
ु ह^ ''

‘‘ ओह। आप इतजार कर+ म^ < ं-सपल साहब को खबर करता ह।ूँ

चतथB
ु eेणी कमBचार अदर गया। शीf वापस आया और अ-भमयु को आदर
से अदर जाने के -लए कहा।

अ-भमयु ने अदर जाते ह ाचायB का अ-भवादन कया। ाचायB ने म


ु करा
कर उसका वागत कया। बैठने को कहा और बोले।

‘‘ दे खो अ-भमयु। तम
ु यवा
ु हो। उDसाह हो और सबसे बड़ी बात ये क तम

मेLरट से चनकर
ु आये हो। मझे
ु परा
ू <वSवास है क तम
ु अपनी तभा के बल पर
इस <वbालय के छाOK को और भी आगे बढ़ाओगे। अPययन के अतLरJत तI
ु ह+
<वbालय के छाOावास का भी अधीCक कमेट ने बनाया है JयKक यह जVर था।
सभी छाO पLरसर म+ ह रहते ह^ ताक उनका सवाgगीण <वकास हो। ''

‘‘ अभी तम
ु कहां ठहरे हो ? ''

अ-भमयु ने Pयान से दे खा। ाचायB महोदय एक ौढ़ और शालन XयिJतDव


के धनी थे। चSमे के पीछे से िजhासा भर आंख+ उसे दे ख रह थी।

‘‘ जी अभी तो म^ सीधा बस टै \ड से आ रहा हू ँ ''


‘‘ ठaक है। तI
ु हारे रहने क Xयवथा भी छाOावास म+ ह होगी उहKने घंट बजाई
और चतथB
ु eेणी कमBचार को बलाकर
ु नदश
i Hदये।

‘‘ सनो
ु रामलाल। ये अ-भमयु, बाबू ह^ हमारे नये <वhान अPयापक तथा छाOावास
के अधीCक। इनका सामान छाOावास-अधीCक-आवास म+ रखवा दो। '' ‘‘ जी बहत

अTछा सरकार। ''

‘‘ और अ-भमयु बाबू आप भी jेश होकर आ जाय+। आज से आप क Rयट


ू शV

है । ''

‘‘ जी बहत
ु अTछा। धयवाद, नमकार ''

‘‘ नमकार। ''

रामलाल के साथ अ-भमयु बाबू छाOावास म+ आ गये। छाOावास म+ कल



पचास कमरे थे। हर कमरे म+ दो छाO थे। कुछ अय छाOावास भी थे। अ-भमयु को
छाOावास तथा <वbालय का वातावरण भा गया। उसे नौकर -मलने क खशी
ु तो थी
ह इस मनोरम और वTछ कूल के वातावरण को दे खकर और kयादा खशी
ु हई।

रामलाल सामान रखकर जा चका


ु था। अ-भमयु ने छाOावास के चौक दार को
बला
ु या। अपना आवास साफ कराया। नहा धोकर तरोताजा हो गया। अब तक
छाOावास म+ यह खबर जंगल क आग क तरह फैल चक
ु थी क नये अधीCक
<वhान के अPयापक भी ह^ और उहKने अपना काम संभाल -लया है । अ-भमयु ने
छाOावास के छाOK को अपने कC म+ उपिथत होने के नदश
i Hदये। सभी छाO आज
यथाशीf अपने गणवेश म+ नये अधीCक से -मलने के -लए आ गये। अ-भमयु ने
दे खा सभी छाO मPयम वग? से आये हएु थे। कछ
ु पढ़ाई म+ तेज थे, तो कछ
ु खेलकद

म+ और कछ ु सांकतक
ृ कायBlमK म+ V4च रखते थे।

छाOावास क Xयवथा सचाm


ु Vप से चलाने के -लए अ-भमयु ने सवB थम
हर पTचीस छाOK पर एक मॉनीटर तथा चार मॉनीटरK पर एक ोJटर नयJ
ु त करने
क बात कह, सभी छाOK ने इसे सहषB वीकार कर -लया। <वंग अ का मॉनीटर
अ-भमयु ने पढ़ाई म+ सबसे तेज छाO -लIबाराम को बनाया। <वंग ‘‘ब'' का मॉनीटर
असलम को बनाया गया, जो खेल-कद
ू म+ हो-शयार था। और <वंग ‘‘स'' का मॉनीटर
सरेु श शमाB को बनाया <वंग ‘‘द'' का मॉनीटर राजेo सJसेना को बनाया गया। इन
मॉनीटरK पर <वंग के छाOK क िजIमेदार डाल गयी। उसने शारLरक p<q से सबसे
सp
ु ढ़ अवतार-संह को जो सबसे उँ ची कCा का <वbाथF था ोJटर नयJ
ु त कर Hदया।
अब छाOK को सIबो4धत करते हए
ु कहा-

‘‘ < य छाOK, म^ आपका अPयापक या छाOावास का अधीCक माO नहं हंू बि5क
आपका थानीय अ-भभावक भी हंू । आप अपनी कसी भी समया के नराकरण हे तु
कभी भी मेरे पास नसंकोच आ सकते ह^। मेर को-शश होगी क आपक समया
का समाधान हो तथा आप अपना परा
ू समय पढ़ाई तथा अय गत<व4धयK म+ लगा
सक+। <पछले कछ
ु वष? से यह <वbालय िजले म+ अXवल आता रहा है , मेर को-शश
होगी क यहां के छाO पढ़ाई, खेलकद
ू तथा सांकृ तक सभी CेOK म+ अपना वचBव
था<पत कर+ ।''

अचानक अ-भमयु ने दे खा क ाचायB महोदय भी चपचाप


ु आकर पीछे खड़े
हो गये ह^ एक Cण को उसने अपना वJतXय बद कया मगर उनक मौन अनमत

पाकर वह पन
ु ः बोलने लगा।

'' -मOK। आज जीवन म+ सभी चीजK का महDव है । न केवल पढ़ाई, न केवल


खेलकद
ू बि5क हर CेO म+ काम करना पड़ता है हमारे इस छाOावास म+ सभी कार के
छाO है और हम सभी को समान अवसर दे कर आगे बढ़ाने क को-शश कर+ गे। मेस क
Xयवथा के -लए भी एक स-मत बना द जायेगी। जो ठे केदार के काम क दे खरे ख
कर+ गी।

यह कहकर अ-भमयु ने ाचायB क ओर दे खा। और कहा।

'' ाचायB जी भी आपसे कछ


ु बात+ कर+ गे। ‘‘

ाचायB ने कहा-''छाOK अ-भमयु बाबू के Vप म+ आप लोगK को एक नये,


उDसाह अPयापक -मले ह^, जो पर
ू लगन तथा मेहनत से आपके साथ कंधे से कंधा
-भड़ाकर काम कर+ गे और मझे
ु <वSवास है क आप <वbालय क गLरमा को और उं चा
कर+ गे। मेर शभकामनाएं
ु आपके और अ-भमयु बाबू के साथ ह^। कल से नय-मत
सO तथा अPयापन शV
ु हो जायेगा। आप लोग कल सबह
ु 10 बजे <वbालय ांगण म+
एकrOत हो वहं पा आगे बातचीत होगी। ‘‘

यह कहकर ाचायB ने अ-भमयु बाबू को छाOावास क मीHटंग समा`त करने


क आhा दे द।

0 0
<वbालय का पहला Hदन। <वbालय के टाफ Vम म+ सभी अPयापक व
अPया<पकाएँ उपिथत ह^। लगभग 30 अPयापक व 3 अPया<पकाएँ ाचायB वयं भी
आज अपने कC के बजाय यहं पर आ गये ह^ छाO <वbालय ांगण म+ एकrOत हो
रहे ह^।

ाचायB ने अ-भमयु बाबू का पLरचय अय साथी अPयापकK एवं अPया<पकाओं


से कराया। सभी ने अ-भमयु बाबू को हाथK हाथ -लया। अ-भमयु बाबू के सौIय व
शालन XयिJतDव से सभी भा<वत थे। एक दो अPयापक इस बात से दखी
ु थे क वे
छाOावास के अधीCक नहं बन सक+। मगर बात rबगड़ी नहं थी। सब ठaक था।
ांगण म+ छाO पंिJतबs खड़े थे। ाथBना शV
ु हई।
ु पी․ट․ हई
ु ाचायB ने छाOK व
अPयापकK का वागत कया। उtबोधन Hदया। उह+ दे श के eेu नागLरक बनने क
नसीहत द। जातािOक म5
ू यK के बारे म+ बताया और फर नय-मत कCा म+ पढ़ने
को भेज Hदया। अ-भमयु बाबू के शV
ु के दो कालांश खाल थे। इस समय का
सदपयोग
ु उहKने साथी अPयापकK से पLरचय म+ गजारा।
ु अंWेजी पढ़ाने वाले एंGलो
इि\डयन अPयापक थे एटनी। ग_णत के अPयापक थे महे श ग`ु ता। Hहद क
अPया<पका -मसेस तभा और कॉमसB के अPयापक चo मोहन शमाB थे। कछ
ु अय
अPयापक भी थे।

एक बात अ-भमयु को लगी क हो न हो <वbालय के अPयापकK म+ गटबाजी



जVर होगी। लेकन उसने इस ओर Pयान दे ने के बजाय अपने अPयापन कायB हो ह
ाथ-मकता दे ना उ4चत समझा। पीLरयड लग चका
ु था। वह हाजर रिजटर, चाक,
डटर लेकर कCा दस के कC क ओर चल पड़ा। आज कCा म+ उस का पहला Hदन
था और वो मानता था क थम Hदन पर
ू मेहनत से अपना भाव जमाना पड़ता है ।
उसने आDम<वSवास के साथ पड़ाना शV
ु कया, छाO दDत4चDत हो कर उसका
Xयाcयान सन
ु रहे थे। कालांश क समाि`त पर वह पनः
ु टाफ Vम म+ आ गया।

सरज
ू ढलने लगा था। धप
ू के टक
ु ड़े _खड़क के राते अ-भमयु के चेहरे पर
पड़ रहे थ। उसका चेहरा संतोष के सख
ु से जगमगाने लगा था। वह उठा, सराह
ु से
पानी <पया और प
ु तकालय क ओर बढ़ गया।

0 0 0
जैसे ह [े न मुड़ी‘ अना अचकचा कर धJके से Hहल। जागी। _खड़क के बाहर
ह5क रोशनी हो रह थी। सबह
ु का मनोरम वातावरण बन रहा था। गाड़ी मoास से
थे◌ाड़ी ह आगे आई थी अब गाड़ी तीस घ\टK से kयादा चल चक
ु थी।

गाड़ी म+ चौतरफा बद दवारK के अदर बद वे दोनK। दसर


ू सहयाOी अना
के -लए अजनबी, थी। कतना आSचयB, साथ साथ लेकन अलग-अलग। एक दसरे
ू के
-लए अजनबी, शV
ु म+ सहयाOी ने कछ
ु आगे बढ़ने क को-शश क थी लेकन अना
क उपेCापणB
ू हां, हंू से नराश होकर सो गई थी।

सोई हई
ु मHहला को दे ख कर उसने मंह
ु rबचकाया। वह तौ-लया ले बाथVम म+
घस
ु गई jेश होकर बाहर आई तो गाड़ी Hद5ल के पास कहं mक पड़ी थी। वह यादK
के धधलक
ुँ े म+ खोने लगी।

उसे याद आये पापा,मIमी। <पछले साल का यरोप


ू का Hटप। महानगरK क
िजदगी। कॉलेज के Hदन। पापा उसे बताते थे महाराणा ताप का ब-लदान और
वतOता संWाम म+ राजथान का योगदान। उनके अनसार
ु भारत म+ -शवाजी और
ताप का कोई सानी नहं था। rबजो-लया का कसान आदोलन, जैसलमेर के
सागरमल गोपा का ब-लदान जोधपरु के पैलेस और पराने
ु क<वयK के क<वDत।
चतर-संहजी बावजी क -सखावन, रािजया रा दहा।
ू मीरा ओर rबहार क धरती पर वह
पहल बार पांव रखने जा रह थी। कैसा होगा राजथान ? कैसी होगी उदयपरु क
पहाwड़याँ, जैसाणा और जोधाणा क रIमत+ ।

उसने सर को ह5का सा झटका Hदया यादK के धधले


ुँ आसमान के xCतज पर
फर एक लाल सरज
ू डबने
ू लगा।

गाड़ी चलने लगी उसके यादK के -सतार पर फर उं ग-लयां दौड़ने लगी। रागK
क एक अजनबी पहचान उसे महसस
ू होने लगी। Jया करे गी वह राजथान जाकर।
अपनी परखK
ु क माट को सर पर लगा लेने से ह Jया हो जायेगा। Jया उसे मन क
शाित -मल पायेगी। Jया उसे घटन
ु से मिJ
ु त -मल पायेगी। लेकन अब वो कर ह
Jया सकती थी ?

कभी अमेLरका म+, कभी यरोप


ू म+ कभी भारत म+ और अब अपनी मातभ-म
ृ ू के
सहोदरK के बीच। यह कैसी `यास है जो बझती
ु नहं बढ़ती ह चल जाती है Jया कोई
नद कभी त`ृ त होती है । बाढ़ के बावजद
ू नद क `यास JयK नहं बझती।

दोपहर का सरज
ू तेज हो रहा था। गाड़ी जयपरु टे शन पर आकर mक उसने
अपना झोला उठाया और `लेटफामB के बाहर आ गई।

उसने अपने मन म+ एक नई खशी


ु महसस
ू क क मIमी पापा क लाड़ल बेट
फर एक महानगर क <वशाल सड़कK पर अपनी जड़K क खोज म+ भटकने लगी थी।
उसे समझ नहं आ रहा था अब वह Jया करे गी। अकेलापन। भटकाव। उलझाव। फर
भटकाव। Jया भटकाव ह िजदगी है। या कोई एक अनवायBता, जीवन क साथBकता
क खोज म+ भटकाव। बस भटकाव, उसे फर याद आया, अनत क खोज म+ , जीवन
एक rबद ु है। और इस rबद ु से होकर समत rबद ु संसरण करते ह^ यह संसरण के
rबद ु क खोज ह भटकाव है । भटकाव ह अनवायBता है । सच पछा
ू जाये तो Jया
जीवन क खोज LरSतK क उyणता क खोज क एक चाह नहं है।

0 0 0

वह शहर के दxCणी भाग क और चल पड़ी। सामने <वSव<वbालय क लIबी,


उँ ची बहमं
ु िजल इमारत+ Hदखाई दे रह थी। -शCा, सजन
ृ और शैC_णक दनया
ु का
एक अनत <वतार या सनहर ु रे त के पार का संगीत क धाराओं का अनोखा
-मलन। दरू तक फैल मासम
ू धरती। सहागन
ु क गोद म+ सोया हआ
ु मासम
ू जगत।
इस शांत पड़ी झील के तट पर। `यास का अतहन -सल-सला। `यास केवल `यास।
िजसके बझने
ु क आस कभी नहं रह मेरे पास। सजन
ृ का सख
ु या समपBण का
अनोखा संसार। धाराओं के धोर और आग उगलता <वतार -शCा जगत का, जहां से
भाग कर वो यहां पर आई है । अना समझ नहं पा रह । इस के आगे का अतहन
<वतार उसे कस मोड़ तक पहंु चा दे गा। Jया यह सIभव है क वो अतीत क परत+
खोले rबना आगे बड़ जाये। मां बचपन म+ चल बसी <पता Xयापार और पैसे म+ Xयत।
उसका अकेलापन भटकाव बढ़ाता ह चला जा रहा था।

वह एक नई राह पर चल पड़ी सामने केoय प


ु तकालय था। शाम अलसाने
लगी, एक 4चरपLर4चत गध क तरह शाम ढलने लगी धप
ू के कछ
ु टकड़े
ु _खड़क क
राह से अदर हॉल म+ आकर चपचाप
ु बैठ गये। कछ
ु 4चwड़याएं भी न जाने कहां से
अदर घस
ु गई थी। वह यो ह मन को समझाने हेतु अदर हाल म+ आ गई।

इधर-उधर दवारK पर एक उदास भरा


ू रं ग। धसरे
ू धसरे
ू चेहरे और एक उदास
म
ु कान। उसने अपना सर एक स4चO पrOका म+ गड़ा Hदया।
तभी उसे कसी क आवाज सनाई
ु पड़ी।

'' है लो।‘‘ उसने चzक कर -सर उठाया। एक अजनबी लेकन मोहक लड़क उसे
सIबो4धत कर रह थी।

'' नई आई हो।‘‘

'' हां ‘‘

'' एम․ए․ करने। ‘‘

'' नहं। ‘‘

'' तो फर‘‘

'' फर । ‘‘

'' फर। ‘‘

और दोनK _खल_खलाकर हं स पड़ी।

'' तI
ु हारा नाम। ‘‘

'' अना और तI
ु हारा। ‘‘

'' आशा। ‘‘ लगा जैसे सैकड़K नहे सरज


ू एक साथ उग पड़े हK, या क चांदनी जाग
गई हो। वह समझ नहं पाई अचानक हई
ु इस मलाकात
ु का Jया होगा। लेकन बात
बन गई। उसे फर याद आया। सबह
ु क ताजा धप ू के टक
ु ड़K को जी लो। पता नहं
कब चांद घाट म+ चरने चला जाये। Jवारे पन क कTची धप
ू उस लड़क क आंखK म+
HटमHटमा रह थी उसका मन बौराए पCी क तरह फड़फड़ा रहा था। वह नहं समझ
पायी क Jया कर+ मगर वC
ृ म+ फड़फड़ाती हवाएँ राता ढंू ढ़ रह थी और वे एक दसरे

को जानने समझने के -लए केटन क ओर बढ़ गई। अना के -लए यह गाढ़ और
सखी
ू ध
ु धनमा
ु धप
ू थी। केटन के एकात कोने म+ दोनK जम गई।

आसपास क मेज+ भी भर पड़ी थी। 4चwड़यK क तरह चहचहाती लड़कयां और


मंडराते लड़के। कहं कोई 4चता या भटकाव या उलझाव का नाम नहं।

‘‘ हां तो अब बताओ अपनी राम कहानी। '' यह कह कर आशा फर _खल_खला


कर हं स पड़ी। पहल बार अना ने उसे Pयान से दे खा। सखB
ु तांबई रं ग, हलके घघरा
ुँ ले
बाल। मंुह पर अनोखा तेज और हंसती बोलती आंख+। शायद जमाने क धप
ू और सदB
हवाओं से उसका चेहरा अभी बचा हआ
ु था।

‘‘ Jया बताउं । मेरे डैड ने मझे


ु अपनी जम भ-म
ू राजथान दे खने को भेजा है ।
मां बचपन म+ ह चल बसी। डैड ने ह पाल पोस कर इतना बड़ा कया समाज <वhान
म+ एम․ए․ हंू । दे श-<वदे श घमी।
ू मगर मन है क भटकता ह रहता है । पहाड़K म+ ,
मैदानK म+ , Hदशाओं म+ म^ इस भटकाव को ढंू ढती फरती हंू । इस बार अपनी जम
भ-म
ू दे खने आई थी वगाBद<पगरयसी यह भ-म
ू कैसी है , रे त के टबे या िजदगी क
रोशनी या फर बैलगाwड़यK और ऊँटK के काफले। ''

‘‘ अTछा। अTछा बद कर अपनी क<वता और सन


ु मेर। ''

‘‘ अरे हाँ म^ तो भल
ू गई थी कछ
ु अपने बारे म+ भी तो बता। ''

म^ अपने बड़े भाई के साथ यह यनव-सB


ू ट JवाटB सB म+ रहती हंू। केमे[ म+
एम․एस․सी․ कर रह हंू और भैया यहं समाज<वhान के ोफेसर ह^। ''

‘‘ अTछा। '' फर तो तI


ु हारे भैया से -मलना चाHहए। ''

‘‘ लो पहले चाय पीलो। चाय ठ\डी हो रह है । ''

‘‘ अTछा भाई। चलो जयपरु म+ कछ


ु सकन
ु ू -मल जायेगा। ''

‘‘ अTछा एक बात बताओ यरोप


ू तI
ु ह+ कैसा लगा। ''

‘‘ बस कछ
ु kयादा पसद नहं आया। सी-मत Hदमाग और सी-मत जीवन सब
कछ
ु वयं म+ -समटा हआ।
ु दन-दनया
ु से कटा सा। ''

‘‘ -समटा हआ
ु जीवन भी कोई जीवन है । हमारे दे श म+ सब कछ
ु <वतत
ृ और
महान।् इस महान दे श क परIपराएं भी महान ह^। ''

‘‘ तो कब तक रहे गी यहाँ ? ''

‘‘ जब तक मन लग जाये। शायद परा


ू जीवन या कल सबह
ु ह चल जाउं । कहना
मिS
ु कल है । रमता जोगी और बहते पानी क तरह है मेरा मन। पल म+ तोला और
पल म+ माशा। फर भी शायद यहां पर कछ
ु समय तक रह जाउं गी। अTछा तI
ु हारे
भाई से कब -मलाओगी। ''
‘‘ तम
ु कहां ठहर हो। ''

‘‘ टे शन के पास के होटल म+ । ''

‘‘ ऐसा कर तू घर ह आ जा। ''

‘‘ लेकन। ''

‘‘ लेकन, लेकन Jया। परा


ू बड़ा JवाटB र है और हम केवल दो। '' ‘म^ ओर
भाईजान। ''

‘‘ ठaक है। ''

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फरवर माचB के ये Hदन। हवा बौराई हई


ु बहती रहती है । शहर का वातावरण,
फलK
ू से लदा फदा
ँ रहता है वासती फलK
ू का एक _खला संसार यनव-सB
ू ट म+ महक
रहा है। बड़े-बड़े शानदार बंगले के लॉनK म+ बोगनबे-लया क लताएं इठला रह थी।
सबह
ु का कंु वारा मौसम हो तो फलK
ू क महक और भी मोहक लगती है। टचसB
होटल को जाने वाल सड़क पर अना और उसक नई बनी सहे ल आशा चल जा
रह थी। अचानक पीछे से कार के हॉनB क आवाज से वे दोनK चzक पड़ी। आशा ने
मड़
ु कर दे खा भाईजान थे।

‘‘आओ अना। ये मेरे भाई ह^। सो-शयोलोजी के ोफेसर और ये अना है । अभी


अभी मेर सहे ल बनी है और अब हमारे घर चल रह है । ''

अना सकचाकर
ु कार म+ बैठ गई। वे घर आ गये। ोफेसर अपनी टडी म+
चले गये। वे दोनK बेडVम म+ गपशप करने आ गई।

अना घर तो तमने
ु बहत
ु ह खबसरती
ू ू से सजा रखा है हर चीज करने से
और स
ु दरता ऐसी क थान से हटाने माO से अस ु दर Hदखने लगती है ।

‘‘ अरे ये मेरा नहं भाई का शौक है , वे हर चीज करने से और Xयविथत पसद


करते ह^ इसी मारे तो अभी तक कंु वारे ह^ और शायद आगे भी ऐसे ह रह+ गे। ''
‘‘ अरे JयK ? ''

‘‘ ऐसा ह है। '' आशा ने बात टाल द। '' अTछा चलो बाहर बैठकर चाय पीते है
भाई भी वहं आ जाय+गे। ''

स
ु दर मख़मल-लॉन के कनारK पर वासती फल
ू और लताएं। धीमी हवा के
झकKर+

भाई आये। गIभीर चाल। मोटा चSमा। <व~ा क एक छाप जो आदमी को


सIमान से जानने का हक Hदलाती है ।

‘‘ आजकल तI
ु हार Jलासेज का Jया हाल है ? ''

‘‘ हाल बड़े बेहाल है भाई जी। यनव


ू -सBट म+ अब पढ़ने कौन आता है सब
मटरगSती करने आते ह^। ''

‘‘ मगर तIह+
ु तो पढ़ना है भाई। नहं तो चाची कह+ गी लड़क को पढ़ा भी नहं
सका, इतना भी नहं हआ।
ु '' और वे _खल_खलाकर हंस पड़े।

अना ने दे खा दGु ध Sवेत दतपंिJत, जैसे कई हस


ँ एक साथ उड़ पड़े हK और
हवा म+ दे र तक तैरती रह वो हं सी।

‘‘ अTछा और तI
ु हार इस सहे ल अना का Jया कायBlम है । कब तक रहे गी । ''

‘‘ जी अभी कछ
ु तय नहं है , सोच रह हू ँ नकल जाउं । ''

‘‘ कहां। ''

‘‘ इस दे श को दे खने समझने और जीने। ''

‘‘ तम
ु एक काम JयK नहं करती। ''

‘‘ जी ''

‘‘ मेरे पास एक ोजेJट आया हआ


ु है राजथान के गांवK म+ कबK म+ मHहलाओं
और बTचK का सामािजक अPययन। कई HदनK से इस पर काम करने क सोच रहा
था। तम
ु चाहो तो इस ोजेJट पर काम कर सकती हो। काम का काम और घमना

भी । इसी बहाने तम
ु राजथान के लोक-जीवन और संकृत को भी नजदक से दे ख
सकोगी। ''
अचानक अना सोच म+ डब
ू गई उलझाव के इन HदनK यह ोजेJट भी Jया
बरा
ु है , लेकन अना हाँ भरने से पहले कछ
ु और सोचना चाहती थी।

‘‘ कतने समय Vकना होगा। ''

‘‘ ये तो तम
ु पर है। वैसे ोजेJट कई वष? तक चल सकता है ारIभ म+ एक वषB
समझ लो । ''

‘‘ ठaक है मझे
ु वीकार है । ''

अना और आशा दोनK हस


ँ पड़े।

‘‘ तो कल <वभाग म+ आकर जॉइन कर लो। '' यह कहकर ोफेसर अपनी टडी म+


चले गये।

रात को पलंग पर लेटे अना ने आंखे बद कर ल उसके सामने नये पराने

कई pSय आये गये। कई Hदन बीत गये। कई रात+ रत गई। दोपहर। शाम। रात।
हवा। सरज।
ू चांद। कहं मोHहत करने वाले बधन। कहं कमल क तरह _खल
वतOता। सब कछ
ु आँखK के सामने गजर
ु गया अचानक वह कस बधन म+ बंध
गई Jया वह ोजेJट को सहे ज सकेगी। लेकन जीवन म+ यह मोड़ उसे भा गया था।
रे त के टबK से मेवाड़ी पहाड़K तक क याOा का यह सनहरा
ु अवसर वह खोना नहं
चाहती थी। टडी म+ अभी भी लाईट जल रह थी। शायद ोफेसर -संह अPययन कर
रहे थे। अना और आशा एक ह कमरे म+ सो गई।

ातः तैयार होकर अना ने समाज शाO <वभाग म+ जाकर kवाइन कया और
राजथान म+ मHहलाओं और बTचK के सामािजक अPययन के ोजेJट पर काम करने
के -लए राजपरु रवाना हो गई। जाते समय ोफेसर साहब ने राजपरु के तहसीलदार
के नाम एक पO भी दे Hदया।

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राजपरु म+ उतरते ह अना ने सोचा सबसे पहले थानीय तहसीलदार से ह


-मलना चाHहए। शासक के नाते आंकड़K क भाषा म+ तहसीलदार साहब ने उसे
<वकास, गत, उपलि€धयाँ, आHद के बारे म+ कछ
ु इस तरह बताया क अना शीf ह
उह+ सफल शासक मान बैठa। तहसील से नकल ह रह थी क उसे पास म+ ह
आवासीय <वbालय का <वशाल ांगण नजर आया। उसने कबे म+ मHहलाओं और
बTचK क िथत के बारे म+ इस <वbालय के थानीय अPयापकK तथा छाOK से बात
करने का नSचय कया। वह सीधे ह टाफ Vम म+ चल गई। वहां पर Hहद क
अPया<पका -मसेज․ तभा से उसने पLरचय कया और बोल पड़ी-

‘‘ मैडम। म^ जयपरु से मHहलाओं और बTचK क सामािजक िथत क पLरयोजना


पर काम करने यहाँ आई ह।ू ँ म^ गांव म+ मHहलाओं और बTचK क सामािजक िथतयK
का अPययन करना चाहती ह।ू ँ आप शायद इसी जगह क ह^। अतः शायद मेर कछ ु
मदद कर सक+। म^ आपक आभार रहंू गी। साथ ह यHद आप अय साथी अPयापकK
से भी मेरा पLरचय करा सक+ तो मझे
ु स<वधा
ु होगी। ''

-मसेज तभा ने खशी


ु खशी
ु अना का पLरचय अपने सहयो4गयK से कराया।

‘‘ ये -म․ एटोनी अंWेजी पढ़ाते ह^।'' अना ने शालनता से हाथ जोड़े।

ये ह^ ग_णत के महे श ग`ु ता साहब।

‘‘ नमकार। ''

‘‘ नमकार। ''

इसी समय अ-भमयु ने टाफ Vम म+ वेश कया। अना ने दे खा। अपLरचय


के <वPयाचल बीच म+ खड़े थे। लेकन एक आकषBण था। -मसेज तभा ने पLरचय
कराया।

‘‘ ये है <वhान के अPयापक अ-भमयु बाब।ू कल ह आये ह^ और छाOावास के


अधीCक भी ह^। ''

‘‘ ये अना है यहां पर मHहलाओं और बTचK क िथत पर शोध कर+ गी।'' ‘‘


अTछा। नमकार। ''

‘‘ नमकार। '' अना के दोनK हाथ वतः शालनता से जुड़ गये। अना ने पछा
ू -

‘‘ इस कबे म+ मHहलाओं और बTचK क िथत कैसी है Jया अय जगहK क


तरह ह है ? ''

-मसेज तभा बोल पड़ी।


‘‘ यहां िथत कछ
ु ठaक इस कारण है क जनता म+ जागत
ृ है , वे -शCा के
महDव को समझ रहे ह^, और अपनी लड़कयK को कूलK म+ भेज रहे ह^। कबे म+
कयाओं और मHहलाओं हे तु पढ़ाई क Xयवथा भी है । राजनैतक जागत
ृ भी है । ''

‘‘अTछा यह तो बड़ी अTछa बात है । ''

‘‘ अब घर क मHहला अपने तथा बTचK के वय के बारे म+ भी जागVक ह^


तथा नय-मत Vप से सरकार स<वधाओं
ु का लाभ लेना जानती है। आपको यह
जानकर खशी
ु होगी क <पछले कई वष? से यहां पर बाल <ववाह जैसी कोई घटना नहं
घट है'' -मसेज तभा ने फर कहा।

‘‘ अTछा। '' अना को आSचयB हआ।


अ-भमयु बोल पड़ा।

‘‘ इसम+ आSचयB क Jया बात है सामािजक करतयK


ु के बारे म+ यHद जनता को
सह तरके से समझाया जाये तो बात समझ म+ आ जाती है , और एक बार बात
समझ म+ आ जाने के बाद लोग बाग उस बात पर अमल करते ह^। गांव क पंचायत,
जात क पंचायत, बड़े बढे
ू . सब -मल बैठकर समया को खतम कर दे ते ह^, और ऐसा
तो अJसर होता रहता है। ''

‘‘ लेकन Jया दहे ज, बहू जलाना, तलाक, आHद क घटनाएं भी नहं होती है । ''

इस बार ग_णत के महेश जी बोल पड़े।

‘‘ बहन जी ये सब शहरK के बड़े लोगK के चJकर है गांव म+ बहू का मान बेट के


बराबर होता है , बेट को दख
ु दे ना और बहू को दख
ु दे ना एक ह बात है बहू घर क
लƒमी है और लƒमी का अनादर हमार परIपरा या संकृत म+ कभी नहं रहा। ''

‘‘ लेकन फर भी Jया सभी कछ


ु अTछा ह है । ''

‘‘ नहं है सब कछ
ु अTछा नहं है औसत भारतीय कबK, गांवK क तरह यहाँ भी
पेयजल का संकट है , सरकार तंO म+ अनय-मतताएँ है , मगर इन सब के बावजद
ू एक
चीज है आशा, उमंग, उ5लास, खशी
ु , और जीवन को भरपरू जीने क इTछा जो हम+
हमार परIपरा से जोड़ती है । जातO क आवSयकता है, इसी कारण उसक क मत
भी दे नी पड़ती है । '' अ-भमयु का वर कछ
ु त5ख हो उठा। मगर सभी ने उसक
बात को सराहा। कछ
ु पल को वह mका फर बोल पड़ा।
‘‘ जातO के म5
ू यK म+ आथा रखना ह परम धमB है जो अनैतक है उसे
समा`त करने का यDन कया जाना चाHहए। िथत बTचK क हो या पVषK
ु क या
मHहलाओं क साCरता और सतत -शCा से ह सधार
ु हो सकता है । आ_खर बTचK
तथा मHहलाओं के rबना एक सIपण
ू B और स
ु दर <वSव क क5पना कैसे क जा
सकती है ? बTचे कत
ृ का सबसे खबसरत
ू ू उपहार ह^ और मHहलाएं वो उपहार हम
तक पहचाती
ुँ है । ''

‘‘ लेकन अ-भमयु बाबू सवाल ये है क सब इसके -लए Jया कर सकते है ?


अना जी इतनी दरू से यह सब जानने-समझने आई है। '' -मसेज तभा ने बहस के
एक जीवत मोड़ दे ने क सफल को-शश क ।

‘‘ हां हम Jया कर सकते ह^ ? '' महे श जी भी बोल पड़े।

अना ने भी Sन वाचक p<q से दे खा।

अब अ-भमयु बोल पड़ा।

ु होने के कारण अधीर हू ँ और ज5द से


‘‘ म^ तो एक कम उ„ का नौजवान हू ँ यवा
ज5द मंिजल चाहता हू ँ मगर म^ यह भी जानता हू ँ क मिजल न तो आसान है
और न ह बहत
ु पास। मगर सनहरे
ु भ<वyय के सपने तो दे खे जा सकते ह^। ''

‘‘ सपने हक कत तो नहं बन जाते। '' अना ने फर Sन का तीर मारा।

‘‘ सपनK को हक कत बनाने क को-शश ह जीवन और संघषB का दसरा


ू नाम है । ''
तभी घ\ट बजी।

‘‘ माफ कर+ । म^ कCा लेकर अभी आता ह।ू ँ '' अ-भमयु अपनी कCा म+ <वhान
पढ़ाने चला गया। अना टाफ Vम म+ बैठa बतयाती रह। उसे रह रह कर अभी हई ु
बहस पर <वचार करने म+ सख
ु का अहसास हो रहा था। वह सोचने लगी यHद इस
ोजेJट पर काम ह करना है तो इसी कबे को आधार बनाकर करना ठaक रहे गा।

-मसेज तभा पछ
ू बैठa ।

‘‘ अना तम
ु कहाँ ठहर हो। ''

‘‘ अभी तो आई ह।ू ँ सोचती हू ँ कसी डाक बंगले म+ Vक जाउं । ''


‘‘ मगर डाक बंगला तो यहां से बहत ु दरू है । तम
ु ऐसा करो मेरे पास रह लो। म^
भी अकेल रहती हू ँ मेरे -मटर िजला मcु यालय पर कायBरत ह^। हम दोनK -मलकर
खाना भी बना ल+ गे और अपना अपना काम भी करते रहे ◌े◌ंगे ।''

‘‘ मगर आपको अस<वधा


ु होगी। ''

‘‘ अस<वधा
ु कैसी। अभी छ…ी
ु होती है तो अपन दोनK साथ साथ चलते ह^। <वbालय
से पांच -मनट का राता है । ''

तभी <वbालय क छ…ी


ु क घ\ट बजी। ढे रK बTचे ऐ साथ नकल पड़े मानो
कत
ृ के उपहार धरती पर चल पड़े हK।

अना और -मसेज तभा भी चल पड़ी।

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छाOावास म+ अ-भमयु अपने कC म+ बैठकर मेस सIबधी जानकार अपने


सहयोगी से ले रहा था तभी <वंग मॉनीटर -लIबाराम ने वेश कया और आदर के
साथ खड़ा हो गया।

‘‘ कहो -लIबाराम कैसे आये हो ? कछ


ु परे शानी है Jया। ''

‘‘ सर। छाOावास के सIबध म+ कछ


ु बात+ करना चाहता था। ''

‘‘ अTछा बैठो। सनो


ु एक काम JयK नहं करते चारK मॉनीटर एक साथ आ जाओ
और सभी बातK पर एक साथ चचाB कर ले इस नवीन सO क एक कायB योजना भी
बना ले ताक सब कायB Xयविथत, सचाm
ु Vप से चल सके।

‘‘ यह ठaक रहे गा सर। अभी छाOK के पढ़ने का समय भी नहं है । म^ तीनK
मॉनीटरK को बला
ु लाता ह।ू ँ ''

यह कहकर -लIबाराम जाने लगा। अ-भमयु ने साथ म+ अवतार -संह ोJटर


को भी बलाने
ु के नदश
i Hदये। कछ
ु ह दे र म+ चारK मॉनीटर तथा ोJटर अ-भमयु के
कC म+ एकrOत हो गये। अ-भमयु ने उह+ सIबो4धत करते हएु कहा- ‘‘ आप लोगK
पर इस छाOावास क महती िजIमेदार है । म^ तो केवल आप लोगK क सहायता के
-लए ह।ू ँ छाOावास म+ मेस क स<वधा
ु साफ, सफाई, सांकतक
ृ कायBlम तथा खेलकद

आHद के -लए आप लोगK को Hदल लगाकर काम करना होगा। साथ ह आप लोगK को
इस कबे के सामािजक उDथान के -लए भी काम करना चाHहए। मेर मायता है क
आप लोग -मलजलु कर काम कर+ तो पढ़ाई के अतLरJत समय म+ भी बहत
ु कछ
ु कर
सकते ह^। ''

‘‘ हां सर हम भी महसस
ू करते ह^ क हमारे पास काफ समय बचता है। िजसे हम
इधर-उधर के कामK म+ नq कर दे ते ह^। यHद कोई पq Hदशा- नदश
i हो तो हम सब
-मलकर कछ
ु नया और अनोखा काम अवSय कर सकते ह^। यHद इस काम म+ हम+
आनद भी आएगा। और खशी
ु भी होगी। '' -लIबाराम तर
ु त बोल पड़ा।

‘‘ लेकन सर '' असलम ने अपनी बात रखी ‘‘ जो छाO पढ़ाई म+ कमजोर ह^ उन


छाOK क ओर Pयान दे ने के -लए भी हम+ कछ
ु करना चाHहए। ''

‘‘ rब5कुल असलम म^ तमसे


ु शत तशत सहमत हू ँ तम
ु चारK मॉनीटर अपनी
अपनी <वंग के कमजोर छाOK क एक सची
ू बनाओ और म^ उह+ अतLरJत समय म+
यहाँ पढ़ाउं गा ताक उनक कमजोर दरू हो। ''

‘‘ यह ठaक रहे गा सर। '' सरेु श शमाB बोल पड़ा।

‘‘ और आप लोग एक और बात का Pयान रख+। यHद कसी छाO क कोई नजी


आवSयकता हो तो उसका भी Pयान रख+। हम सब एक साथ -मल बैठकर उसका
समाधान खोज नकाल+गे।'' अ-भमयु बाबू ने फर कहा।

‘‘ खाल समय का सदपयोग


ु करने क शVआत
ु हम वCारोपण
ृ से कर+ गे। शाम को
सभी छाO छाOावास के पीछे वाले खाल मैदान म+ एकrOत हो जाय+ वहं से हम अपने
अ-भयान का eीगणेश कर+ गे। म^ को-शश कVंगा क ाचायB महोदय भी उस समय
वहां पर उपिथत रह+ । ''

‘‘ सर एक बात पछना
ू चाहता हूँ। अवतार -संह पहल बार बोला।

‘‘ हां हां पछो।


ू झझकK मत। ''

‘‘ सर कछ
ु अपने बारे म+ बताइये। ''

अ-भमयु बाबू हं स पड़े कछ


ु पल मौन रहे । फर गIभीर वर म+ बोल पड़े।
‘‘ अवतार -संह म^ सामाय नIन मPयम वगFय पLरवार का सदय हू ँ यह नौकर
तीन वषB क तीCा के बाद -मल है। और <वhान म+ नातकोDतर तर क पढ़ाई
म^ने जयपरु से क है । तयोगी परCाओं क भी तैयार यहां रह कर कVंगा।''

‘‘अTछा सर। एक बात बताइये। ''

‘‘ नैतक म5
ू यK म+ इतना हास JयK हो रहा है ? '' -लIबाराम पछ
ू बैठा।

‘‘ दे खो -लIबाराम म5
ू य हमार नैतकता से जुड़े है और आजकल भौतकवाद का
समय ह^। उपभोJतावाद संकृत तथा खल
ु बाजार Xयवथा ने नैतकता को लगभग
नq कर Hदया है और म5
ू य भी <वघHटत हो गये है । वष? के जातO ने हमारे जीवन
म+ कई बड़े बदलाव पैदा कये है और दसर
ू ओर कई CेOK म+ हमने बहत
ु kयादा
गत क ह^ <वकास और गत के कछ ु म5 ू य भी हमने चकाये
ु ह^ और नैतक म5
ू यK
का हास इहं म+ से एक है तम
ु शायद कला संकाय म+ हो, इतहास म+ अJसर ऐसे
अवसर आए है जब म5
ू यK म+ हास होने पर नई Hदशा दे ने के -लए कसी महाDमा
सत या महापmष
ु ने इस दे श को Hदशा द है । <वकास और गत के म5
ू यK को
चकाने
ु के -लए हम आजकल पयाBवरण क समया से जझ
ू रहे है । समाज को पq
Hदशा नदश
i नहं होने के कारण अधकार म+ भटकाव है । रोशनी क तलाश जार है ।

‘‘ अTछा सर <वhान क इतनी गत के बावजद


ू मानव संतq
ु JयK नहं है ? ''

‘‘ मानव का संतुq हो जाना उसक गत को रोक दे गा। गत के -लए नय-मत
Vप से आगे क ओर दे खना जVर है । '' चलते जाना ह जीवन है Jया नद कभी
mकती है वह चलती ह जाती है। ''

‘‘ सर वCारोपण
ृ के -लए Jया करना होगा ? ''

‘‘ फलहाल तो हम मैदान को ठaक कर+ गे। फर वषाB ऋतु म+ बाLरश हो जाने पर
पेड़ पौधे को लगाय+गे। ''

‘‘ लेकन सर । पौधे ? ''

‘‘ पौधे वन <वभाग दे गा या <वbालय शासन खरदे गा। ''

‘‘ शासन के भरोसे तो सर कामकाज नहं चलता। '' सरेु श ने कहा

‘‘ दे खो शV
ु म+ ह नराश हो जाना या पवाB
ू Wह पाल लेना ठaक नहं है हम को-शश
कर+ गे और सफल हKगे। '' अ-भमयु ने कहा।
‘‘ अब तम
ु लोग जाओ शाम पांच बजे पीछे वाले मैदान म+ एकrOत हो जाना म^
और ाचायB जी वह -मल+गे। ''

छाOK के जाने के बाद अ-भमयु ने <पताजी को पO -लखा ।

esेय <पताजी,

सदर चरण पशB।

आपको जानकर सनता होगी क मैने काम संभाल -लया है । सब कछ


ु ठaक-
ठाक है वातावरण तथा कबा दोनK ह ठaक है शायद थोड़ी बहत
ु ऊंच नीच है तो वह
समय पर अपने आप ठaक हो जायेगी। मझे ु यहां पर छाOावास म+ ह रहने को JवाटB र
-मल गया है। सोचता हू ँ आप लोग भी यहं पर आ जाये तो ठaक रहेगा। अब वहाँ
गांव म+ कब तक रह+ गे ? कमला क भी पढ़ाई यहां पर जार रह सकेगी। आपका पO
पाते ह म^ लेने आ जाउँ गा। माताजी को णाम अजB कराये तथा कमला को शभाशीष
ु ।

आपका < य पO

अ-भमय।ु

पO को पोट करने के -लए उसने चौक दार को Hदया। और वयं ाचायB से


-मलने चल Hदया।

ाचायB अपने कC म+ थे। उहKने अ-भमयु क वCारोपण


ृ योजना Pयान से
सनी
ु और कहा-

‘‘म^ तो आ जाउँ गा काम भी शV


ु कर द+ गे। मगर हमारे पास इस समय अतLरJत
बजट नहं है । और आप जानते ह^ rबना बजट के सरकार काम कैसे हो सकता है ? ''

‘‘ आप 4चता न कर+ फलहाल हम सभी लोग eमदान कर+ गे। पौधे बाLरश के बाद
वन <वभाग से ा`त कर+ गे। ''

‘‘ फर ठaक है मेर शभकामनाएं


ु आपके साथ है । ''

‘‘ तो चले। ''

‘‘ आइये। '' अ-भमयु और ाचायB चलकर मैदान म+ आ गये। छाO पहले से ह


उपिथत थे। अ-भमयु ने मॉनीटरK तथा ोJटर का पLरचय ाचायB से कराया।
ाचायB ने सबसे पहले -मZट उठाकर डाल। काम शVु हआु छाOK ने जमीन को
समतल करना शV ु कर कंकड़ पDथर बहारते
ु दो घ\टK के eम से छाO थक गये। आगे
का काम कल करने का संक5प ले सभी लौट पड़े।

0 0

दसरे
ू Hदन <वbालय म+ अPयापक कC म+ इस घटना क चचाB थी।

एटोनी बोले- ‘‘ Xहाट। eमदान इस यग


ु म+ । अ-भमयु बाबू का Hदमाग फर
गया है नया नया जोश है । ''

‘‘ आप ठaक कहते है। '' ग_णत के ग`ु ताजी बोल पड़े। ‘‘ लड़के पढ़ते तो है नहं ये
फालतू का झंझट Jया पाल+गे। ''

‘‘ मगर यHद कोई अTछा काम शV


ु हो रहा है तो शV
ु म+ ह उस काम क बराई

JयK करनी चाHहए '' -मसेज तभा बोल पड़ी।

‘‘ आप नहं समझ+गी। नया नया लगा है । अगर इस तरह के लटके झटके नहं
Hदखायेगा तो भावशाल कैसे -सs होगा। '' चoमोहन जी ने अपना दशBन Hदया।

आप लोग कछ
ु भी कह+ जी, दनया
ु म+ प
ृ वी Hदवस या पयाBवरण Hदवस पर
इतना काम होने लगा है तो यहाँ अवSय ह कछ
ु होगा। -मसेज तभा ने कहा।

‘‘ हां हां भाई ठaक है । सब हो रहा है होने दो। मगर हम+ बJशो। '' एटोनी बोल
पड़े।

‘‘ हां ये ठaक है । '' चoमोहन बोले।

इसी समय अ-भमयु बाबू ने टाफ Vम म+ वेश कया। उसे दे खते ह सब


चप
ु हो गये।

अ-भमयु बाबू के हाथ चाक से भरे थे। उहKने हाथ धोये। पानी <पया। और
एक कसF
ु पर आराम से बैठकर बोले-

‘‘ मझे
ु दे खते ह आप लोग चप
ु JयK हो गये। ''
‘‘ कछ
ु नहं हम आपके पेड़ लगाने क योजना क चचाB कर रहे थे। '' -मसेज
तभा ने बातचीत का -सल-सला फर जोड़ा।

‘‘ हां यह तो एक आवSयकता है । क5पना क िजये यHद प


ृ वी ह नहं होगी तो
हम सब कहां हKगे ओर जीवन का Jया होगा। ''

‘‘ लेकन ये eमदान․․․․․․․․․․। '' एटोनी बोल।

‘‘ वो तो ारिIभक िथत है जब काम Hदखने लगेगा तो िजला शासन भी मदद


करे गा और फर आप सभी भी तो सहयोग कर+ गे। शV
ु म+ ह सहायता मांगना ठaक
नहं है । ''

‘‘ मझे
ु तो माफ करना भाई। '' एटोनी उठकर चले गये।

‘‘ अ-भमयु बाबू आपक बात और काम दोनो म+ दम है । आप लगे रHहये। धीरे


धीरे लोग आपके साथ हो जाय+गे, और कारवाँ बनता जायेगा। '' -मसेज तभा ने
उसका हौसला बढ़ाया।

घ\ट बजी। सभी अPयापक अपनी अपनी कCा क ओर बढ़ गये। अ-भमयु


का कालांश खाल था।

अ-भमयु के कदम वतः प


ु तकालय क ओर बढ़ .गये। उसने दे खा
प
ु तकालय समs
ृ है लेकन पढ़ने वालK का अभाव था। पO पrOकाएं rबखर पड़ी थी।
प
ु तकK पर धल
ू थी। और वाचनालय खाल पड़ा था। उसके मन म+ दख
ु क एक रे खा
_खंच गयी। सरवती का मिदर और प
ु तकK क यह दशा। वह चाहकर भी कछ
ु नहं
कर सकता था।

शाम को छाOावास म+ अपने कC म+ आने पर चौक दार ने उसे <पताजी का पO


Hदया। संxC`त सा पO था। <पताजी अपने गांव को छोड़ने को तैयार नहं थे। हां
कमला को यहां भेजने को तैयार थे। अ-भमयु ने तय कया क अकेले र<ववार को
गांव जाकर कमला को अपने साथ ले आयेगा।

0 0 0
अना और -मसेज तभा साथ रहने लग गयी थी। अना Hदनभर कबे तथा
आसपास के छोटे गांवK म+ जाकर मHहलाओं ओर बTचK क िथत पर सवCण
i करने
लगी। उसने महसस
ू कया क गांवK म+ लड़कयK और लड़कK म+ अतर और भेदभाव
कछ
ु kयादा ह है। कपोषण
ु तथा बीमाLरयK का कोप भी kयादा है । सबसे बड़ी बात
ये क गांवK के बढ़
ू े ह नहं नई पीढ़ के पढ़े -लखे नौजवानK का Vख भी ऐसा ह था।
लड़कयK को पढ़ाने के नाम पर kयादातर Wामीण लोग ना-नक
ु ु र करते थे। ौढ़ -शCा
केoK पर भी ौढ़K क संcया ह kयादा नजर आती थी। वहां मHहलाएँ कम आती
थी। अना ने अपनी संxC`त सी ारिIभक रपट बनाकर अपने नदशक
i को जयपरु
भेजी थी, उसने पO म+ ोफेसर साहब क बहन को भी यहां आने का नमंOण Hदया
था। शीf ह आशा का जवाब आया क भाईजान उसक ारिIभक रपट से सतq
ु ह^
तथा वह अपना काम जार रख+। अगले माह परCा समा`त होते ह वह भी राजपरु
का एक चJकर लगा लेगी। और सIभव हआ
ु तो ोफेसर साहब को भी अपने साथ
लेती आयेगी।

अना को यह सब जानकर बहत ु खशी


ु हई।
ु उसके भटकाव-उलझाव को एक
कनारा -मलने क उIमीद थी और इसी उIमीद को वह अपने ोजेJट के सहारे
सहे ज रह थी।

चाय पीते समय शाम को उसने -मसेज तभा को यह सब जानकार द तो


वे भी बड़ी खश
ु हई
ु । बोल-

‘‘ इस दे श म+ जब तक मHहलाओं, लड़कयK और Wामीण बTचK का सामािजक


उDथान नहं होगा, तब तक तमाम गत का कोई मतलब नहं है । गत XयिJत
और समाज को उपर उठाने के -लए है या नीचे 4गराने के -लए । आज भी गांव म+
लड़कयK को कम उ„ म+ ह घर के काम काज म+ जोत Hदया जाता है । यह तो शोषण
है भाई । ''

‘‘ ये तो ठaक है मगर हमार Wामीण अथBXयवथा क धर


ू तो XयिJतयK के हाथ-
पांव ह ह^, अ4धक हाथ, अ4धक आमदनी। '' अना ने कहा।

‘‘ नहं ये ठaक नहं है। इस सामािजक ढाँचे को बदलना होगा तभी तो एक नया
खशहाल
ु , सIपन, तथा समs
ृ भारत होगा। इस महान दे श क महानता को बनाये
रखने के -लए Wामीण जगत का सह <वकास आवSयक

है । ''
‘‘ वाह वाह Jया बात है मगर बHहनजी यह आपक कCा नहं, घर है । लिजये
चाय पीिजये ठ\डी हो रह है । '' अना ने मजाक कया।

दोनK हंस पड़ी। और चाय पीने लगी।

इसी समय अ-भमयु बाबू आ गये। नमते क औपचाLरकता के बाद कहने


लगे -

‘‘ गांव से <पताजी का पO आया है । सोचता हू ँ जाकर -मल आऊं और बहन कमला


को यहां ले आउ ताक उसक पढ़ाई जार रह सके । ''

‘‘ -मसेज तभा आप से एक नवेदन है मझे


ु वापस आने म+ एक-दो Hदन लग
सकते ह^ तब तक Jया आप छाOावास के पीछे वाले मैदान म+ चल रहे काम-काज को
चला ल+ गी। म^ नहं चाहता क यह काम अधरा
ू रहे। ''

‘‘ वैसे तो आप ठaक कह रहे है । मगर सना


ु है क धानजी तथा कछ
ु अय लोग
इस काम से नाराज ह^, वे इस जमीन का कोई अय उपयोग करना चाहते ह^। ''
-मसेज तभा बोल पड़ी।

‘‘ वो सब बाद म+ दे ख ल+ गे। जमीन तो <वbालय क है , मगर बध स-मत ओर


धानजी शायद कछ
ु और सोच रहे ह^। म^ने बी․डी․ओ․ साहब से भी चचाB क है और
वे इस जमीन म+ वC
ृ , पाकB,घास आHद <वका-सत करने म+ मदद कर+ गे। '' अ-भमयु
बाबू बोले।

‘‘ तब ठaक है । आप आराम से गांव हो आइये। माता-<पता को ला सक+ तो ले


आइये। आप नि‡ंत रह+ । कायB जार रहे गा। '' -मसेज तभा ने कहा।

‘‘ आप से ऐसी ह आशा थी। ''

अ-भमयु ने शालनता से हाथ जोड़े ओर रवाना हो गया।

0 0 0

अपने गांव के घर म+ आकर अ-भमयु ने सवB थम माँ-बाप के चरण पशB


कये। दोनK बजगˆ
ु ु ने उसे आशीषा। कशल
ु Cेम पछa।
ू कमला क चोट खींचकर
अ-भमयु ने उसे परेू चौक म+ घमाया।
ु फर अटै ची खोलकर कमला के -लए jॉक, बापू
के -लए धोती कताB
ु और मां के -लए साड़ी नकाल कर द। कमला ने jॉक पहनी,
इठलाती हईु गयी और अपने भाई के -लए चाय बना लाई। चाय पीते हए
ु अ-भमयु
ने अपने बापू से कहा-

‘‘ बापू म^ कहता हंू अब आप सभी मेरे साथ चले चलो। वहां पर मझे
ु JवाटBर -मल
गया है । तीन कमरे ह^। और सब ठaक है । अपन सभी वहां आराम से रह सकते ह^। ''

‘‘ वो तो ठaक है बेटा मगर अब इस बढ़


ु ापे म+ इस गांव को छोड़कर कहां जाये।
खेती-बाड़ी है ,खेत ख-लहान ह^ और यह झKपड़ा है । और फर तI
ु हार मां का मन अब
अय कसी जगह नहं लगता है । ''

‘‘ मां को म^ मना लंग


ू ा। बापू आप हां कर दो। ''

‘‘ नहं बेटा अब इन बढ़
ू  हिRडयK का मोह छोड़ दो। हम+ यहं रहने दो खेती-बाड़ी
क दे खभाल भी होती रहेगी और मन भी बहला रहेगा। तम
ु कमला को ले जाओ। उसे
पढ़ाओ -लखाओ। '' बापू ने फर कहा।

‘‘ और अ-भमयु अब तेर शाद भी तो करनी है '' मां बीच म+ बोल पड़ी।

‘‘ तू अब पढ़ -लख गया। नौकर धधे से भी लग गया। अब काहे क दे र। ''

‘‘ हां भैया अब एक भाभी ले भी आओ। घर म+ बड़ा सना


ू सना
ू लगता है। '' कमला
ने कहा।

‘‘ अरे माँ तम
ु भी Jया पचड़ा ले बैठa। अभी तो मझे
ु तयोगी परCा म+ बैठना
है । उसक तैयार करनी है । ''

‘‘ दे खो बेटे ये सब म^ नहं जानती। rबरादर से अभी LरSते आ रहे ह^। फर


HदJकत होगी। '' मां ने फर कहा।

‘‘ कोई HदJकत नहं होगी मां तम


ु 4चता मत करो। ''

‘‘ शायद भैया ने कोई लड़क पसद कर ल है । '' कमला ने कहा।

‘‘ धत ् '' चप।
ु '' ऐसा भी होता है Jया। '' तो फर Jया तय रहा बापू ? '' अ-भमयु
ने पछा।

‘‘ तय यह रहा बेटे क हम दोनK यहं रह+ गे। तम
ु कमला को ले जाओ। और माह
म+ एक बार आकर संभाल जाना। घबराने और 4चता करने क कोई बात नहं है।
परा
ू गांव अपना है ओर फर अकबर भी तो यहाँ है । कछ
ु बात होगी तो उसे बता
द+ गे। '' बापू ने नणBय सनाया।

‘‘ ठaक है। तो कमला तम


ु चलने क तैयार करो। अपन कल सबह
ु ह चल+ गे। ''

‘‘ ओ․के․ भैया । '' कमला ने इठलाकर कहा।

सब _खल_खलाकर हं स पड़े।

अ-भमयु गांव म+ नकल गया। अकबर अपनी दकान


ु पर बैठा था। दोनK गले
-मले। अ-भमयु ने उदास वर म+ कहा-

‘‘ अकबर माँ और बापू साथ नहं चलना चाहते ह^, तम


ु उनको संभालते रहना। म^
कमला को लेकर कल सबह
ु ह चला जाउँ गा। ''

‘‘ इसम+ इतना उदास होने क Jया बात है । अमंगल म+ मंगल छपा है । तू


निSचत रह । म^ मां-बापू का cयाल रखंग
ू ा। ''

‘‘ अTछा अब चलता हंू । मां रोट -लये बैठa हKगी ''

अ-भमयु ने खाना खाया और सो गया।

0 0 0

अ-भमयु अपनी बहन कमला को लेकर जब बस से अपने गांव से राजपरु


आया तो सबह
ु का सरज
ू बादलK से नकलना ह चाहता था। आसमान म+ आषाढ़
बादलK का एक झ\
ु ड था। और हवा म+ ह5क ख़मार
ु थी। रात को ह5क बाLरश हो
चक
ू थी, और अभी बाLरश क संभावना थी। वैसे भी जलाई
ु म+ मानसन
ू ारIभ हो
जाता है ।

अ-भमयु छाOावास म+ अपने JवाटB र म+ आया। कमला को सब समझाया और


तैयार होकर अपने कC म+ आया तभी चारK मॉनीटर भी आ गये।
-लIबाराम ने अ-भवादन के बाद कहा-

‘‘ सर। आपके जाने के बाद छाOावास के पीछे वाले मैदान पर काम करने म+ कछ

परे शानी हई।
ु ''

‘‘ Jया परे शानी हई


ु ? ''

‘‘ बस सर। गांव के कछ
ु लोगK ने आपिDत क । मगर ाचायB साहब ने सब ठaक-
ठाक कर Hदया। ''

इसी बीच सरेु श बोल पड़ा-

‘‘ सर कल शाम को झगड़ा हो ह जाता। वो तो तभा मैडम तथा कछ


ु अय
लोग समय पर पहच
ु ँ गये।''

‘‘ JयK ,झगड़े का कारण। ''

‘‘ गांव वाले इस जमीन को अपने पशओं


ु के -लए चाहते ह^ दसर
ू ओर धानजी
इस जमीन पर अतlमण क फराक म+ थे। '' असलम बोल पड़ा।

‘‘ मगर सर। हमने भी कमर कस ल थी और पJका नSचय कर -लया था क


इस जमीन पर वCारोपण
ृ ,ह कर+ गे। '' -लIबाराम ने बताया।

‘‘ अTछा फर । ''

‘‘ फर सर तभा मैडम ने < िसपल साहब को समझाया। फर < िसपल साहब
ने बी.डी.ओ साहब से बात क । ''

‘‘ अTछा। बात यहाँ तक पहच


ु ँ गयी। ''

‘‘ जी सर। '' फर जब बी.डी.ओ साहब ने आकर गांव वालो तथा धान जी को
समझाया तब बात बनी। -लIबाराम ने पर
ू बात बताई।

‘‘ इसका मतलब है क तम
ु लोगK ने मेरे नहं होने के बावजद
ू एक कला फतह
कर -लया है अब सब लोगK को -मलकर काम करना होगा ताक हम इस मैदान का
सIपण
ू B <वकास कर सक+ तथा जमीन का सदपयोग
ु हो। '' अ-भमयु ने गIभीर वर
म+ कहा। उसे कछ
ु अजीब सा लग रहा था। उसने ोJटर को बलवाया
ु । छाOावास के
मेस, सफाई आHद क Xयवथा के -लए नदश
i Hदये और <वbालय जाने क तैयार
करने लगा।

कछ
ु दे र बाद अ-भमयु <वbालय पहचा
ु ँ , उसने टाफ Vम म+ झांका। कोई नहं
था। ाचायB कC म+ कछ ु अPयापक थे। वह भी वहं चला गया। ाचायB ने उसके
अ-भवादन के जवाब म+ कहा-

‘‘ अ-भमयु बाबू ारिIभक सफलता तो -मल गयी है म^ने बी․डी․ओ․ साहब से


कह सनकर
ु जमीन पर फलहाल <वbालय का क€जा करवा Hदया है मगर िथत
kयादा ठaक नहं है कबे के भावशाल लोग इस जमीन को आसानी से हाथ से नहं
जाने द+ गे। ''

‘‘ आप ठaक कहते ह^ सर । मगर मेर पर


ू को-शश होगी ि◌ क

इस मैदान का परा
ू उपयोग वC
ृ ,पेड़-पौधK, घास आHद के -लए हो। बाLरश हो गयी है
और हम आज ह से वCारोपण
ृ शV
ु कर द+ गे। '' अ-भमयु ने उDतर Hदया।

‘‘ ये तो ठaक है अ-भमयु बाबू मगर अय स<वधाओं


ु हे तु हमारे पास कोई बजट
नहं है । '' < िसपल साहब ने फर कहा।

‘‘ फलहाल म^ आपसे कोई अतLरJत बजट क मांग नहं कVंगा। '' अ-भमयु ने
pढ़ वर म+ कहा। तभी अंWेजी के अPयापक एटोनी बोल पड़े.-

‘‘ लेकन हम+ इन सब से Jया लेना दे ना। अपनी कCा ल+ । नौकर कर+ । वेतन ल+ ।
और घर जाय+। हम इस पचड़े म+ JयK पड़+ ''

‘‘ आप इस पचड़े से rब5कुल दरू रह+ । एटोनी साहब। मगर मेर बात अलग है ।
एक सीमा के बाद आदमी को कसी से डरने क जVरत नहं है। न समाज न अफसर
से और न अपने आपसे JयKक गलत काम नहं करना है।'' अ-भमयु ने pढ़ वर म+
जवाब Hदया।

‘‘ सवाल गलत या सह काम का नहं ह^ सवाल ये है क जमीन पर क€जा चाहने


वाले लोग बड़े भावशाल ह^ और वे हम सभी के -लए मसीबत
ु खड़ी कर सकते है । ''
महे श जी बोल पड़े।
‘‘ अब ये सब तो भगतना
ु ह पड़ेगा। आ_खर कब तक अयाय के सामने घटने

टे क कर िजया जा सकता है। और फर कानन
ू तथा शासन हमारे साथ है । ''
अ-भमयु ने तीखे वर म+ कहा।

‘‘ शायद आप ठaक कहते ह^। मगर अगर मसीबत


ु आई तो हम सभी पर आयेगी।
भगतना
ु हम सभी को ह है । हम सभी को यहं रहना है और पानी म+ रहकर मगर से
बैर नहं करना चाHहये। '' एटोनी बोल पड़े।

‘‘ ठaक है। अ-भमयु बाबू आप अपना काम जार रख+। '' ाचायB ने नणाBयक वर
म+ कहा।

तभी ाथBना क घ\ट बजी। सभी ांगण क ओर बढ़ चले। नय-मत काम


शV
ु हो गया।

अ-भमयु अपनी कCा म+ आया। उसने छाOK से वाय -शCा क बात


करना ारIभ क । सभी छाO यह जानने को उDसक
ु थे क Jया वे अपने घर के
अदर मामल
ू बातK का Pयान रखकर बीमार से बच सकते ह^। <वhान के इस CेO
म+ उनक जानकार बहत
ु कम थी। अ-भमयु ने अपने गIभीर वर म+ छाOK से संवाद
कायम करते हए
ु अPयापन ारIभ कया। छाO भा<वत होते चले गये ।

अ-भमयु ने बताया क Wामीण वय केoK पर टकाकरण, गभBवती


मHहलाओं क दे खभाल, पLरवार क5याण आHद क नश5
ु क स<ु वधा होती है। सन ्
2000 तक सबके -लए वाय का नारा <वSव तर पर Hदया जा रहा है और यHद
साफ सफाई, पाने के पानी क शsता
ु का ह Pयान रख -लया जाये तो बहत
ु सी
बीमाLरयK से बचा जा सकता है। Wामीण CेOK म+ वय सधार
ु के -लए जVर है क
WामीणK को वाय सIबधी जानकार उनक भाषा म+ तथा सामाय तरके से द
जाये। आप लोग चाह+ तो अपने घर पLरवार, मोह5ले, पड़ोस म+ लोगK को पेयजल क
शsता
ु के बारे म+ बता सकते ह^ इससे बड़ा लाभ होगा। खाना खाने से पहले हाथ
अTछa तरह धो लेने माO से कई बीमाLरयK से बचा जा सकता है <वषय को गIभीरता
बनाते हए ु अ-भमयु ने फर कहा- सब वय हKगे तभी दे श वथ होगा। और दे श
क खशहाल
ु सभी के वाय म+ छपी
ु हई
ु है। आप लोग अपने खाल समय म+ गांव
क खशहाल
ु के -लए लोगK म+ वाय के त जागVकता पैदा कर+ ।

‘‘ लेकन सर। वाय रCा इतनी जVर है तो फर हमार पहले वाल पीढ़ इस
ओर Pयान JयK नहं दे ती। ''एक छाO पछ
ू बैठा।
‘‘ कारण बड़ा साफ है, अ-शCा। ाचीन काल म+ सभी जागVक थे। लेकन गलामी

के दौर ने हम+ अ-शxCत कर Hदया। अ-शCा के अंधेरे ने हम+ पंगु,

काHहल बना Hदया। हमार ाचीन संकृत म+ वाय सIबधी जो जानकाLरयां थी


हम उह+ भल
ू गये। उपर से कपोषण
ु और गरबी ने हमार हालत और भी खराब कर
द। इसी कारण वाय -शCा हम सभी के -लए जVर है । और अ-शCा का अधेरा
-मटे गा तो सब का वाय ठaक होगा। ''अ-भमयु ने <वषय को समा`त कया। तभी
घंट बजी। वह कCा से बाहर आया। टाफ Vम क ओर चल Hदया।

वहां पर -मसेज तभा व अना बैठa बतया रह थी।

अ-भवादन के बाद उसने अना से पछा।


‘‘ आपका ोजेJट कैसा चल रहा है ? ''

‘‘ ोजेJट क गत संतोषजनक है । मैन+ जो ारिIभक रपट जयपरु भेजी थी उसे


नदशक
i महोदय ने ठaक बताया है । लेकन कछ
ु बात+ समझ म+ नहं आती ह^। गांवK
म+ वरोजगार और Oी -शCा क िथत बहत ु खराब है कछ
ु लोगK म+ नशाखोर क
आदत+ भी ह^। सामािजक बरा
ु इयाँ भी है । कल म^ एक गांव म+ गई थी। वहां पर गांव
वालK ने बताया <पछले साल एक गरब आदमी क rबHटया क शाद दहेज के कारण
नहं हो सका। ''

‘‘ दहे ज के राCस ने एक पLरवार उजाड़ Hदया। ''-मसेज तभा बोल।

‘‘ गांवK म+ ऐसी घटनाएं कम ह ह^। ''अ-भमयु ने कहा।

‘‘ हां घटनाएं तो कम होती ह^ मगर इह+ रोकने का कोई तरका भी तो हो। ''
तभा मैडम ने कहा।

‘‘ तरका एक ह है -शCा का उजाला फैलाओ। और कया को भी अपने पांवK पर


खड़ा होने का अवसर दो। ''

‘‘ शासन भी तो कछ
ु कर+ । आये Hदन अखबारK म+ बाल <ववाह के समाचार आते
रहते ह^। '' अना बोल।

‘‘ हां केवल कानन


ू या नयम बना दे ने से समया का समाधान नहं हो जाता है,
सामािजक समया से लड़ने के -लए परेू समाज को जागत
ृ होकर लड़ना पड़ता है और
आप जानती है क अनपढ़ आदमी से kयादा खतरनाक होता है कुपढ़। कुपढ़ गांव-
कबK म+ खब
ू -मलते ह^ उपर से छोट मोट नेता4गर क स<वधा
ु या शासन म+
पहंु च। गरब आदमी भी इन कु पढ़ लोगK से बच कर जी नहं सकता। ये लोग
सामािजक बरा ु इयK को थोपते है और आम आदमी को सहन करना पड़ता है ।''
अ-भमयु ने समझाया।

‘‘ मगर आम आदमी इस बराई


ु को समझता JयK नहं। ''

‘‘ समझता है खब
ू समझता है मगर उसक मजबर
ू है । वो lाित क ‰ाित म+
नहं पड़ना चाहता। पानी म+ रहकर मगर से बैर कौन ले। गांव वालK को रहना तो
उहं लोगK के बीच है । ''अ-भमयु ने कहा।

‘‘ लेकन अब तो बहओं
ु को जलाने जैसी घटनाएं भी कभी कभार होने लगी है । ''
अना ने फर कहा।

‘‘ हां ये भी शहर सŠयता का साद है पहले गांवK-कबK म+ ऐसा नहं होता था। ''
अ-भमयु बोला।

‘‘ यHद गांवK म+ वरोजगार के साधनK का <वकास हो तो िथत म+ सधार


ु आ
सकता है ।''-मसेज तभा ने कहा।

‘‘ मगर रोजगार है कहाँ ? अना ने पछा।


‘‘ है । गांवK से शहरK क ओर पलायन करने क संकृत को रोकने क जVरत है


गांव अपने तर पर रोजगार पैदा कर सकता है गांवK म+ बहत
ु संभावनाएं ह^ और इन
संभावनाओं को तलाशा जाना चाHहए। ''अ-भमयु बोल पड़ा।

तभी छ…ी
ु क घ\ट बजी। अ-भमयु भी छाOावास क ओर चल पड़ा।

0 0 0

इस कबेनमा
ु गांव म+ धान जी का बोलबाला था। वे ह यहां के सवसवाB
i थे।
आने वाला हर अफसर उनक चौखट पर हाजर दे ता था। मगर सामतशाह के <वदा
होने के साथ साथ धान जी का रोबदाब कम होता जा रहा था। वे इस बात से
परे शान थे। इधर नया <वकास अ4धकार भी उह+ कछ
ु नहं समझता था। धान जी
का मकान कबे के बीचKबीच था। वे िजले के मc
ु यालय से छपने वाले थानीय पO
को पढ़ रहे थे। पO म+ <वbालय म+ पयाBवरण कायBlम तथा वCारोपण
ृ का समाचार
<वतार से छपा था। वे इस समाचार से नाराज थे। मगर कछ
ु कर नहं पा रहे थे।
इसी समय <वbालय के ाचायB महोदय आये। और अ-भवादन कर बोले।

‘‘आपने बलाया
ु था । ''

‘‘ जी हां, आपके यहां जो नया लड़का आया है और जो छाOावास का वाडBन भी है।


Jया नाम है उसका ? ''

‘‘ जी अ-भमयु बाब।ू ''

‘‘ हां उसे थोड़ा समझा दे ना। मेरे से पंगा लेकर वह ठaक नहं कर रहा है । यहां पर
हकम
ु ू त हमार है । ये ठaक है क वCारोपण
ृ का हो गया। <वकास अ4धकार क बात
चल गयी। मगर अब आगे कसी नये काम म+ हाथ नहं डाल+ तो ठaक होगा। ''

‘‘ लेकन वो हमार जमीन थी और हमने उसका उपयोग कया। इसम+ गलत Jया
था ? ''

‘‘ सवाल सह या गलत का नहं है सवाल ये है क Jया ये कल के छोकरे मझे



पढ़ाय+गे। ''

‘‘ आप गलत समझ रह+ है । अ-भमयु बाबू ने केवल छाOK तथा <वbालय के Hहत
म+ काम कया है। तथा पयाBवरण म+ सधार
ु से सभी का फायदा है। वषाB समय पर
होगी। गरमी कम पड़ेगी। वातावरण ठaक रहेगा। पशओं ु , पेड़,पौधK सभी
ु ,पxCयK,मनyयK
को शs
ु वायु -मलेगी। '' ाचायB ने <वतार से समझाया।

‘‘ मझे
ु भाषण मत दो। म^ सब जानता ह।ू ँ हम उस जमीन का अ4धWहण कर
सकते थे। मगर म^ने यह ठaक नहं समझा। मेर पहच
ु ँ राजधानी तक है। ''

‘‘ आप के भाव से म^ इकार नहं करता। '' ाचायB बोले।

‘‘ सवाल ये है क म^ अपने आद-मयK को कैसे समझाऊं, वे कहं कछ


ु कर बैठे तो
तI
ु हारे अ-भमयु बाबू बड़ा कq पाय+गे। ''

‘‘ ठaक है सर म^ चलता ह।ू ँ ''

‘‘ हाँ उह+ कसी सामािजक झंझट से दरू रहने क सलाह दे ना चपचाप


ु आये कCा
ल+ और वेतन ल+ । ''
ाचायB महोदय चले गये। उनके मन म+ कई तरह के <वचार आ रहे थे। वे
धान जी के नHहत वाथˆ तथा घHटया हथकंडK से पLर4चत थे। इधर अ-भमयु बाबू
एक यवा
ु उDसाह अPयापक थे वे उनके उDसाह को भी बनाये रखना चाहते थे।

वे जब <वbालय क ओर बढ़ रहे थे तभी छाOावास का ोJटर अवतार -संह व


कछ
ु अय छाO दौड़ते हए
ु आये ाचायB से बोले-

‘‘ सर अ-भमयु सर पर कातलाना हमला हआ


ु हे वे बेहोश है । हम आपको खबर
करने आये ह^ कछ
ु अय छाO अपताल ले गये ह^। ''

‘‘ चलो अपताल चलते ह^। '' ाचायB व छाO तेजी से अपताल क ओर चल पड़े।
डाJटर ाचायB से पLर4चत थे। बोले-

‘‘ घबराने क बात नहं है । मामल


ू चोट आई है शायद हमलावर kयादा कछ
ु कर
नहं पाये। शीf ह होश आ जायेगा।''

तभी प-लस
ु वाले भी आये। अ-भमयु बाबू एक खाट पर लेटे थे। -सर पर प…ी
थी। उहKने आंखे खोल। ाचायB व छाOK को दे ख कर मकराने
ु ु क को-शश क ।
कमला उनके पास ह खड़ी थी। ाचायB के पछने
ू पर अ-भमयु बाबू ने प-लस

कायBवाह के -लए मना कर Hदया।

‘‘ ये छोटे मोटे हादसे तो होते रहते ह^ सर। इनम+ थाना, प-लस


ु , कोटB , कचहर क
नहं आपसी समझ और सदभाव क जVरत है। वे लोग अपनी गलती समझ जाय+गे।
JयKक धान जी के आदमी शायद जमीन के मामले म+ मेरे से नाराज थे।
''अ-भमयु बाबू ने शात वर म+ कहा।

‘‘ हां ये तो उहKने मझसे


ु भी कहा था। '' ाचायB बोल पड़े।

‘‘ सर आपक इजाजत हो तो Hहसाब-कताब बराबर कर द+ । '' अवतार -संह बोल


पड़ा।

-लIबाराम और असलम ने भी हां भर। मगर अ-भमयु बाबू तर


ु त बोल पड़े।

‘‘ नहं नहं। कभी नहं। हम+ Hहंसा से नहं `यार और भाईचारे से उह+ जीतना है ।
''
तभी खबर पाकर -मसेज तभा तथा अना भी आ गयी। अ-भमयु बाबू क
दे खरे ख का िजIमा ाचायB ने छाOK को Hदया। रात म+ Xयवथा हे तु नदश
i दे कर वे
चले गये। अ-भमयु बाबू आराम करने लगे।

कछ
ु Hदन तक कबे म+ तनाव रहा मगर अ-भमयु बाबू क सझबझ
ू ू तथा
छाOK पर उनके नयOण के कारण कोई अ< य घटना नहं घट। बीमार के दौरान
अ-भमयु बाबू ने घर पर खबर नहं होने द। वे वयं बीमार से आDमबल से लड़े
और ज5द ठaक हो गये। छाOावास म+ आकर अ-भमयु बाबू ने वCारोपण
ृ क अपनी
योजना को पनः
ु जार रखा। वे सबह
ु Jलास लेते। सायंकाल वCारोपण
ृ कायBlम को
दे खते ओर रात म+ तयोगी परCाओं क तैयार करते। बाLरश का मौसम आ गया
था। नहे नहे पौधे धीरे धीरे बढ़ रहे थे कत
ृ ने एक हर मख़मल चादर ओढ़ रखी
थी। पौधK को दे खकर अ-भमयु बाबू अJसर खश
ु होते। उह+ लगता मानK सैकड़K
बTच+ एक साथ _खल_खला रहे हK।

-लIबाराम और साथी मॉनीटरK ने छाOावास के कमजोर छाOK क एक सची



बनाकर उनको पढ़ाने क Xयवथा क । इससे छाOK म+ एक नये उDसाह का संचार
हआ।
ु असलम ने फटबाल
ु क टम+ बनाई और रोजाना मैदान पर अŠयास करने लगा।

अवतार -संह ने एक रोज आकर बताया क छाOावास के कमरा नIबर पTचीस


म+ रहने वाला छाO रं जन आजकल गमसम
ु ु और अकेला रहता है । अ-भमयु बाबू ने
एक रोज शाम के समय रं जन को अपने कC म+ बलाया
ु और उससे `यार से पछा।

‘‘ बोलो रं जन तI
ु ह+ Jया परे शानी है, म^ने सना
ु है तम
ु कोई नशील दवा खाने लगे
हो। ''

ारIभ म+ तो रं जन मना करता रहा। मगर बाद म+ सहानभत


ु ू पाकर बोल
पड़ा।

‘‘ सर। म^ अDयत दखी


ु और परे शान ह।ू ँ मेरे माता-<पता के पास धन तो बहत
ु है
मगर मेरे -लए समय rब5कुल नहं है इसी कारण छाOावास म+ रहता ह।ू ँ बचपन म+
महनK म^ अपने <पता से बात नहं कर पाता था। मIमी अलग सामािजक काय? म+
Xयत रहती थी। एक रोज मेरे -मO ने मझे
ु यह डग का राता Hदखा Hदया। ''

‘‘ Jया छाOावास म+ तI
ु हारे अलावा भी कोई ऐसी दवा लेता है ? ''

‘‘ नहं। ारIभ म+ म^ने एक आधा कश -लया मजा आया। फर म^ आHद होने
लगा। ''
‘‘ अTछा तम
ु मेरे साथ डाJटर के चलो। ''

पर
ू बात सनकर
ु डाJटर साहब बोले-

‘‘ नशील दवाओं का सेवन एक <वSवXयापी समया है मगर रं जन अभी ारिIभक


अवथा म+ है । कछ
ु दवाओं और कछ
ु नेहभाव से ठaक हो जायेगा। ''

अ-भमयु बाबू ने रं जन के कमरे म+ -लIबाराम क Rयट


ू लगा द और रं जन
म+ धीरे धीरे खोया हआ
ु आDम<वSवास वापस आने लगा। उहKने ाचायB को कह कर
रं जन के <पता को भी बलाया।
ु रं जन के <पता को सब कछ
ु समझाया गया। उहKने
तमाह रं जन को दे खने आने का वादा कया। अगल बार रं जन के माता <पता आये।
रं जन उस Hदन बहत
ु खश
ु था। मां बाप के जाने के बाद रं जन ने डग छोड़ने का
नSचय कया। अ-भमय,ु -लIबाराम व अय छाOK ने रं जन को अपने साथ रखा।
धीरे -धीरे रं जन ठaक हो गया।

रं जन अब नशील दवाओं के -शकंजे से बच गया था। वह छाOावास के अय


छाOK को इन दवाओं, तIबाकू आHद के कहर से अवगत कराने लगा। पढ़ाई के साथ
साथ रं जन को इस काम म+ मजा आने लगा।

अ-भमयु बाबू ने नशे से बचने के -लए छाOK म+ जागVकता लाने के उtदे Sय


से डाJटर साहब क एक वाताB छाOावास म+ कराने का नSचय कया। डाJटर साहब
इस कायB हेतु सहषB तैयार हो गये।

सायंकाल के समय छाOावास के कॉमनहाल म+ अ-भमयु बाबू ने सभी छाOK


को एकrOत होने का नदश
i Hदया। ारिIभक उtबोधन के बाद डाJटर साहब ने अपनी
बातचीत ारIभ क । उहKने कहा- म^ भाषण दे ने के बजाय आन लोगK के साथ एक
संवाद कायम करके अपनी बात कहंू गा ताक आप लोग नशे क बराइयK
ु और उसके
दy भाव
ु को आसानी से समझ सक+। ''

‘‘ वातव म+ मादक oXयK का योग एक गंभीर <वSवXयापी समया है । आज क


पीढ़ क सामािजक, व मान-सक िथत कल क पीढ़ से अलग है। पीHढ़यK के इस
अतराल के कारण एक संवादहनता क िथत बन गयी है, ओर आज का यवा
ु इस
संवादहनता का हल नशील चीजK म+ तलाशता है । रं जन ने यह कया था। उसके
<पता माता से उसका संवाद नहं हो रहा था। JयK रं जन। ''

‘‘ जी हां डाJटर साहब म^ अकेलेपन और उपेCा से ऊब गया था । ''


‘‘ तम
ु ठaक कहते हो रं जन। उपेCा के कारण XयिJत नशे क और व
ृ होता है ।
शहर पLरवेश, समाज, पाSचाDय संकृत आHद कारण भी यवा
ु को नशे क ओर
धकेलते ह^। ऐसी िथत म+ कोई साथी उह+ दवा क पहल खराक
ु दे ता है, मजा आता
है और फर XयिJत उसका आHद हो जाता है। आज तवषB लाखK लोग तIबाकू के
सेवन से मर रहे ह^। तIबाकू के अलावा, गाँजा, चरस, अफ म, हे रोइन, ‹ाउनशग
ु र, मेक
आHद दवाओं का घातक असर Œदय संथान, फेफडK, Hदमाग आHद पर होता है। ''

‘‘ लेकन सर Jया नशे से पीwड़त Xयw को सामािजक तरकार से ठaक कया


जा सकता है ? '' -लIबाराम ने पछा।

‘‘ नहं बेटे। नशे से पीwड़त Xयw को सहानभत


ु ू चाHहए। उस कारण का पता
लगना चाHहए िजससे वह नशे का आHद होता है । तभी उसे नशे क लत से छटकारा

Hदलाया जा सकता है । ''डाJटर साहब ने शंका समाधान कया।

नशे वाले यवा


ु को `यार, सहानभत
ु ू से ठaक कया जा सकता है । उहKने
उपसंहार कया।

छाOK पर वाताB का बहत


ु अ4धक असर हआ।

रं जन व कछ
ु अय छाOK ने -मलकर कबे के यवाओं
ु को तIबाकू सेवन के
नकसान
ु बताने हे तु एक -श<वर लगाया। -श<वर से कबे म+ एक जागVकता आई।
पLरणाम वVप कई यवाओं
ु ने तIबाकू के सेवन से बचने क कसम खाई।

मगर धान जी के आदमी इस घटना से फर नाराज हो गये। उनके ह


आदमी डग बेचते थे। अ-भमयु बाबू के इस यास पर फर एक रोज ाचायB को
टे लफोन पर कहने लगे।

‘‘ दे खो < ं-सपल साहब ये सब ठaक नहं है । '' अ-भमयु बाबू इसी तरह करते रहे
तो हम+ दसरे
ू राते काम म+ लाने हKगे। '' ाचायB को धमक दे ते हए
ु धान जी बोले।

‘‘ वो तो आप आजमा चक
ु े ह^। अ-भमयु बाबू पर हमला हो चका
ु है । ''

वो मेरा काम नहं था। म^ उह+ हटवा दं ग


ू ा। न रहेगा बांस न बजेगी बांसुर। ''

‘‘ दे _खये धान जी अPयापक का जो दायDव ह^ वह अ-भमयु बाबू कर रहे ह^।


इस लड़ाई म+ म^ उनके साथ ह।ू ँ JयKक सTचाई, ईमानदार और नैतकता हमारे साथ
है हमारा राता इसाफ़ का राता है। '' ाचायB बोले।
‘‘ म^ तI
ु ह+ भी समझा रहा ह।ू ँ ''

‘‘ म^ जानता हू ँ आप Jया कहना चाहते ह^ मगर अPयापक के पास नैतक बल के


अलावा है ह Jया, हम इसी बल पर िजदा ह^ और रह+ गे। ''

‘‘ जैसी तI
ु हार मजF। म^ अपने आद-मयK को नाराज नहं कर सकता।'' ये कहकर
धान जी ने टे लफोन रख Hदया।

ाचायB ने एक गहर सांस ल और टाफ Vम क ओर चल पड़े। वहां पर


अ-भमयु बाबू व अय अPयापक थे। ाचायB ने संCेप म+ धान जी से हई
ु बातचीत
का €योरा Hदया। तो ग_णत के ग`ु ता जी बोल पड़े।

‘‘ हम+ इन सब झगड़K म+ पड़ने क जVरत Jया है ? ''

‘‘ हम अपनी कCा ले और आराम कर+ ।'' चo मोहन शमाB बोल पड़े। कछ
ु अय
अPयापकK ने भी उनका साथ Hदया। तभी -मसेज तभा ने कहा हम सब -मलकर
यHद कसी अTछे काम म+ साथ नहं दे सकते तो हमारे होने का अथB ह Jया रह
जाता है ? ''

अ-भमयु बाबू ने लड़कK म+ नशील दवा क आदत छुड़ाने के यास कये तो


सभी को अTछा लगना चाHहए। आ_खर यह एक <वSवXयापी समया है और एक पर

पीढ़ के भ<वyय का Sन है। Jया गमराह
ु पीढ़ को सह राता Hदखाना हमारा कतBXय
नहं है । ''

‘‘ समया का नदान यह तो नहं क हम कबे के भावशाल लोगK से लड़+। ''

‘‘ हम कहां लड़ रह+ ह^। '' ाचायB बोले। ‘‘और न ह हम+ लड़ना है। ''

‘‘ हमार िजIमेदार हमारे छाO और उनका सवाgगीण <वकास है । हम+ नैतक म5


ू यK
क रCा करनी है । ''

‘‘ आप ठaक कहते ह^ सर। ''पहल बार अ-भमयु बोल पड़ा।

‘‘ समाज म+ Xया`त बराई


ु का यHद एक अDयत छोटा सा Hहसा भी हम नq कर
सक+ तो यह हमार एक बड़ी सफलता होगी और इस सफलता के -लए हम+ कछ
ु सहन
भी करना पड़े तो करना चाHहए। '' अ-भमयु ने pढ़ वर म+ कहा।'' और फर
समयाओं से भागकर हम जाय+गे कहाँ, वे तो साये क तरह हमारे पीछे लगी रहे गी।
हम+ समयाओं से नपटना पड़ेगा। चाहे वे सामािजक हो या आ4थBक या राजनैतक या
फर मान-सक। ''

‘‘ ठaक है। ाचायB बोल पड़े। अगले महने हम <वbालय म+ भी कछ


ु सांकृ तक
कायBlम कर+ गे। म^ चाहता हंू क इन कायBlमK क बागडोर -मसेज तभा आप
संभाले।''

‘‘ जैसा आप उ4चत समझ+। ''

छ…ी
ु क घ\ट बजी।

सभी लोग अपने अपने घरK क ओर चल पड़े।

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सायंकाल का समय था। अना और -मसेज तभा टहलती हई ु छाOावास म+


आई। कमला वहं थी। वे तीनK बात+ करने लगी। थोड़ी दे र म+ अ-भमयु बाबू मेस क
Xयवथा दे खकर लौटे , तो बोले।

‘‘ अना जी आपका ोजेJट कैसा चल रहा है ? ''

‘‘ ठaक चल रहा है । अगले माह ोफेसर यहाँ आय+गे तब पर


ू जानकार हो
सकेगी।''

‘‘ अTछा तब सांकृतक कायBlम म+ उह+ ह मc


ु य अत4थ बना ल+ । '' तभा ने
कहा।

‘‘ हां हां JयK नहं यह तो खशी


ु क बात होगी।'' अना बोल पड़ी। अ-भमयु ने भी
सहमत जता द।

सोचती हंू इस बार सांकृ तक कायBlम म+ कछ


ु नया कर+ । आप Jया सोचते
है ।''
‘‘ नया अवSय कर+ , मगर समया- धान चीज+ ल+ , ताक हम नई पीढ़ को कोई
सदे श दे सक+। बाल<ववाह, बा-लका -शCा, नशील दवाओं से बचाव आHद पर कोई
वाद <ववाद या नाटक कया जा सकता हे । ''

हम नशाबद,-मलावट,अथB श4चता
ु ,पर भी कछ
ु कायBlम कर सकते ह^। ''
अ-भमयु ने <वषय सझाये
ु । अना ने कहा।

‘‘ हम छाO--शCक संबधK पर भी चचाB कर सकते ह^। <वषयK क कमी नहं है । ''

‘‘ हां <वषय तो और भी हो सकते ह^, <वधवा <ववाह, दहे ज, कालाबाजार, गांवK से


पलायन, वरोजगार आHद। मगर कायBlमK का वVप कैसा हो ? '' -मसेज तभा ने
जानना चाहा।

‘‘ कायBlम जनV4चकर तथा -शCा द भी हो।'' अ-भमयु क बात+ -मसेज तभा


को जम गयी।

अब बातचीत का <वषय अना का ोजेJट हो गया। तभी कमला चाय बना


लाई। चाय पीते हए
ु अना बोल।

‘‘ पVष
ु धान समाज म+ नार क िथत कैसे सधर
ु सकती है ? ''

‘‘ शायद आप गलत सोचती ह^। नार ह नार क सबसे बड़ी शOु है । एक नार
दस
ू र नार का शोषण करती है । धर म+ भी और समाज म+ भी। मामला दहेज का हो
या -शCा का। नार नार का साथ नहं दे ती। '' अ-भमयु बोला।

‘‘ म^ने यरोप
ू म+ भी दे खा और अपने दे श म+ भी। वहां भी मन भटकता है। यहां भी
भटकता है भटकाव ह औरत क िजदगी है Jया ? ''

‘‘ नहं। भारतीय परIपरा और संकृत म+ नार मन म+ भटकाव नहं है भटकाव


पाSचाDय संकृत क दे न है । और अभी भी औरत Oी भटकाव म+ नहं लगाव म+
जीती है और यह कारण है क हमारे दे श म+ शाद एक प<वO बधन है । '' अ-भमयु
बोला।

‘‘ हां ये तो है। '' -मसेज तभा ने कहा।

इसी कारण पिSचम क तलना


ु म+ हमारे समाज म+ थायDव है । मन धर
पLरवार म+ एकाकार हो जाता है । आथा वाद <वचारK के कारण भारतीय जन मानस
वयं का ह नहं सIपण
ू B <वS व का क5याण करता है वह सब को साथ लेकर चलता
है । सब के त समभाव। धमB हमारे -लए एक साधन है । बाधा नहं। '' अ-भमयु ने
कहा।

तभी छाOावास के चौक दार ने आकर अ-भमयु के हाथ म+ तार Hदया। तार
अ-भमयु बाबू के धर से आया था उनके <पताजी क तrबयत ठaक नहं थी।

अ-भमयु बाबू ने तर


ु त कमला से कहा तैयार हो जाओ। हम अभी गाँव
चल+ गे। ''

-मसेज तभा ने कहा-‘‘ आप बापू व मां को यहं ले आइए ''

अना ने भी कहा-‘‘ हां यहं ठaक रहे गा यहां पर 4चकDसा क स<वधा


ु भी
अTछa है। ''

अ-भमयु बाबू बोले-‘‘ म^ तो शV


ु से ह इसी को-शश म+ था। मगर माँ बापू
मानते ह नहं थे। अब जाकर ले ह आता ह।ू ँ ''

‘‘ आप kयादा 4चता नहं करे । ईSवर सब ठaक करे गा। उसम+ आथा से जीवन
क हर कHठन घड़ी गजर
ु जाती है। '' -मसेज तभा ने अ-भमयु को सांDवना द।

‘‘ अमंगल म+ मंगल छपा है । सब ठaक हो जायेगा। '' अना ने भी कहा।

‘‘ अTछा हम चलते ह^। आप बाप-ू मां को लेकर ज5द आयेगा। '' ये कहकर अना
-मसेज तभा चल पड़ी।

अना व -मसेज तभा के जाने के बाद अ-भमयु व कमला ने बस पकड़ी


और गांव पहंु च गये।

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अ-भमयु और कमला जब गांव पहंु चे तो रात गहरा चक


ु थी। गाँव सनसान

और नीरव था, अपने घर तक पहचने
ुँ म+ अ-भमयु ने शीfता बरती। घर के बाहर ह
उसे अकबर -मल गया।
‘‘ कैसे ह^ बाबजी।
ू '' अ-भमयु ने अधीरता से पछा।

‘‘ अब ठaक है । वे सो रहे ह^। मां उनके -सरहाने बैठa ह^। ''

कमला तर
ु त भीतर चल गयी। वो मां से -लपटकर रो पड़ी। अ-भमयु भी
अदर आया। माँ के चरण छए।
ु बाबजी
ू के बारे म+ पछने
ू लगा।

‘‘ Jया हआ
ु था। ''

‘‘ अब बढ़
ु ापा सबसे बड़ी बीमार है बेटा। '' मां ने रोते हए
ु कहा।

‘‘ कछ
ु Hदन बखार
ु रहा। वैbजी क दवा द । फायदा नहं हआ।
ु एक रोज बेहोश
हो गये। फर होश आया तो बायाँ Hहसा काम नहं करता है। ''

‘‘ अ-भमय,ु बापू के लकवा हो गया है । '' अकबर ने हक कत बताई।

‘‘ मां अब म^ तम
ु दोनK को यहां नहं रहने दं ग
ू ा। कल सबह
ु ह बापू को लेकर
राजपरु चल+ गे। वहं अTछा इलाज भी हो सकेगा ''

‘‘ जैसा तम
ु ठaक समझो बेटा। अब हमारे Hदन ह कतने ह^ काश तम
ु शाद कर
लेते तो कछ
ु चैन -मलता। ''

तभी अ-भमयु के बापू ने आँख+ खोल। पहचानने क को-शश क ।

अ-भमयु ने चरण छए।


ु वह बापू के शरर पर मा-लश करने लगा। मां व
कमला घर के काम म+ लग गयी।

अकबर चला गया। अ-भमयु सने


ू कमरे म+ अकेले चपचाप
ु <वचार करने लगा।
उसे याद आया हाड़ तोड़ मेहनत कर घर चलाने वाला बाप,ू आज कैसी असहाय िथत
म+ है । उसे अपने घर पLरवार के अभाव, भख
ू , बेकार के Hदन भी याद आये। उसका
मन उदास हो गया। उसे याद आया बचपन म+ नंगे पांव कूल जाना। एक ह कत
ु i को
रात म+ धोकर सबह
ु पहन कर परCा दे ने जाना। इस गांव से कतनी याद+ जड़ु ी हई

है । बचपन और जवानी क याद+ । िजदगी क कठोर याद+ अभावK क याद+ । भखू और
`यास क याद+ । अकाल क याद+ । उसे फर याद आया कस तरह परCा के HदनK म+
भी उसने अकबर का कताB
ु पहन कर परCा द थी, JयKक उसका इकलौता कताB
ु नद
म+ बह गया था। और तर
ु त दसरा
ू कताB
ु बनवाने को पैसे नहं थे। इसी गांव के पोट
आफस के बाहर बैठकर उसने लोगK के पO और तार -लखे थे। कभी नःश5
ु क और
कभी पैसे लेकर ताक अपनी पढ़ाई जार रख सके। उसक आंख+ भर आई। बापू ने
एकाध बार तो उसके कूल क फ स मां के गहने बेचकर भर थी। समय ने सब धो
Hदया। बापू ने तभी पानी मांगा। अ-भमयु तoा से जागा। बापू को पानी <पलाया।
खद
ु भी <पया। रात काफ बीत गयी थी। अ-भमयु वहं बापू के पैताने सो रहा।

सबह
ु अ-भमयु, मां, कमला और बापू को लेकर राजपरु चला आया। वहां पर
सवB थम अ-भमयु ने बापू को डाJटर साहब को Hदखाया और दवा शV
ु हई।
ु धीरे धीरे
बापू क तrबयत सIभलने लगी। <वbालय के अPयापक भी अ-भमयु के घर पर
कशलCे
ु म पछने
ू आये। छाOावास क Xयवथा अ-भमयु ने पनः
ु सIभाल ल ।

रं जन क नशील दवा लेने क आदत छट


ू चक
ु थी। कमजोर बTचK को
-लIबाराम व अय हो-शयार छाO पढ़ा रहे थे। वCारोपण
ृ तथा मैदान का काम ठaक
था। छाO सांकृतक कायBlमK क तैयार म+ Xयत थे। कछ
ु छाO -मलकर एक
पrOका भी नकालना चाहते थे। शायद हत-ल_खत -भिDत पrOका क योजना थी।

इधर तयोगी परCाओं क तैयार भी अ-भमयु रात को पनः


ु करने लगा।
उसे अपने सफल होने क उIमीद भी थी। ारिIभक -ल_खत परCा वह पास कर
चका
ु था। अभी अितम -ल_खत परCा होने म+ तीन माह थे वह बापू क बीमार के
कारण कछ
ु परे शान था। मगर मां व कमला सब सIभाल रह थी। यदा कदा -मसेज
तभा तथा अना भी आ जाती थी। बापू क तrबयत संभल रह थी अब वे खाट पर
बैठ सकते थे। बोलने लग गये थे।

अ-भमयु ने मां से कहा- ‘‘ माँ मझे


ु <वbालय के सांकृ तक कायBlमK म+ कुछ
समय kयादा दे ना पड़ सकता है । ''

‘‘ ठaक है बेटा तम
ु काम म+ Xयत हो जाओ म^ और कमला सब सIभाल ल+गी। ''

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<वbालय के टाफ Vम म+ सांकृतक कायBlमK के lम म+ ाचायB ने


अPयापकK तथा कCाओं के मॉनीटरK का एक उपवेशन बलाया
ु था। सभी लोग ाचायB
कC म+ उपिथत थे।

-मसेज तभा ने सवB थम सांकृतक कायBlमK क Vपरे खा तुत क । तीन


Hदन तक चलने वाले इस समारोह म+ मc
ु य अत4थ के Vप म+ समाज<वhान के
ोफेसर -संह आ रहे थे। उसक वीकत
ृ -मल चक
ु थी। समारोह म+ नाटक, वाद-
<ववाद तथा नबध तयो4गताएँ होनी थी। खेलकद
ू तयो4गताएँ अलग स चल रह
थी। कछ
ु छाOK ने एक पrOका नकालने क बात कह। ाचायB महोदय ने एक
हत-ल_खत पrOका नकालने क Xयवथा करने के नदश
i एटोनी सर को Hदये
ताक छाOK क सजनाD
ृ मक तभा काश म+ आय+।

अितम Hदन समापन समारोह म+ पर


ु कार <वतरण कायBlम म+ <वकास
अ4धकार के बलाने
ु का नSचय कया गया। ाचायB ने -मसेज तभा के साथ कछ

अय छाOK तथा अPयापकK क Rयट
ू लगा द ताक काम सचाm
ु Vप से चल सके ।
उtघाटन सO के तर
ु त बाद वाद-<ववाद तयो4गता रखी गयी थी। <वषय भी रोचक
था। ‘‘दहे ज था का औ4चDय'' छाOK म+ उDसाह था। अPयापक भी इस कायBlम को
सफल बनाने म+ जट ु े हए
ु थे। अगले सोमवार से कायBlम शV
ु होने थे। सोमवार आया।
जयपरु के ोफेसर -संह नधाBLरत समय पर अना के यहां आ गये। अना ने अपनी
ोजेJट रपट Hदखाई। ोजेJट क गत से वे खश
ु थे। सतq
ु भी। आशा भी साथ
आयी थी। अना व आशा आपस म+ बतयाने लगी। तभी तभा ने कहा।

‘‘ चलो कूल म+ कायBlम के उtघाटन का समय हो रहा है । ''

ो․-संह ने कायBlम का <व4धवत उtघाटन कया, छाOK ने सभा भवन को खब



सजाया था।

ारIभ म+ ाचायB महोदय ने <वbालय के इतहास पर काश डाला। ो․-संह


ने अपने संxC`त मगर सारग-भBत भाषण म+ दे श क इस नई पीढ़ को भावी कणBधार
बताया। उहKने नये यग
ु के नमाBण क महDता को समझाया और छाOK को यग

नमाBता क संhा द।

कायBlम चल ह रहा था क rबजल घल


ु हो गयी। तभी एक कोने से शोर
शराबा हआ
ु कछ
ु छाO आपस म+ झगड़ने लगे। कछ
ु अPयापक दौड़े मगर तब तक दे र
हो चक
ु थी। भीड़ म+ धान के आदमी घस
ु आये थे। असामािजक तDवK ने -मलकर
तोड़ फोड़ नारे बाजी शV
ु कर द थी। ''

ाचायB महोदय ने मौके क नजाकत को सIभालते हए


ु मंच से कहा

‘‘ आप लोग शांत हो जाइये <वbालय क गLरमा का Pयान र_खये। हम सब इसी


<वbालय क तuा से जुड़े हए
ु ह^।
तभी कोई चीज सनसनाती हई ु और अ-भमयु बाबू के -सर पर लगी। उनके
-सर से खनू बहने लगा सारा वातावरण rबगड़ गया। शोरगल
ु , अधकार और आपा
धापी का माहौल बन गया, ाचायB क आवाज शोर म+ डब
ू गयी।

अ-भमयु बाबू को तर


ु त अपताल ले जाया गया उह+ मरहम प…ी के बाद
छ…ी
ु दे द गयी। कबे म+ भी तनाव था। छाO उDतेिजत थे। वे दो दो हाथ करना
चाहते थे। कबे म+ जनता भी धानजी व उनके आद-मयK से तंग आ चक
ु थी। मगर
अ-भमयु बाब,ू ाचायB आHद ने छाOK को समझाकर शात कया।

मगर छाOK के मन म+ धान जी के त आlोश था। वCारोपण


ृ का मामला,
फर रं जन तथा कछ
ु अय को नशील दवाएं बेचने का मामला आHद से कबे क
आम जनता तथा छाO सभी परे शान थे। मगर वे लोग मजबरू थे कई बार कबे वालK
ने को-शश क थी। मगर धान जी के हाथ लIबे थे। प-लस
ु - शासन उन पर हाथ
डालने म+ _झझकता था। वे एक तरह से माफया लडर हो गये थे।

<वbालय म+ घट घटना का <ववरण अखबारK म+ छपा था। छाO फर उDतेिजत
हो रहे थे। छाOावास म+ मीHटंग करते। मगर अभी तक कायBवाह नहं क गयी थी।
अ-भमयु अJसर घम
ू घम
ू कर छाOK को समझाता। ाचायB ने समारोह को समा`त
ध<पत
ू कर Hदया। पर
ु कार <वजेता छाOK को पर
ु कार दे Hदये गये। छाOK का एक दल
इन सबसे अलग अPययन म+ Xयत हो गया। परCाएं पास आ रह थी।

अ-भमयु भी अपनी तयोगी परCा क तैयार म+ लग गया बापू का


वाय धीरे धीरे सधर
ु रहा था।

एक रोज शाम को वो छाOावास म+ अपने कC म+ बैठा था तभी ोJटर अवतार


-संह आया। कहने लगा।

‘‘ सर एक इशारे क दे र है हम सब -मलकर धानजी व उनके आद-मयK से


नपट सकते ह^। ''

‘‘ नहं अवतार -संह हम+ यह नहं करना है । पाप का धड़ा भरने दो अपने आप
फट
ू जायेगा। ''

‘‘ मगर सर आप तो कहते थे क अयाय को सहना भी अयाय है। ''


‘‘ हां म^ अब भी कहता हंू । मगर जब तक प\
ु य है तब तक XयिJत क
kयादतयाँ चलती है। पाप का घड़ा तो रावण का भी भर गया था। और फर वह
वतः नयत के हाथK नq हो गया था। ''

‘‘ ठaक है सर। सर एक ओर बात है मेरे चाचा अपनी लड़क का €याह ज5द


करना चाहते है। वो अभी बारह वषB क ह है । ''

‘‘ ये तो गलत है। बाल <ववाह क़ानन


ू न अपराध है इसके -लए शारदा एJट बन
चका
ु है । ''

‘‘ हमने समझाया मगर चाचा मानते ह नहं है । ''

‘‘ भैया मझे
ु ले चलो। गांव के बड़े बज
ु ुगˆ को इका करो। '' ये सब तो रोकना ह
पड़ेगा। यHद सामािजक बराइयK
ु को नहं रोक सकते तो हमारा पढ़ा -लखा होना बेकार
हे । ''

‘‘ चाचाजी कहते ह^। ज5द शाद से कई परे शानयK से बच सकते ह^। फर गौना
तो दे र से करते ह^। ''

‘‘ चाचाजी गलत कहते ह^। ज5द शाद से स^कड़K परे शानयाँ पैदा होती है । तम

चाचाजी को समझाओ। उह+ पO -लखो। जVरत पड़े तो मझे
ु ले चलो। ये नहं होना
चाHहए। अपने गांव के सरपंच क मदद लो। ''

‘‘ म^ फर को-शश करता हंू । सर आप चलते तो ठaक रहता। ''

तभी अना अपने ोफेसर -संह के साथ आई।

‘‘ आप अभी यहं ह^ ोफेसर साहब ''◌ं। अ-भमयु ने अ-भवादन के बाद पछा।


‘‘ हां सोचा कछ
ु Hदन रहकर यहां के गांवK म+ Oी व बTचK क िथत पर एक
प
ु तक -लख।ूँ ''

‘‘ये तो खब
ू अTछa बात है । ''

‘‘ लेकन मिS
ु कल ये है क गांवK के लोग kयादा सहयोग नहं करते ह^।'' अना
बोल पड़ी।

हां तम
ु ठaक कहती हो। ''
‘‘ इस अवतार -संह के चाचाजी अपनी लड़क का बाल <ववाह करना चाहते ह^
मगर हम सभी को -मलकर इसे रोकना होगा।''

‘‘ हां सर आप सभी च-लये।'' अवतार -संह बोला। मामला ोफेसर -संह व अना
क V4च का था सो अवतार -संह, के साथ सभी उसके गांव चल पड़े। गांव पास ह
था। अवतार -संह ने अपने घर म+ जाकर चाचा को बताया क उसके अPयापक तथा
बड़े ोफेसर साहब आये है चाचा शVु म+ नाराज हए।
ु मगर अ-भमयु बाबू के तकˆ
तथा ोफेसर -संह के नवेदन से बात उनक समझ म+ आयी। अ-भमयु ने अवतार
-संह के चाचा से कहा-

‘‘ दे _खये। आपक लड़क अभी कल


ु बारह वषB क है । अभी तो इसके खेलने खाने
के Hदन ह^।''

‘‘ लेकन बाद म+ rबरादर म+ लड़का आसानी से नहं -मलता है । गांव म+ बदनामी


होती है । ''

‘‘ काहे क बदनामी। सरकार ने इस बाल <ववाह को गैर काननी


ू घो<षत कर रखा
हे ।''

‘‘ सवाल कानन
ू का नहं है माटर जी। सवाल समाज और गांव तथा rबरादर का
है आप तो चले जाय+गे। हम+ तो यहं रहना है। ''

‘‘ दे _खये हम सभी आपसे नवेदन करते ह^ क इस बाल <ववाह को रोकये। यह एक


सामािजक अपराध है ।'' ो․-संह बोले।

अवतार -संह और अ-भमयु बाबू ने भी समझाया।

गांव के सरपंच भी आ गये। धीरे धीरे अवतार -संह के चाचा पर बातK का


असर हआु उसने अपनी बTची का <ववाह अारह वषB पर करने का नSचय कया
उसने बाल <ववाह नहं करने क सौगध के साथ ह गांव म+ सरपंच के साथ -मलकर
बाल <ववाह रोकने म+ सहयोग करने क सौगध खाई इस सफलता से सभी बड़े खश

थे। वे रात म+ ह वापस राजपरु लौट आये। अना ने ोजेJट म+ इस घटना का वणBन
<वतार से करने का नSचय कया। दसरे
ू Hदन ोफेसर साहब वापस चले गये
समाचार छपाया। चारK तरफ अ-भमयु बाबू क तारफ हई।
ु साथी अPयापक भी खश

ु ाचायB ने अ-भमयु बाबू को बला
हए ु कर शाबाशी द ।
इसी बीच राजपरु के धान जी ने कछ
ु लोगK को इक‘ा कया और अ-भमयु
बाबू के _खलाफ भड़काया। कछ
ु लोग इस बात से भी नाराज थे क <ववाह जैसे प<वO
कायB म+ भी अ-भमयु बाबू रोड़ा अटकाते ह^। मगर अ-भमयु बाबू ने कोई तlया
XयJत नहं क ।

<वbालय म+ अPयापन के बाद अ-भमयु बाबू छाOावास म+ अपने JवाटB र म+


आते। बापू क सेवा सeषा
ु ू करते और कमला क पढ़ाई--लखाई दे खते। तयोगी
परCाओं क तैयार करते।

0 0 0

एक Hदन अ-भमयु बाबू को ाचायB ने अपने कC म+ बलाया


ु और कहा-

‘‘ अ-भमयु बाबू म^ इस लड़ाई म+ तो आपके साथ हू ँ JयKक आप सTचाई,


ईमानदार, और नैतक म5 ू यK के -लए काम कर रहे ह^ मगर मेर कछ
ु सीमाएं है और
आप जानते हKगे क एक सीमा के बाद हमसे ब केवल मकदशB
ू क रह जाते हे । ''

‘‘ आपसे सहमत हू ँ सर। मगर आप 4चता नहं करे । मेरा दायDव म+ खब



समझता ह।ू ँ इसका अितम पLरणाम थानातरण या ोबेशन पर होने के कारण
बखाBतगी भी जानता ह।ू ँ '' अ-भमयु बाबू ने अपना पC रखा।

‘‘ बात ये है अ-भमयु बाबू क आज सबह


ु ह धान जी का फोन आया था, वे
एक बार आपसे -मलना चाहते है मेरा भी cयाल है क -मल लेने म+ हजB ह Jया है ।
आपक और उनक कोई XयिJतगत लड़ाई तो है नहं ''

‘‘ लड़ाई तो वाथˆ और म5
ू यK के बीच है सर। ''

‘‘ और फर वे एक बार <पटवा चक


ु े ह^ धमकयां Hदलवा चक
ु े ह^। फर -मलने का
औ4चDय Jया है ? ''

‘‘ मेर सलाह मानकर एक बार आप उनसे -मल ल+ । शायद बात सलझ


ु जाये वे
यह बात आपके भ<वyय के -लहाज से कहा ह।ू ँ आज सायंकाल आप मेरे साथ उनके
यहां चल+गे। ''
‘‘ यHद यह आपका आदे श है तो मझे
ु वीकार है । म^ सायंकाल आपके साथ चला
चलंग
ू ा।'' यह कह कर अ-भमयु बाबू बाहर आ गये। सारे Hदन उनका कसी काम म+
मन नहं लगा। सायंकाल के समय ाचायB धानजी के बंगले पर पहचे
ु वहां पर कछ

लोग पहले से ह थे। एक दो को और अ-भमयु बाबू ने पहचान -लया। धान जी ने
कहा।

‘‘ दे खो अ-भमयु तम
ु सधार
ु के अTछे काम कर रहे हो। '' मझे
ु भी यह सब
अTछा लगता है । मगर जातO म+ सबके HहतK को Pयान म+ रखना पड़ता है । अब
दे खो तमने
ु मेस के इस ठे केदार के काम को बद कर Hदया। ''

‘‘ तो Jया -मलावट खाना _खलाकर बTचK को बीमार कर दे ता ? ''

‘‘ दे खो खाने से कोई नहं मरता, भख


ू से मरते ह^। '' और ये कशनबाबू के दवा का
तो कारोबार ह चौपट हो गया। कोई भी इनक दकान
ु से दवा खरदने नहं आता। ''

‘‘ तो इसम+ मेरा Jया कसरू है ? वे नशील दवा का धधा करते थे। पकड़े गये।
छापा पड़ा। बदनाम हए।
ु अखबारK म+ छपा। '' अ-भमयु बाबू उखड़ गये।

‘‘ मेर बात Pयान से सन


ु लो।'' ‘‘ धान जी ने कठोर आवाज म+ कहा। ''

‘‘ इसी कार आसपास के गांवK म+ -शCा के नाम पर बाल <ववाह रोकने के यास
भी तमने
ु तथा तI
ु हारे छाOK ने कये ह^। ''

‘‘ यह एक सामािजक बराई
ु है और इसे रोकना जVर ह^ ''

‘‘ सHदयK से चल आ रह परIपरा बराई


ु नहं होती। ''

‘‘ दादा अपने पोते का €याह अपने सामने करना चाहता है फर गौना बाद म+
यवाव
ु था म+ होता है इसम+ बराई
ु Jया है । ''

‘‘ बराई
ु ये है क शाद दो प<वO आDमाओं का -मलन है ।'' ग’
ु डे गw’
ु डयK का €याह
नहं ''

ठaक है छोड़ो इस बात को। म^ने तI


ु ह+ और ाचायB को यह कहने बलाया
ु है क
आप लोग अपने काम से काम रखो। इन XयथB के पचK म+ नहं पड़ो।'' ‘‘ ये XयथB
के पंच नहं है । धान जी।'' इस बार ाचायB बोल पड़े। ‘‘ ये हमार -शCा का एक
महDवपणB
ू Hहसा है और हम सभी को इस यh म+ मदद करनी चाHहए।''
‘‘ दे खो < िसपल साहब म^ आपको फर समझाता ह।ू ँ '' क आप वCारोपण
ृ वाल
जमीन से हाथ खींच ल+। ''

‘‘ ऐसा कैसे हो सकता है। यह तो <वbालय क जमीन है।''

‘‘ मेरे हाथ बहत


ु लIबे ह^। '' इस बार धान जी ने सीधा वार कया।

‘‘ म^ आप दोनK का [ासफर करा दं ग


ू ा। या फर राजधानी जाकर अ-भमयु बाबू
को बखाBत करा दं ग
ू ा। आप दोनK अपने आपको समझते Jया ह^।''

अब अ-भमयु बाबू ने lोध म+ आकर कहा।

‘‘ आप जो चाहे कर ल+ । हम+ अपने मागB पर चलने द+ । आप क हरकतK का जवाब


दे ने के बजाय हम अपना काम करना kयादा पसद कर+ गे। हमारा काम ह हमारा
जवाब है । ''

‘‘ ठaक है फर म^ आपको दे ख लंग


ू ा। ''

धान जी के यहां से अ-भमयु बाबू सीधे छाOावास क ओर चल पड़े। ाचायB


भी चले गये। अ-भमयु बाबू का मन उदास था। राते म+ छाO -मले। मगर उहKने
Pयान नहं Hदया सीधे अपने कC म+ आये। बापू अब ठaक थे। कमला क परCाएं
चल रह थी अ-भमयु बाबू चपचाप
ु छत पर टहलने लगे। कछ
ु ह HदनK म+ तयोगी
परCाएं शV
ु होने वाल थी। उहKने अपना Pयान परCा क ओर केिoत करने का
नSचय कया ओर सो गये।

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अना अपने कमरे म+ -मसेज तभा के साथ अपनी सवCण


i रपट को अितम
Vप दे ने के पवB
ू <वमशB कर रह थी। बातचीत को शV
ु करते हए
ु अना ने कहा।

‘‘ Wामीण CेO म+ बा-लकाओं पर कभी Pयान नहं Hदया है । उह+ हमेशा एक भार
समझा गया। इसका बड़ा मनोवैhानक असर पड़ा है । और ये बा-लकाएं बड़ी होकर
जब माँ बनती है या गह
ृ थ जीवन म+ वेश करती है तब भी अपने आपको कमजोर,
असहाय समझती हुई हमेशा कसी के सहारे जीवन यापन करती है। ''
‘‘ तम
ु ठaक कहती हो लेकन बा-लकाओं पर अब Pयान Hदया जाने लगा है उह+
अब पढ़ने भी भेजा जाता है । बीमार होने पर इलाज भी कराया जाता है। '' -मसेज
तभा ने बात को आगे बढ़ाया।

‘‘ लेकन सबसे अहम समया तो -शCा क है। खासकर ौढ़ मHहलाओं क -शCा


तथा उDतर साCरता क और अभी kयादा Pयान नहं Hदया जा रहा है । एक और बात
जो मैने सवi के दौरान महसस
ू क है वो ये क हर कोई यह समझता है क पढ़ने का
कोई लाभ लड़क या मHहला को -मलने वाला नहं है । जब क हक कत म+ बात ऐसी
नहं है । एक कया को -शxCत करने अथB है एक परेू पLरवार को -शxCत करना।
JयKक -शxCत मHहला दसरे
ू पLरवार म+ जा करके -शCा क नई अलख जगाता है। ''
अना ने अपना नyकषB तत
ु कया।

‘‘ राजपरु तथा आसपास के गांवK,खेड़K, ढा_णयK म+ जाकर म^ने यह महसस


ू कया है
क समाज म+ उपेxCत Oी और बा-लका दोनK ह^। जबक दे श के भ<वyय के -लए
इनको सखी
ु , वय और खशहाल
ु रखा जाना चाHहए।'' अना फर बोल।

‘‘ और फर इतने सारे बधन। सब मHहलाओं के -लए ह^। '' -मसेज तभा ने
कहा।

‘‘ हां बधनK का अपना अलग इतहास है। सHदयK क गलामी


ु तथा VHढ़वाHदता ने
बेwड़याँ डाल द है। <वदे शी हमलK से बचने के -लए नये नये बधन मHहलाओं और
बा-लकाओं पर लगाये गये थे। '' अना बोल।

‘‘ हां और फर कई जगहK पर पैदा होते ह लड़कयK को मार डालने क परIपरा


भी तो थी। ''

‘‘ हां यह दखद
ु अPयाय भी था मगर यह समा`त हो चका
ु है। ''

हां इतहास म+ रह गयी ह^ ये बात+ । मगर अभी भी इस दे श म+ मHहलाओं क


िथत म+ सधार
ु हे तु बहत
ु कुछ कया जाना है । ''

‘‘ तम
ु ठaक कहती हो। तम
ु अपनी LरपोटB म+ कछ
ु सझाव
ु भी दे ना। ''

‘‘ निSचत Vप से। म^ चाहगी


ू ँ क इस रपट के कछ
ु अंश छप+ और उन पर बहस
हो। ताक आगे के कायBlमK पर काम हो सके। ''
‘‘ अना एक बात बताओ। तI
ु हारा ोजेJट तो अब शीf ह समा`त हो जायेगा।
फर सोचा है Jया करोगी।''

ु नहं सोचा। म^ सोचना भी नहं चाहती जो हाथ म+ है उसे परा


‘‘कछ ू कर लंू। बस
फर शायद वह उलझाव, भटकाव शायद वापस पापा के पास चल जाउं । वे हैदराबाद
म+ ह^। नई मIमी ने बड़े `यार से बलाया
ु है मगर कछ
ु कह नहं सकती। कछ
ु निSचत
भी नहं है तम
ु जानती हो मेरा मन तो बस पंछa क तरह है बस उड़ जाना चाहती
हंू । ''

‘‘ तI
ु हारा मन पंछa है मगर सब कोई तो पCी नहं बन सकते। र<ववार को
तI
ु हारे जीजाजी आय+गे। ''

‘‘ अTछा सच। कतनी खशनसीब


ु हो तम।
ु '' दोनK हंस पड़ी।

रात गहरा रह थी। अना व -मसेज तभा सो गये।

धान जी ने अपनी कायBवाह शV


ु कर द थी। ाचायB और अ-भमयु बाबू
अपने अपने काम म+ Xयत थे। कबे के थानीय लोगK म+ धानजी तथा उनसे जुड़े
नHहत वाथˆ वाले लोग इधर-उधर अ-भमयु बाबू के _खलाफ जहर उगल रहे थे।
इधर छाOावास म+ भी छाOK म+ फट
ू डालने क को-शश क जा रह थी। वातावरण ठaक
नहं था। अ-भमयु बाबू के बापू का वाय भी kयादा ठaक नहं था।

इधर धान जी राजधानी का चJकर भी लगा आये थे। और उहKने कबे म+


अफवाह उड़वा द थी क शीf ह ाचायB और अ-भमयु बाबू को ठaक करने के
आदे श राजधानी से आ जाय+गे।

छाOावास म+ िजस ठे केदार को अ-भमयु बाबू ने घHटया और -मलावट खाना


_खलाने के कारण नकाल Hदया था, वो ठे केदार भी धानजी के साथ था। <वbालय म+
छाOK म+ कई कार क बीमाLरयां होने लग गयी थी। छाOावास के मॉनीटर तथा
ोJटर भी असमंजस क िथत म+ थे। इसी बीच ाचायB ने एक रोज टाफ मीHटंग
बलाई।
ु वे बोले-

‘‘ शीf ह छाOK क परCाएं होने वाल ह^। अ4धकांश कCाओं म+ पा“यlम परा
ू हो
चका
ु है । ऐसी LरपोटB -मल है। यHद कसी कCा म+ पा“यlम अधरा
ू है तो कपया
ृ उसे
परा
ू कराव+। ''
‘‘ सर। परCा के HदनK क Rयट
ू क िथत कैसी रहे गी। <पछल बार भी काफ
तनाव था। '' एटोनी बोले।

‘‘ तनाव होते रहते ह^। हम+ इन सबके बजाय वयं के काम क ओर Pयान दे ना
चाHहय+ ठaक है क सांकृतक कायBlम के दौरान कुछ गड़बड़ी हो गयी। मगर ऐसा
हर बार तो नहं होगा। '' ाचायB ने कठोर वर म+ कहा।

‘‘ फर भी सर। कछ
ु सरCा
ु Xयवथा।'' ग_णत के महे श जी बोल पड़े।

‘‘ इस तरफ से आप निSचंत रह+ । नकल <वरोधी कानन


ू पास हो चका
ु हे । म^ इसे
पर
ू सcती से लागू कVंगा। आप लोग निSचंत होकर परCा Xयवथा क ओर Pयान
द+ । अपरा4धक तDवK को कोई Lरयायत नहं द जाय+गी।''

‘‘ सर म^ कछ
ु कहना चाहता हंू । '' अ-भमयु बाबू ने अनमत
ु मांगी।

‘‘ यस -म․ अ-भमय।ु ''

‘‘ सर Jया ऐसा नहं हो सकता क हम लोग छाOK को पहले से ह इस कार से


तैयार कर+ क नकल <वरोधी कानन
ू क आवSयकता ह नहं पड़े।''

‘‘ वो कैसे।'' ाचायB ने पछा।


‘‘ पा“यlम समय पर परा


ू होने के बाद यHद सभी छाO अTछa तैयार कर+ तो इस
अ4धनयम क जVरत ह नहं पड़े। '' अ-भमयु बाबू ने पछा।

‘‘ ये थोथा आदशBवाद है । '' एटोनी बोल पड़े।

‘‘ थोथा आदशB नहं, eीमान हम अपने 4गरे बान म+ झांक+ Jया हम सब पा“यlम
के साथ याय करते ह^। पा“यlम के साथ याय नहं होने से भी नकल होती है ।''

‘‘ खैर छोड़ो इस बहस को। जVरत पड़ने पर हम इस नयम का उपयोग कर+ गे।
आप लोग अपना अपना दायDव परा
ू कर+ । ''

यह कह ाचायB ने उपवेशन समा`त कया। और अ-भमयु बाबू को अपने कC


म+ रोक -लया।

‘‘ दे खो अ-भमयु बाबू इस बार परCा म+ आप को सहायक केoाPयC बनाया जा


रहा हे। ताक सब कछ
ु Xयविथत और ठaक चले। ''
‘‘ सर म^ अभी बहत
ु जनयर
ू हंू ।''

‘‘ सवाल सीनयर-जनयर
ू का नहं। <वSवास का है,वैसे भी हमारे यहां के छाOK का
परCा पLरणाम शत- तशत रहता है । हां एक बात और धानजी व उनके लोग
अपना काम कर रह+ ह^। तम
ु थोड़ा सावधान रहना। ''

‘‘ सर मेरा उtदे Sय तो केवल संथा क तuा को उपर उठाना है , म^ने हर काम


को इसी कोण से दे खा और सोचा है । ''

‘‘ ठaक है तम
ु चलो। ''

अ-भमयु बाबू नमकार करके बाहर आये। टाफ Vम म+ -मसेज तभा तथा
कछ
ु अPयापक बैठे थे। शायद उह+ इस बात क जानकार -मल गयी थी क
अ-भमयु बाबू को सहायक केoाPयC बनाया गया है। -मसेज तभा ने बधाई द।

मगर कछ
ु अPयापकK ने अ-भमयु बाबू को दे ख कर मंुह rबचकाया। अ-भमयु
बाबू ने शालनता से कहा।

‘‘ मझे
ु आप सभी लोगK के सहयोग क आवSयकता है । परCा का काम सभी का
काम है। हम+ <वbालय म+ Xयवथा को बनाये रखना हे । और हमारा <वbालय तो िजले
म+ अXवल रहता हे । ''

‘‘ हां वो तो आप नहं थे तब भी अXवल था। '' एटोनी ने कहा।

‘‘ हम+ इस परIपरा को बनाये रखना है । ''

तभी चपरासी ने आकर कहा।

‘‘ सर। आपके <पताजी क तrबयत बहत


ु खराब है ।''

अ-भमयु तर
ु त अपने JवाटB र क ओर चल पड़ा। वहां पहंु चकर दे खा <पताजी
बेहोश थे। छाOK का एक झ\
ु ड भी वहां था। मां ओर कमला रो रह थी। उहKने तेजी
से छाOK को हटाया मां-कमला को सांDवना द। और बापू को अपताल ले जाने क
तैयाLरयां क । अपताल म+ डाJटरK ने जांच के बाद बताया क कडनी का आपरे शन
होगा। और अभी करना होगा तर
ु त खन
ू क जVरत थी। अ-भमयु बाबू ने अपना
खन
ू दे ने क पेशकश क । तब तक छाOावास के छाO और तभा तथा अना भी वहां
ू -मला। छाO मोहIमद शरफ तथा
पहंु च गयी थी। छाOK म+ से केवल दो छाOK का खन
एथेनी का खन ू रोगी के खन ू से -मला। वातव म+ सभी के समझ म+ आ गया क
खन
ू जात-पात, सI दाय, छोटे -बड़े म+ <वभािजत नहं कया जा सकता। साI दायकता
से उपर होता है खन
ू का रं ग जो केवल लाल होता हे ।

अना का खन
ू भी -मल गया। इस कार बापू को अना व मोहIमद शरफ
का खन
ू चढ़ाया गया। उनका आपरे शन सफल रहा।

शाम को अपताल म+ बापू क िजदगी और मौत क लड़ाई म+ डाJटर जीत गये थे


आपरे शन के बाद दे खभाल क िजIमेदार अना,मां और कमला ने अपने -सर पर ले
ल। बापू kयादा बोल नहं सकते थे, मगर चपचाप
ु आंखK से सब XयJत कर दे ते थे।

अ-भमयु के बापू अवथ तो थे, मगर मन से कछ


ु कहना ओर करना चाहते
थे, उहKने इशारे से अ-भमयु को अपने पास बलाया
ु और अटकते हए
ु कहा-

‘‘ बेटे इस नSवर दे ह का Jया भरोसा। कब Jया हो जाये। मेर बड़ी इTछा है क


शरर कसी के काम आ जाये। बेटे मेर तमना है क म^ अपने शरर का दान कर
दं ।ू नेO दान तथा दे हदान के फामˆ पर दतखत कर दं ।ू तम ु कायB कर लेना।
ु बचे हए
''

अ-भमयु क मां भी यह वाताBलाप सन


ु रह थी। तर
ु त बोल पड़ी।

बेटा दो फामB लाना। एक मेरे -लए भी। ''

‘‘ JयK माँ ऐसा JयK ? ''

बेटा इससे बड़ा प\


ु य का काम और Jया हो सकता है क मेर मDृ यु के बाद
मेर आंखK से कोई नेOहन Xयw इस दनया
ु को दे ख सके और इस संसार का
आनद ले। म^ भी तेरे बापू क तरह ह नेOदान का प\
ु य कमाऊ
ु ं नी। ''

‘‘ अTछा मां जैसी आप दोनK क इTछा। ''

शाम को अ-भमयु ने आकर फामˆ पर माता <पता के दतखत कराकर


थानीय 4चकDसालय म+ जमा कर Hदये ताक दे ह दान का काम सफल हो सके।

अ-भमयु के माता <पता ~ारा दे हदान का समाचार अखबारK म+ बड़ी स_खB


ु यK म+
छपा। वातव म+ वाय -शCा म+ अखबार बहत ु महDवपणB
ू भ-मका
ू अदा कर सकते
ह^। अ-भमयु के माता <पता को इस सDकमB के -लए चारK तरफ से बधाई -मल।
इससे ेLरत होकर कबे के कई लोगK ने भी नेOदान हे तु फामB भरे । शV
ु म+
कछ
ु लोग इस कायB से असंतq
ु थे। मगर जब उह+ बताया गया क XयिJत क मDृ यु
के बाद ह नेOK तथा दे ह के अय अंगK को काम म+ -लया जाता है तो काफ kयादा
संcया म+ नेOदान के फामB भरे गये। लेकन धान जी व उनके आदमी इस काम से
भी नाराज हए।
ु उनके आद-मयK ने पछा
ू ‘‘ मDृ यु के बाद शरर क ऐसी ददBु शा। नरक
-मलेगा। ''

कतु लोगK ने धानजी क बातK क ओर Pयान नहं Hदया। नेOदान एक


संक5प क तरह हो गया। नेOदान महादान व दे हदान के नारे से कबा गंज
ू उठा।

0 0 0

अ-भमयु बाबू <वbालय म+ परCा क तैयार करने लगे। परCाय+ निSचत


Hदवस से सचाm
ु Vप से चलने लगी। धान जी के आद-मयK ने गड़बड़ी क को-शश
शV
ु म+ क । मगर ाचायB क pढ़ता तथा प-लस
ु - शासन क ठोस Xयवथा से
अXयवथा नहं हो पाई। धान जी मनमसोस कर रह गये। इधर वे फर राजधानी
गये थे, लेकन ाचायB या अ-भमयु बाबू के _खलाफ कछ
ु खास नहं कर पाये थे।
दसर
ू ओर धीरे -धीरे कबे के लोगK को अ-भमयु बाबू क योजनाओं पर <वSवास
होता जा रहा था। पयाBवरण, -शCा, ौढ़-शCा तथा अना ~ारा कये जा रहे सब काय?
क कबे क जनता को अखबारK के जLरये जानकार -मल रह थी। साथ ह वे यह
भी महसस
ू कर रहे थे क इन सब काय? म+ अ-भमयु या उनक टम के कसी भी
सदय का कोई XयिJतगत वाथB नहं है। ये सब परोपकार का काम है और धमB का
काम हे। जनता म+ एक नई जागVकता एक नया उDसाह इस वषB दे खने म+ आया था।
छाOावास के छाO अपने खाल समय म+ कबे म+ इन कायBlमK क चचाB करते।
सफलता का eेय ाचायB अ-भमयु बाबू तथा अना को दे ते। शासन ने भी इन
काय? म+ सहयोग Hदया था। <वकास अ4धकार इनके काय? से संतq
ु थे। ऐसी िथत
म+ धानजी का दखी
ु होना वाभा<वक था उनके कछ
ु खास लोग हमेशा इस टोह म+
रहते ह^ क कूल या छाOावास म+ कछ
ु गड़बड़ी हो तो वे मामले को उठाय+। मगर
उह+ नराशा ह हाथ लगी।

इसी बीच अ-भमयु बाबू ने तयोगी परCा क अितम परCा पर गIभीरता


से Pयान दे ना शV
ु कया। अ ैल के अितम स`ताह म+ परCा थी। अ-भमयु बाबू के
बापू का वाय अब ठaक था। वे अपताल से वापस छाOावास आ गये थे। मां और
कमला उनक सेवा कर रह थी। अ-भमयु बाबू परCा दे ने जाने वाले थे। मां के पास
आकर बोले।

‘‘ मां मेर आई․ए․एस․ क परCा सोमवार से शV


ु हKगी तैयार मैने कर ल है ।
बापू क तrबयत भी ठaक है। तम
ु कहो तो परCा दे आऊं। शहर जाना होगा।''

‘‘ जVर जाओ बेटा। परमाDमा तI


ु ह+ कामयाब कर+ । यहां म^ और कमला सब
सIभाल ल+गे। फर अना- तभा मैडम तथा छाO तो ह^ ह। ''

‘‘ हां मां सोचता हंू परCा दे ह आऊं। '' यह कहकर उहKने मां बापू के चरण छए

और परCा दे ने के -लए चले गये। परCा दे कर अ-भमयु बाबू वापस राजपरु आये
तो ाचायB ने उह+ बलाया
ु और कहा।

‘‘ धान जी अपने काम म+ सफल हो गये ह^। आज राजधानी से भी टे लफोन


आया है । '' शायद कछ
ु बर
ु खबर आने वाल है । ‘‘ अTछा तI
ु हारे पचi कैसे हए।

'' ाचायB ने पछा।

‘‘ सब ठaक हो गये सर। मझे


ु <वSवास है क मेरा चयन हो जायेगा। ''

‘‘ शाबाश। तम
ु 4चता मत करो। सब ठaक हो जायेगा।''

शाम को बापू क तrबयत का हालचाल पछने


ू अना व तभा आई तो अना
ने अ-भमयु से परCा के बारे म+ पछा।

‘‘ पेपर तो ठaक हो गये ह^ साCाDकार भी ठaक ह हआ


ु हे । ''

‘‘ सब हो जायेगा। आप जैसे जहन, ईमानदार और नैतक म5


ू यK म+ pढ़ आथा
रखने वाले अफसरK क दे श को बड़ी जVरत है '' अना ने कहा।

आ_खर कायB पा-लका जातO का एक तIभ है । '' -मसेज तभा बोल।

‘‘ हां वो तो ठaक है मगर चयन होना इतना आसान भी नहं है । ''

‘‘ आसान नहं है मगर असंभव भी तो नहं है । ''

‘‘ हां ये बात तो है। ''

कमला चाय ले आयी। -मसेज तभा ने कमला क परCा के बारे म+ पछा


ू -
‘‘ मेरा तो पLरणाम भी आ गया। आठवीं म+ थम eेणी म+ उDतीणB हुई हंू ।'' कमला
ने चहक कर कहा।

‘‘ ओह। शाबाश। बधाई -मठाई कब _खलाओगी। '' अना ने कहा। सब


_खल_खलाकर हस
ँ पड़े।

बापू का वाय अब ठaक-ठaक था। मगर लगातार सेवा से मां क तrबयत


गड़बड़ा गयी थी। अ-भमयु ने मां को डाJटर साहब को Hदखाया। वे बोले।

‘‘ थकान और वsाव
ृ था से ऐसा हो जाता है आप इह+ ताकत क दवाइयाँ दे तथा
कछ ु फल, दध
ू एवं पौ<qक आहार द+ । ठaक हो जाय+गी।, 4चता जैसी कोई बात नहं है।
''

अ-भमयु बाबू सबह


ु शाम माँ-बापू क सेवा म+ रहते । एक शाम माँ ने कहा-

‘‘ बेटा अब मेरा बढ़
ु ापा है , बापू बीमार है बस एक इTछा हे ,बहू का मंुह दे ख लंू।
एक बात बता। अना के बारे म+ Jया सोचता है रे त।ू ''

अ-भमयु शरमा गया। इस p<q से कभी सोचा भी नहं था। मामल


ू शैC_णक
जान पहचान थी बस। बोला-

माँ ऐसी भी Jया ज5द है बापू को परा


ू ठaक हो जाने दे । मेर मानK तो पहले
कमला क शाद करना। ''

कमला के अठारह बरस क होने म+ अभी पांच वषB क दे र है और तू चौबीस


का हो गया है । बोल Jया मजF है तेर।''

‘‘ दे ख मां-अभी परCा द है उसका पLरणाम आने दो फर <वचार कर+ गे।''

‘‘ ठaक है। ''

अ-भमयु ने मां-बापू को दवा द। और छाOावास क तैयार म+ लग गया।

अचानक सबह
ु सबह
ु कमला ने जगाया और अखबार नचाती हई
ु बोल

‘‘ भैया इसम+ तI
ु हारा पLरणाम छपा है। ''

‘‘ ला मझे
ु Hदखा। ''
‘‘ नहं पहले -मठाई लाओ। ''

‘‘ ला मझे
ु दे नहं तो माVंगा। ''

तभी मां भी आ गयी। बापू आशा भर नजरK से दे ख रहे थे अ-भमयु ने


लपक कर कमला के हाथ से अखबार छaन -लया। थानीय अखबार था।
आई ए एस का पLरणाम का-शत हआ
ु था। अ-भमयु थम घो<षत हआ
ु था
उसका वष? का सपना आज परा
ू हआु था।

‘‘ मां मां म+ आई ए एस म+ थम आया ह।ू ँ ''

उसने मां बापू के चरण छए


ु । मां ने आशीषा। असहाय बापू क आँखK से आंसू
छलक पड़े। अ-भमयु भी भाव<वभोर हो गया। काश आज बापू बोल सकते। मगर बापू
खश
ु थे।

शीf ह यह खबर कबे म+ जंगल क आग क तरह फैल गयी क अ-भमयु


बाबू आई ए एस हो गये ह^। छाO, अPयापक नागLरक सब बधाई दे ने आने लगे।
तभी ाचायB भी आये। उहKने अ-भमयु बाबू को माला पहनाई, बधाई द और कहा-

‘‘ तम
ु चाहो तो अपने वतBमान पद से DयागपO दे सकते हो ताक धान जी जो
राजधानी जाकर कर के आये ह^, उसका भाव नहं हो। ''

यह ठaक समझकर अ-भमयु बाबू ने अPयापक के पद तथा छाOावास के


अधीCक पद से अपना DयागपO दे Hदया। िजसे ाचायB ने वीकत
ृ हे तु उTच
अ4धकाLरयK को भेज Hदया। इसी बीच ाचायB का थानातरण आदे श भी धानजी के
lयाकलापK से आ गया मगर ाचायB ने कोई 4चता नहं क । अना व -मसेज
तभा ने आकर अ-भमयु को बधाई द। आज अना ने मां के चरण छए
ु । बापू को
णाम कया। अ-भमयु ने उसक सवi LरपोटB के बारे म+ पछा
ू अना बोल।

‘‘ मैने ोजेJट LरपोटB बनाकर जयपरु ो -संह को भेज द है । तथा LरपोटB के


कछ
ु Hहसे काशनाथB भी भेजे ह^। शायद शीf ह छपकर आ जाय+गे।''

‘‘ अरे यह तो बहत
ु अTछa बात है। ''

तभी मां आई और बोल।


‘‘ बेटा अब तो तम
ु आई ए एस भी हो गये हो। अब शाद के -लए Jया बहाना
बनाओगे। ''अ-भमयु शरमा गया। Jया जवाब दे । मां फर बोल ‘‘ अना का भी
ोजेJट परा
ू हो गया है । ''

लेकन बातचीत कैसे शV


ु हो। तभी -मसेज तभा बोल पड़ी-

‘‘ अना तम
ु अपने पापा को तार दे कर यहं बला
ु लो। ''

JयK।

‘‘ अ-भमयु से अTछा दामाद उह+ कहाँ -मलेगा।'' -मसेज तभा ने हं सते हए



कहा। ''

‘‘ तम
ु तो मजाक करती हो। ''

‘‘ हां बेट मेर भी यह इTछा है । '' अ-भमयु क मां बोल पड़ी।

अ-भमयु के <पता ने भी आशा भर नजरK से अना क ओर दे खा। बोल नहं


सकते थे। मगर आंखK ने बहत
ु कछ
ु कह Hदया था।

अना ने कन_खयK से अ-भमयु बाबू को दे खा। एक Cण को दोनK क नजर+


-मल। शरमाई और झक
ु गयी। मक
ू सहमत पाकर अना ने साड़ी का प5लू ढका
और मां-बापू का आशीवाBद ले -लया। उसने पापा को तार दे कर बला
ु -लया। ो -संह
को भी तार दे Hदया ताक आशा भी आ जाय+।

<वbालय के अPयापकK, छाOK, कबे के लोगK ने -मलकर अ-भमयु बाबू के


आई ए एस बनने पर उनका अ-भनदन करने का नSचय कया। ाचायB महोदय
ने <वbालय म+ सब Xयवथा कराने का िजIमा -लया। ाचायB महोदय वयं
थानातरण का संOास भोग रहे थे, मगर इस कायB के त उनके मन म+ बड़ा
उDसाह था। छाOK ने भी खब
ू मन से इस कायBlम को सफल बनाने का नSचय
कया। थानीय नागLरकK ने भी सहयोग Hदया। इस कबे म+ काम करने वाला
XयिJत पहल बार आई ए एस जैसे उTच पद हे तु चयनत हआ
ु था। अ-भमयु के
गांव के लोग भी इस अ-भनदन समारोह म+ शा-मल होने के -लए आये थे।

ारIभ म+ ाचायB महोदय ने सभी का वागत कया ओर कहा यह सभी के


-लए सौभाGय क बात है क हमारे <वbालय के और इस तहसील के एक गांव के
हमारे अपने अPयापक अ-भमयु बाबू ने दे श क सव?Tच -स<वल परCा थम थान
म+ पास क है वातव म+ इस गौरव के -लए अ-भमयु बाबू क िजतनी शंसा क
जाये कम है बहत
ु कम लोग जानते ह^ क अ-भमयु बाबू <वhान के अPयापक होकर
भी राजनीत व समाज<वhान के भी hाता ह^। इहKने छाOK क बहमखी
ु ु तभा के
<वकास के -लए काफ काम कया है। इस <वbालय म+ रहते हए ु अ-भमयु बाबू ने
पयाBवरण, नशील दवाओं, बाल <ववाह , ौढ़ -शCा जैसे सावBजनक महDव के CेOK म+
काम कया। इस वषB <वbालय का परCा पLरणाम <पछले से भी बेहतर रहा है।

वातव म+ <वbालय म+ छाOK का सवाgगीण <वकास हेतु हम+ अ-भमयु बाबू जैसे
लोगK क जVरत है । वे एक यग ु के नमाBण म+ बहतु ह महDवपणBू भ-मका
ू अदा कर
रहे ह^ वे सTचे अथˆ म+ यग
ु नमाBता ह^। उहKने अपने छाOK म+ यग
ु नमाBण क बात
कट
ू -कट
ू कर भर है ।

म^ इनका अ-भनदन करता हू ँ और उIमीद करता हूँ क दे श के आला अफसर


के Vप म+ यग
ु नमाBण क lया को जार रख+गे। '' यह कह कर ाचायB महोदय बैठ
गये तभी ो-संह खड़े हएु और बोले- ‘‘ म^ भी आप का वागत करता ह।ू ँ
अ-भनदन करता हू ँ और आपके उkkवल भ<वyय क कामना करता ह।ू ँ वातव म+
इस दे श को ईमानदार अफसरK क बड़ी जVरत है ।''

अना के पापा भी पहंु च गये थे वे अ-भमयु के बारे म+ दे ख सनकर


ु बहत

खश
ु हो रहे थे।

अना ने उह+ अ-भमयु बाबू क उपलि€धयK तथा कायB णाल के बारे म+


सब कछ
ु बता Hदया था। अना के पापा अ-भमयु बाबू के बारे म+ सब जानकर
अ-भभत ू थे उह+ यह जानकर और भी खशी
ु हई
ु क दोनK एक दसरे
ू को पसद करते
थे। उह+ यह जोड़ी बहत
ु अTछa लगी।

तभी धान जी ने अपने आद-मयK के साथ हाल म+ वेश कया एक बार तो


सनाटा छा गया। सब त€ध थे। पता नहं Jया हो। छाO अलग कसमसाने लगे।
कछ
ु छाO तो नारे बाजी करने लगे। कछ
ु छाO उDतेिजत हो गये। ाचायB ने खड़े होकर
छाOK को शात कया। धानजी मंच पर चढ़ गये। अ-भमयु बाबू के गले म+ माला
पहनाई। हाथ -मलाया बधाई द। और माइक पर आकर बोले।

‘‘ मझसे
ु बड़ी गलती हुई। म^ आप सभी के सामने अ-भमयु बाबू से और आप
सब से Cमा याचना करता ह।ू ँ आप लोग कपा
ृ करके मझे
ु Cमा कर+ । म^ इस दे वता
पVष
ु को पहचान नहं पाया। अपने Cुo वाथˆ के कारण म^ने तथा मेरे आद-मयK ने
अ-भमयु बाबू को नाना दख
ु Hदये। उह+ ताwड़त कया। धमकयां द यहां तक क
उन पर हाथ भी उठाया। आज म^ अपने कमˆ का ायिSचत करता ह।ू ँ '' आज से म^
अ-भमयु बाबू के Hदखाये मागB पर चलकर जनHहत म+ काम करने का ण लेता ह।ू ँ
एक बात और ाचायB महोदय का जो थानातरण म^ने कराया था उसे भी पनः
ु र”
करवा Hदया है । ाचायB महोदय भी मझे
ु Cमा कर+ ।''

यह कह कर धान जी ने पनः
ु अ-भमयु बाबू से हाथ -मलाया और मंच से
उतरकर सभा म+ बैठ गये।

सभी छाOK ने सन होकर ता-लयां बजाई । हाल ‘‘ धान जी िजदाबाद। ''
‘‘अ-भमयु बाबू िजदाबाद। '' के नारK से गंज
ू ने लगा।

अ-भमयु बाबू अपने अ-भनदन का DयDु तर दे ने खड़े हए


ु हाल काफ समय
तक ता-लयK क गड़गड़ाहट से गंज
ू ता रहा। शाित होने पर अ-भमयु बाबू ने बोलना
शV
ु कया।

‘‘ दोतK म^ आप ह के बीच का एक छोटा आदमी ह।ू ँ कल तक आप के बीच म+


काम करता था। अPयापक था जो भी दायDव मझेु सzपा जाता था उसे मन लगाकर
परा
ू करने क को-शश करता था।

मझे
ु खशी
ु है क धान जी ने अपनी गलती महसस
ू क वे बड़े है । बजगB
ु ु है म^
उनका सIमान और अ-भवादन करता हू ँ जो हआ
ु सो हआ।
ु अत भला तो सब भला।

म^ आप को बताना चाहता हू ँ क यHद हम अपना काम ईमानदार व नuा से


परा
ू कर+ तो हम+ सफलता अवSय -मलती है । सफल होने के -लए pढ़ आDम<वSवास
और काम करना क लगन होनी चाHहए बस। राते क तमाम mकावटK के बावजद

सफल होना ह मानव का वभाव है जब तक सफलता नहं -मले तब तक कमB को
Dयागो मत। हम सबको -मलकर एक नये यग
ु , एक नये भारत, एक नये <वSव का
नमाBण करना है । जो जहां है वहां पर अपनी पणB
ू सामयB के साथ काम करे । तभी
यग
ु नमाBण का महान व`न साकार होगा। हम सब एक ह^। हमारे दे श क परIपरा,
संकृत और इतहास ने हम+ -मलजल
ु कर रहना -सखाया है । सवB धमB समभाव तथा
वसदै
ु व कटI
ु ु बकम हमारे आदशB रहे ह^। अपने इस अ-भनदन के -लए म^ आप सभी
का आभार XयJत करता ह।ू ँ तथा यह भी घोषणा करता ह।ू क आई ए एस के Vप
म+ अपनी पहल पोिटं ग इसी कबे म+ लेने क को-शश कVंगा और कबे के समW
<वकास के -लए हर सIभव यDन कVंगा। म^ इस तहसील म+ पैदा हआ। ु यह मेर
पहल कमB भ-म
ू रह है। और अब भी म^ कहं पर रहंू , इस कबे तथा यहां के लोगK
के -लए मेरे दरवाजे हमेशा खले
ु रह+ गे। म^ पर
ू को-शश कVंगा क यह तहसील परेू
दे श म+ एक आदशB तहसील के Vप म+ जानी जाये। यहां पर कोई अनपढ़ नहं होगा,
कोई नशा नहं करे गा। पयाBवरण ठaक होगा हम सब -मलकर एक नये यग
ु का
नमाBण कर+ गे। जहां पर सब जगह सख
ु और संतोष रहे गा। इस अवसर पर म^ ाचायB
महोदय अपने साथी अPयापकK ो -संह अना जी, छाOK तथा नागLरकK सभी के
त आदर और नेह XयJत करता हंू । और आपको <वSवास Hदलाता हू ँ क जातO
का एक तIभ कायB पा-लका कधे से कधा -भड़ाकर दे श म+ एक नये यगु के
नमाBण हे तु कत
ृ संक5प है । आइये हम सब -मलकर यग
ु नमाBण के अधरेू कायB को
परा
ू कर+ ।''

‘‘ हाल दे र तक ता-लयK से गंज


ू ता रहा। अ-भमयु बाबू अपनी सीट पर आकर बैठ
गए तभी अना के पापा मंच पर चढ़ गये। और माइक पर बोले। ''

‘‘ म^ अ-भमयु बाबू क सगाई अपनी बेट अना के साथ करने क घोषणा करता
हू ँ दोनK एक दसरे
ू को पसद भी करते है ।''

फर एक बार हाल बधाईयK और ता-लयK से गंज


ू उठा। अना ने शरमाकर
आँख+ झका
ु ल।

अ-भनदन कायBlम समा`त हो गया। ाचायB महोदय पवB


ू वत काम करने गये।
सामतवाद धान जी जनHहत म+ लग गये। [े नंग पर
ू करके अ-भमयु बाबू जब
इसी कबे म+ एस डी एम बनकर आये तो उनके साथ -मसेज अना थी। वे दोनK
-मलकर पनः
ु एक नये यग
ु के नमाBण हे तु काम करने लगे। अ-भमयु बाबू ने
तहसील को दो वष? म+ ह आदशB तहसील के Vप म+ <वक-सत कर Hदया। गणतंO
Hदवस पर उह+ इस कायB हे तु राkयपाल ~ारा पर
ु कृ त भी कया गया। यग
ु नमाBण
का यग
ु नमाBण सपना पनः
ु साकार हआ।

0 0 0

समय नरतर चलता रहता हे । समय कसी के -लए भी नहं mकता। वातव
म+ हम समय का भोग नहं करते ह^। समय ह हमारा भोग करता है । समय के साथ
साथ चलना कसी के -लए भी संभव नहं होता है । कभी न कभी समय छोड़ कर
आगे बढ़ जाता है।
कछ
ु वष? के अदर सब कछ
ु बदल गया है । राजपरु िजला घो<षत हो गया
और अ-भमयु बाबू इस िजले के थम िजलाधीश नयJ
ु त होकर आ गये ह^। आज वे
और अना अपने <वशाल बंगले के लॉन म+ बैठ कर अपने <पछले HदनK क याद+ ताजा
कर रहे ह^। अचानक अना ने कहा।

‘‘ दे _खये समय कस तेजी से बदल रहा है। आज राजपरु िजला बन गया है । सवBO
आ4थBक पैमाने हो गये ह^। मनyय
ु का सोच आ4थBक सोच हो गया है। खल
ु अथB
Xयवथा ने समाज को एक नये संसार से पLर4चत कराया है । ''

‘‘ - हां ये तो ह^, मगर सब कछ


ु ु जाने से वतंOता वTछदता म+ बदल जाती
खल
है और समाज तथा XयिJत के उTछंृ खल बन जाने क संभावना बन जाती है । ''
अ-भमयु बाबू ने गंभीर होकर कहा।

‘‘ - हां यह संभव है । मगर शायद आजके <वSव क यह मांग है। वैसे भी नधBनता
मनyय
ु जीवन का सबसे बड़ा अ-भशाप है । नधBन होना ह सबसे बड़ा अपराध है । यC
ने जब य4ध<uर
ु से पछ
ू क सबसे kयादा दखी
ु कौन है तो य4ध<uर
ु का DयDु तर था-
नधBन XयिJत सबसे kयादा दखी
ु है । उपनषदK म+ भी नधBनता को पौmष-हनता माना
गया है । अथाBत XयिJत म+ पौmष उतना ह है , िजतना उसके पास धन हे । सभी गण

कंचन म+ बसते ह^। धनवान ह Vपवान, चLरOवान,साHहDय, कला, संकृत का पारखी,
सkजन और सबल होता ह^ हर यग
ु म+ धनवान क पछ
ू होती रहती है । राजा, मंOी भी
धनवान क बात Pयान से सनता
ु है । इस-लए यग
ु म+ धन का महDव और भी kयादा
ह^। जीवन म+ नभBरता का अ-भशाप सबसे बड़ा अ-भशाप है । धन से यग
ु म+ सब कछ

lय कया जा सकता है और इसी कारण XयिJत साम, दाम, दं ड, भेद, सह, गलत सभी
तरकK से धन कमाने के -लए दौड़ पड़ता है , वह पैसे क इस अधी दौड़ म+ घड़
ु दौड़
के घोड़े क तरह दौड़ रहा है । नधBन तो हमेशा दख
ु , कोप ओर दभाB
ु Gय का मारा होता
है , ओर यHद XयिJत धनवान से नधBन हो जाता हे तो उसके कq और बढ़ जाते ह^,
-मO मंह
ु मोड़ लेते ह^, LरSतेदार पहचानना बंद कर दे ते ह^ और उपेCा व अपमान का
जीवन जीने को बाPय होना पड़ता हे। ''

अना एक सांस म+ बोल पड़ी।

अना का लIबा वXय सनकर


ु अ-भमयु बाबू कछ
ु नहं बोले। वे कह अतीत
म+ खो गये थे। इसी समय अदB ल ने आकर Hद5ल से आवSयक सचना
ू ा`त करने
हे तु फोन क सचना
ू द। अ-भमयु बाबू अदर फोन सनने
ु चले गये। अना शय
ू म+
नहारने लगी। पता नहं JयK आज उसका पराना
ु जीवन दशBन जाग उठा था।
अ-भमयु बाबू वापस आये बोले ।

‘‘ अना Hद5ल से महDवपणB


ू सचना
ू आई है । इस वषB पoह अगत का समारोह
वणB जयती के Vप म+ मनाया जायगा और इस पनीत
ु कायB हेतु काफ तैयाLरयां क
जायगी। मc
ु य समारोह हमेशा क तरह Hद5ल म+ होगा। हम+ भी अपने िजले म+
वतंOता क वणB जयती मनानी हे । ''

-‘‘ अTछा यह तो बड़ी खशी


ु क बात है । Jया वातव म+ आजाद हए
ु पचास वषB
हो गये ह^। ''

-‘‘ हां हां JयK नहं।''

-‘‘ दे श ने कई CेOK म+ बहतु अTछा <वकास कया है । <वhान - तकनालॉजी,


अतLरC अनसं ु धान, रCा अनसं
ु धान, आHद CेOK म+ हमारा दे श <वSव के कछ
ु मख

दे शK म+ से एक है। ''

-‘‘ लेकन अभी भी दे श म+ गरबी, अ-शCा का अधेरा है । समय के साथ वाय


और अय समयाएं बढ़ रह है ।

-‘‘ समयाओं का नदान भी हो रहा है । हम सब -मलकर आगे बढ़ रहे है। और


सबसे बड़ी बात यह है क हमने वतंOता को पचास वष? तक सहे ज कर रखा है । मां
भारती के आंचल पर ध€बा नहं लगने Hदया है । ''

-‘‘ कछ
ु हद तक आप शायद ठaक कह रहे ह^। मगर सब कछ
ु ठaक-ठाक हो ऐसा भी
नहं लगता है ।''

-‘‘ सब कुछ कहं भी ठaक नहं होता है । हर जगह कछ


ु क-मयां होती है । एक आधे
भरे हए
ु 4गलास को आधा खाल भी कहा जा सकता है । खैर। मझे
ु कायाBलय जाना है
और हां तम
ु कमला को फोन करके बTची सHहत बलवा
ु लेना। वतंOता Hदवस
समारोह दे ख कर उसे बड़ी खशी
ु होगी। ''

‘‘ जी अTछा। ''

अ-भमयु बाबू द•तर चले गये। अना को अपना अतीत कचोटने लगा।
यरोप
ू -अमरका म+ पल बसी वासी भारतीय अब इस दे श क माट से वापस इतनी
जुड़ गई थी, क उसे अब पिSचम क हवा क भी याद नहं आती। मगर जो खल

हवा इस दे श म+ बहने लगी है ,उसका पLरणाम Jया वह होगा जो <वदे शK म+ हआ
ु है ।
शायद नहं JयKक इस दे श क संकत
ृ , परIपरा बहत
ु गहरे तक एक दसरे
ू को जोड़े
रखने क Cमता रखती हे ।

रा–ीय एकता, अग\यता तथा दे श भिJत यहां के लोगK म+ कट


ू कट
ू कर भर
हई
ु है । और ऐसी िथत म+ दे श के rबखरने का Sन ह नहं पैदा होता हे ।
दं गे,क•यB,ू जातवाद उमाद कछ
ु समय के -लए आते ह^ और तेज हवा के झKके क
तरह चले जाते ह^। वे दे श क एकता और साI दायक सौहादB को तोड़ नहं पाते। यह
महान दे श एक है । यहां पर एकता म+ अनेकता है और अनेकता म+ एकता है ।

अना ने कमला को फोन कर बTची सHहत आने का नमंOण Hदया। शाम को


गाड़ी भेज द। कमला अपनी एक माO बTची के साथ अना के पास आ गई। अना
ने कमला को गले लगाया, कमला ने अ-भमयु बाबू के चरण छए
ु , नहं मामाजी क
गोद म+ चढ़ गई। सभी ने -मलकर खाना खाया। खाने के बाद कमला, अना और
अ-भमयु बाबू बैठे तो कमला बोल पड़ी।

-‘‘ भाई साहब अब जब क आजाद क पचासवीं वषB गांठ मनाई जा रह है। आप
Jया सोचते ह^ ? ''

-‘‘ इसम+ सोचना Jया ह^ ये तो एक खशी


ु का मौका है क दे श म+ जातO पचास
वष? से नरतर चल रहा है । ''

- वो तो ठaक है , मगर Jया इस जातंO क कोई क मत भी द है।''

-‘‘ क मत का दे श क अिमता के सामने Jया महDव है । दे श एक रहे तो कोई भी


क मत kयादा नहं है। ''

-‘‘ <वकास के कारण Jया हमने कछ


ु खोया है ? ''

-‘‘ हां शायद पयाBवरण पर कछ


ु भाव हआ
ु है । ''

-‘‘ और हमारे नैतक म5


ू य कम हए
ु ह^।'' अना ने कहा।

-‘‘ नैतक म5 ू य हर दे श म+ कम हए ू य अय दे शK क तलना


ु ह^ हमारे दे श म+ म5 ु
म+ बेहतर है । '' अ-भमयु बाबू ने बात को संभाला।

-‘‘ लेकन आप ये भी तो दे _खए क हम शायद गांधी जी को भल


ू गये ह^।''
म^ ऐसा नहं मानता। गांधी जी क ासं4गकता आज भी है । सच, ईमानदार
और अHहंसा का राता कभी बद नहं होता। केवल कछ
ु समय के -लए हम राते
भटक सकते ह^। ''

-‘‘ लेकन इस भटकाव के -लए कौन िजIमेदार है। '' कमला ने पछा।

-‘‘ हम सभी। हम सभी इस भटकाव के -लए िजIमेदार ह^। यHद राता बदल Hदया
गया है तो मंिजल कैसे -मलेगी। हम+ हमारा सह राता चनना
ु होगा। तभी हम अपनी
मंिजल क ओर जा पाय+गे। ''

-‘‘ लेकन लगता है क हम कहं खो गये ह^। ''

नहं खोये नहं भटक गये ह^ और यHद सबह


ु का भला
ू सायं को धर लौटे आता
है तो उसे भला
ू नहं कहते। '' अ-भमयु बाबू ने हं सते हए
ु कहा। सभी सोने चले गये
JयKक दसरे
ू Hदन ातः ज5द उठकर आजाद क पचासवीं जयती मनानी थी।

0 0 0

पoह अगत उनीस सौ सDताणव+

आजाद का पचासवां वतOता Hदवस का पावन पवB। आज परेू कबे म+ अपवB



उDसाह, उ5लास और उमंग थी। सवBO खशी
ु , उमंग, चैन लेकन कहं कहं लोगK के
HदलK म+ कसक भी थी।

अ-भमयु बाबू अपने उसी कू ल म+ झ\डा रोहण करने गये जहां पर वे कभी
एक अPयापक के Vप म+ कायBरत थे। सभी अPयापक बड़े सन थे क िजलाधीश
महोदय ने उनके कायBlम म+ आने क वीकत
ृ दान क थी। कूल के वातावरण म+
उDसाह था। छाO सन थे और अPयापकK ने जी-जान लगाकर मेहनत क थी। रा–
भw के गीत बज रहे थे। प\डाल सजा था। शहर के गणमाय लोग उपिथत थे।

अ-भमयु बाबू ने झ\डारोहण कया। राq गान हआ।


ु परे ड क सलामी ल
गयी। धानाPयापक के उtबोधन के बाद अ-भमयु बाबू ने शहर के बsु XयिJतयK
को माण-पO और पर
ु कार बाँटे। एक <वकलांग को पर
ु कार दे ने अ-भमयु बाबू
उसक सीट तक चल कर गये। एक सैनक क <वधवा पर ु कार Wहण करते हए ु रो
पड़ी। सभी क आँख+ नम हो गयी। अ-भमयु बाबू ने अपने उtबोधन म+ कहा-
‘‘ आज आजाद क पचासवीं साल 4गरह है और इस मबारक
ु मौके पर म^ आप
सभी को बधाई दे ता ह।ू ँ आज हम+ अपने उन नेताओं, lांतकाLरयK ओर दे श भK को
याद करना है , िजहKने आजाद क इस लड़ाई म+ अपना सवBव Dयाग Hदया।

आज हम+ सागरमल गोपा, केसर -संह बारहठ, मा_णJय लाल वमाB, मेहर खां के
साथ-साथ चoशेखर, भगत-संह, लाला लाजपतराय आHद के ब-लदानK को याद करना
हे । आज महाDमा गांधी के प\ु य मरण का भी Hदन है । आज हम सभी एक है और
एक रहे । हम+ हमार भावाDमक एकता को बनाये रखना है । दे श भिJत को बनाये
रखना है । सीमा क चौकसी रखनी ह^ रा–ीय एकता, अख\डता और सांकृतक
समरसता के -लए यास करना है। दे श के आजाद होने के साथ-साथ हम+ हमार
वाधीन चेतना को जगाये रखना है । वाधीनता क चेतना जब तक जी<वत है, हम+
कोई खतरा नहं है। हमने तीन यs
ु लड़े हम <वजयी रहे । आतंकवाद से लड़े हम
<वजयी रहे । हम+ सामािजक यथाथB तथा रचनाDमक Hदशा बोध के साथ-साथ सामािजक
समरसता को बनाये रखना है।

समाज, राq और XयिJत सब -मलकर ह एक सIपण


ू B राq का नमाBण करते
ह^।

आजाद के इस दौर म+ हम+ वदे मातरम और जन गण मन क अCु\णता


को बनाये रखना है । आइये सब -मलकर नारा लगाये। ''

‘‘ भारत माता क जय। ''

‘‘ भारत माता क जय। ''

कायBlम समा`त हआ।


ु अ-भमयु बाबू ,अना,कमला, नह सब अपने बंगले
वापस आ गये।

सायंकाल सांकृतक कायBlम हए।


ु भवनK पर रोशनी क गयी। सवBO सब कछ ु
सहावना
ु लग रहा था। आज रJतदान हए ु , नेOदान व दे हदान के फामB भरे गये।
वाथ--शCा व ौढ़ -शCा के -लए समाज के लोगK ने संक5प -लये। मगर अना से
नहं रहा गया। वो पछ
ू बैठa -

-‘‘ इतना सब होने के बाद भी आम आदमी खश


ु JयK नहं है । ''

-‘‘ खशी
ु का इजहार करना हर एक के -लए संभव नहं होता। '' कमला ने कहा।
-‘‘ मगर इसका मतलब Jया औसत नागLरक सन नहं है। ''

-‘‘ नहं वह खश
ु ह^ मगर उसे लगता है क यह खशी
ु C_णक है और इसी कारण
वह चपचाप
ु रहता है । ''

-‘‘ नहं ऐसा नहं है। वातव म+ पचास वष? म+ औसत XयिJत को अभावK ने तोड़
Hदया हे । अब खल
ु अथB Xयवथा से उसे वयं के -लए खतरा नजर आ रहा है । इसी
कारण वह चप
ु है ।''

-‘‘ लेकन चप
ु रहने से Jया होता है । ''

-‘‘ चप
ु क दहाड़ बहत
ु बड़ी होती हे । मौन क आवाज सबसे तेज होती है । ''

-‘‘ चलो छोड़ो भाई जान।'' कमला ने कहा। नह टवी दे खकर सन हो रह थी।

-‘‘ Jया pSय-eXय माPयम सबके -लए Hहतकर हे । '' अना ने दसरा
ू Sन छोड़ा।

-‘‘ सवाल Hहत का नहं आवSयकता का है । आज टवी के rबना समाज म+ जीना


मिS
ु कल है । '' कमला ने कहा।

-‘‘ लेकन टवी के नकसान


ु बहत
ु है । ''

-‘‘ और फायदे भी बहत


ु है '' - अ-भमयु बोल पड़ा। आज टवी से -शCा,
अनौपचाLरक -शCा और दसराू -शCा के CेO म+ rब5कु ल नये योग हो रहे ह^ जो
हमारे दे श को एक नये भ<वyय क ओर से जा रहे ह^। शीf ह दे श म+ कI`यट
ू र
-शCा का जाल rबछ जायेगा और इस -शCा से हमारा तकनीक hान बहत
ु बढ़
जायेगा। हम दे श <वदे श म+ घर बैठे मीHटंग कर सक+गे।

-‘‘ हां हां JयK नहं टे ल-कांjे-संग एक rब5कुल सामाय सी बात होगी। जैसे फोन
एक सामाय उपकरण है , ठaक वैसी ह स<वधा
ु हो जायेगी। '' -‘‘ फर तो बड़ा मजा
आयेगा। '' कमला बोल पड़ी।

मगर अना ने कछ
ु नहं कहा।

कमला और अना कमरे म+ आई।

अना ने नह को `यार से थप थपाकर सला


ु Hदया और कमला से पछा।

-‘‘ अब दसरा
ू कब ? ''
-‘‘ नहं भाभी हम दोनK एक हमारे एक। बस। '' और भाभी तI
ु हारे ।''

हम तो भाई श
ू य जनसंcया व<ृ s म+ <वSवास रखते है । ''

दोनK हस
ँ पड़ी। सभी आराम करने लग गये।

0 0 0

वतंOता Hदवस समारोह पर अखबारK ने बड़े बड़े पLर-शq का-शत कये थे।
<पछले पचास वष? क उपलि€धयK क बढ़ चढ़ कर <वतत
ृ Xयाcया तत
ु क गयी
थी। थानीय समाचारK म+ अ-भमयु बाबू का भाषण मखता ु से का-शत हआु था।
समाज म+ <वकतयां
ृ उभर है , ये ठaक है , अ-भमयु सोच रहे थे, मगर Jया सब कछ

धंध
ु ला गया है, Jया आशा क कोई करण बाक नहं है । अ-भमयु बाबू ने वयं से
कहा।

- नहं म^ ऐसा नहं मानता। रात कतनी ह लIबी हो । सबह


ु अवSय होती है और
सवेरे के सरज
ू क रोशनी अधेरे को चीर कर बहत
ु दरू तक काश फैला दे ती है।
परब
ू का यह सयB
ू हम सभी को का-शत करे गा और हमारे मन के अंधकार को दरू
करे गा।

0 0 0

कमला के जाने के बाद अना कछ


ु उदास हो गयी। इतना बड़ा बंगला, सभी
कार क साधन स<वधाएँ
ु । नौकर चाकर, mतबा, मगर मन है क फर भी उदास। सब
कछ
ु है मगर कछ
ु भी नहं आ_खर इसका कारण का है ? नार मन म+ यह अति`
ृ त
JयK है , शायद इसका कारण समाज म+ Xया`त उपेCा है , मगर अब समय बदल रहा हे
नार ने हर CेO म+ अपनी सफलता के झ\डे गाड़े ह^। ाचीन काल म+ भी नार ने
अपना वचBव था<पत कया था और आज भी कर रह है जीवन के हर CेO म+ नार
ने आगे आकर पVष
ु के कधे से कधा -भड़ाकर काम कया है। नार कसी से कम
नहं है । आ4थBक सम<s
ृ और भौतक साधनK क व<s
ृ म+ नार का योगदान है । उसे
मन ह मन तस5ल हई।
ु लेकन फर उसे लगा क Jया भौतकयाOा क समाि`त के
बाद सब कछ
ु समा`त हो जाता है , शायद नहं JयKक भौतक याOा क समाि`त के
बाद एक नई अथBवान याOा का <वकास होता है । पिSचम म+ इस याOा के महDव कोई
नहं मानता है, मगर भारत म+ भौतक याOा क समाि`त के बाद भी XयिJत क याOा
नरतर चलती रहती है और XयिJत एक नयी आPयािDमक याOा के अनत मागB पर
चल पड़ता है ।

अना अपने <वशाल शयन कC म+ आई। उसने कताबK क शे5फ म+ से एक


कताब उठाई, मगर कताब के पीछे उसे एक डायर Hदखाई द। उसे आSचयB हआ।

अ-भमयु क पु तकK क शे5फ म+ डायर-। उसने डायर को उठा -लया अ-भमयु क
डायर थी। उसके ारिIभक जीवन के बारे म+ <वतार से -लखा हआ
ु था। आज वह
इस उTच पद पर था। अ-भमयु क डायर को अना ने पढ़ा और रख Hदया। इसी
बीच अ-भमयु आ गया। बोला-

‘‘ अना Jया कर रह हो। ''

‘‘ कछ
ु नहं बस यK ह। '' अना ने बात टाल द। मगर अ-भमयु समझ गया क
बात कछ
ु है ।

‘‘ सनो
ु अना। ''

‘‘ हाँ जी। ''

आज सायं मझे
ु कछ
ु जVर काम से बाहर जाना है और कल सबह
ु िजले म+
प5स पो-लयो अ-भयान का ारIभ होना हे, इस कायBlम के -लए तI
ु ह+ भी चलना
होगा। ''

‘‘ प5स पो-लयो म+ मेरा Jया काम। ''

‘‘ है भाई हम सभी का काम है। नई पीढ़ नरोगी हो, उसे लकवा -पो-लयो जैसी
बीमार नहं हो इस पनीत
ु महा-भयान को हम सभी म+ अपना अपना योगदान करना
है । ''

‘‘ मझ
ु े Jया करना होगा ? ''

‘‘ तम
ु िजले के बTचK को पो-लयो क दवा <पलाने का शभारI
ु भ करोगी। सब
तैयाLरयां िजले के छोटे अ4धकाLरयK ~ारा कर ल गई है । सबह
ु सात बजे से यह
कायBlम शV
ु होगा। ''
‘‘ अTछा तो फर आज साँय आप कहाँ जाने वाले ह^। ''

‘‘ इसी प5स पो-लयो महा-भयान के -सल-सले म+ मझे


ु पास के गांवK का दौरा
करना है। ''

‘‘ म^ भी साथ चलंग
ू ी। हम आपके पराने
ु गांव भी चल+ गे। ''

‘‘ जैसी आप क इTछा। ''

अ-भमयु और अना कार म+ बैठकर अपने पराने


ु गाँव तक पहचे
ु ँ साथ म+
िजले के अय अ4धकार भी थे। इसी गांव म+ प5स पो-लयो कायBlम को शV ु कया
जाना था। गांव म+ पहंु चते ह अ-भमयु ने सवB थम अकबर को बलाया।

दोनो पराने
ु -मO आपस म+ गले -मले। उ„ क छाया अकबर के शरर पर
पq Hदखाई दे रह थी।

अ-भमयु ने अकबर से कहा-

‘‘ इस गांव के Dयेक बTचे को पो-लयो क खराक


ु <पलाने क िजIमेदार तI
ु हार
है । अकबर, भाभी को भेजकर गांव क हर मHहला और बTच+ को सबह
ु पो-लयो क
दवा <पलाने के -लए पास वाले कूल म+ लाना है । ''

अकबर ने तर
ु त हाँ भर और कहा-

‘‘ सर। इस कायB के -लए हम सब -मलकर यास कर रह+ ह^। सभी को खराक



<पलाने क जानकार दे द गई है काडB भी बनवा Hदये ह^ ओर इस कायB के -लए हमने
एक स-मत भी बना द है। ''

‘‘ गड।
ु वेर गड।
ु '' अ-भमयु बोल पड़ा।

अचानक अ-भमयु को अपना बचपन याद आया। उसने अकबर से पराने


ु -मOK
के बारे म+ पछा।
ू अकबर के माँ बाप के बारे म+ जानकार ल। वे कशल
ु थे। अ-भमयु
को अपने माता <पता के चले जाने का दख
ु था, मगर उसने जाHहर नहं होने Hदया।

गांव का नरCण करने के बाद अ-भमयु अपने अमले के साथ वापस िजला
मc
ु यालय आ गया। दसरे
ू Hदन ातः अना ने प5स पो-लयो कायBlम का eीगणेश
कया। इस अवसर पर उसने कहा-
‘‘ आज दे श को एक नरोग और वथ पीढ़ क आवSयकता है, परेू <वSव म+
पो-लयो का उमल
ू न हो रहा है , हम+ इस कायB म+ पीछे नहं रहना है। हर बTचे को
िजस क उ„ पाँच वषB क हो उसे पो-लयो क दवा <पलाकर पो-लयो को जड़ से
-मटाना है। ''

सायं तक िजले के हर बTचे को पो-लयो क दवा <पलाई गई। अना व


अ-भमयु ने -मलकर िजले म+ इस काम को सफल कया।

अ-भमयु अपने कायाBलय म+ बैठा था। पी ए ने आकर बताया क िजले क


शाित स-मत के सदय -मलना चाहते ह^। उसने उह+ अदर भेजने के आदे श Hदये।
िजले क शाित स-मत का पनगB
ु ठन कया गया था। अकबर, -मसेज तभा,
अवतार-संह, आHद को शा-मल कर के अ-भमयु ने समाज के सभी लोगK को
तन4धDव Hदया था।

स-मत म+ कछ
ु ब<sजी<वयK
ु को भी -लया गया था। स-मत के लगभग सभी
सदय एक साथ आ गये थे, यह एक अनौपचाLरक उपवेशन था। अ-भवादन के बाद
अ-भमयु ने कहा-

‘‘ कHहये आप लोगK ने कैसे कq कया ? ''

अकबर ने कहा-

‘‘ सर स-मत का काम-काज तो ठaक चल रहा है , मगर राजपरु क सीमा अय


ात क सीमा से -मलती है और ात म+ उWवाद व आतंकवाद के कारण कभी
कभी परे शानी आ जाती है। ''

‘‘ हाँ आतंकवाद क समया सवBO ह^। हम+ इस Hदशा म+ भी सोचना चाHहये। '' आप
बताईये हम+ Jया करना चाHहये। '' अ-भमयु ने पछा।

‘‘ हमार सीमाओं पर हम नगरानी बढ़ा द+ । जहाँ कहं भी अपराधी हो उह+


पकड़ने क को-शश कर+ ? ''

‘‘ लेकन अपरा4धयK को पकड़ना मिS


ु कल काम है ।'' अवतार -संह ने कहा।

‘‘ मिS
ु कल कछ
ु नहं हे । यHद जन-सहयोग हो तो उWवाद पर काबू पाया जा
सकता है ।'' अ-भमयु ने कहा।
िमत के सदय इस बात से सहमत थे क अपरा4धयK को पकड़ने के यास
म+ जन-सहयोग आवSयक है ।

-मसेज तभा बोल-

‘‘ सर <पछल बार बस म+ बम फटने से पांच नद?ष लोग मारे गये थे।''

‘‘ हां मगर वह एक दखद


ु घटना थी। और हमने इस घटना को पनः
ु नहं होने दे ने
के -लए उपाय कर -लये ह^। ''

‘‘ आतंकवाद क सवBO नदा होनी चाHहये।'' ये यवा


ु हमारे ह समाज के एक भाग
ह^ लेकन गमराह
ु ह^। गमराह
ु को सह राह पर लाने के यास कये जाने चाHहय+ हम+
और सरकार को एक जट
ु होकर इन उWवाHदयK को दे श क मc
ु य धारा से जोड़ना
चाHहए।'' शाित स-मत के वयोवs
ृ सदय सेवानव
ृ ाचायB जी बोल पड़े।

सभी ने उनक बात का समथBन कया।

‘‘ सर आतंकवाद के अलावा भी कछ
ु समयाएँ ह^ िजन पर Pयान Hदया जाना
आवSयक है। '' अकबर फर बोल पड़ा।

‘‘ कहो। ''

‘‘ साI दायक तनाव, जातवाद गठबंधन और वाथ सIबधी समयाएं। ''

‘‘ दे खो भाई, यह हमारा सौभाGय है क हमारे िजले म+ अभी भी दं गे नहं हए


ु ह^।''
अ-भमयु ने हसतेँ हए
ु कहा।

सभी हस
ँ पड़े।

‘‘ और जहाँ तक तनाव या जातवाद गठबंधनK का Sन है ये सवBO ह^ और


िथत <वफोटक नहं है । यHद कोई खास समया हो तो उस पर Pयान Hदया जा
सकता है । ''

‘‘ नहं ऐसा तो नहं हे । '' एक नक कहा।

‘‘ वाय सIबधी कायBlमK के -लए अतLरJत िजलाधीश व िजले के 4चकDसा


अ4धकार अTछा कायB कर रह+ है , यHद आप चाहे तो उनसे भी -मल सकते ह^। ''

‘‘ सर एक बात और। '' ाचायB ने कहा-


‘‘ हमारे गांव के पास क फैJटर से हानकारक गैसK का Lरसाव होता है । उसे
रोकने के -लए कई बार नवेदन कया है । ''

‘‘ हाँ मझे
ु याद है, हमने सरकार को -लखा है और शायद शीf इस फैJटर म+ गैसK
को साफ करने के उपकरण लगा Hदये जाय+गे। इस फैJटर से नकलने वाले द<षत

जल को भी गांव म+ नहं छोड़ा जायेगा। इसे भी साफ करने के संयंO Hदये जाय+गे।
इस सIबध म+ आदे श कर Hदये गये ह^।''

‘‘ जी बहत
ु अTछा। ''

एक अितम बात सर। अवतार -संह बोल पड़ा।

‘‘ सर कTची बितयK म+ कछ
ु काम ठaक से नहं चल रहा है। ''

‘‘ हाँ इस सIबध म+ एक नयी योजना बना कर सरकार को भेजी गयी है शायद


एक-दो Hदन म+ आदे श आ जाय+गे। कल ह म^ वयं बती का दौरा कVंगा। ''

यह कह अ-भमयु ने उपवेशन समा`त कर Hदया।

0 0 0

अना के पास बहतु सा समय खाल रहता। करने को कछ


ु <वशेष नहं था।
ऐसे म+ वो वयं म+ खो जाती। कछ
ु न कछ
ु सोचती रहती। कमरे म+ अकेल बैठa
वासी जीवन पर सोचने समझने के यास करती। अना Wामीण जीवन म+ मHहलाओं
क िथत पर कायB कर चक
ु थी और इसी कारण मHहलाओं, <वशेष कर गरब और
द-लत मHहलाओं के -लए कछ
ु करना चाहती थी। सामािजक संथाओं, वयंसेवी
संथाओं और सरकार यासK से वह संतुq नहं थी। उसने कTची बती म+ रहने
वाल मHहलाओं तथा बTचK क -शCा और वाय के CेO म+ हो रह उपेCाओं पर
अपना Pयान केिoत कया। कTची बती म+ ौढ़ -शCा केo खोलने, बा-लकाओं के
नय-मत <वbालय जाने तथा उह+ वाय सIबधी जानकार दे ने के -लए उसने
वयं आगे आने का नSचय कया।

तभी उसे पापा का टे लफोन -मला। वे वयं राजपरु म+ कछ


ु समय के -लए
उसके पास आ रहे थे। अना को बड़ी सनता हई।
ु कतने लIबे अतराल के बाद
वो पापा से -मलेगी। अ-भमयु को भी इस समाचार से अTछा लगा। अपने माँ-बापू के
जाने के बाद उसे पहल बार कसी बजगB
ु ु का आशीवाBद -मलेगा। अना और अ-भमयु
पापा को -लवाने गये। पापा आये। कशल
ु Cेम के बाद अ-भमयु, अना और पापा
बैठे। बातचीत पापा के जीवन से ह शV
ु हई।

‘‘ पाप अपने ारिIभक जीवन के बारे म+ बताईये। ''

अ-भमयु ने पछा।

‘‘ कछ
ु खास नहं। म^ हैदराबाद म+ पैदा हआ
ु था। वासी राजथानी था। -शCा पर

नहं कर सका। मगर पैसा कमाना चाहता था। <वदे श चला गया। हर कार का काम
कया। लगन थी। पैसा हो गया। पहले Xयापार फर उbोगपत बन गया। अना क
माँ <वदे शी थी। शीf दे हात हो गया। अना भारत आ गयी थी। म^ वासी था। मन
<वदे श म+ नहं लगा। तभी एक भारतीय नार से म^ने दसरा
ू <ववाह कया, यह <ववाह
चला नहं। अथाह संसार सागर म+ म^ अकेला था। सब समेट कर वापस है दराबाद आ
गया। म^ काफ समय से शात अकेलापन भोग रहा ह।ू ँ आज अचानक तम ु लोगK के
बीच अपने को पाकर अTछा लग रहा है । म^ने अपने पैसा का एक यास बना Hदया
है । अना मcु य यासी है । चाहता हू ँ इस पैसे का सदपयोग
ु हो। मेर भी परखK
ु क
धरती दे खने क बड़ी लालसा थी। अब जाकर पर ू हईु । अपनी माट से जड़ने
ु का
आनद ह कछ ु और होता है । '' पापा एक सांस म+ बोल गये।

‘‘ लेकन पापा सब कछ
ु होकर भी कछ
ु नहं होना यह अजीब संयोग JयK होता है
? ''

‘‘ Jया पता बेटा। '' पापा मौन हो गये।

‘‘ पापा अब आप हमारे साथ ह रHहये। वैसे भी घर म+ कोई बड़ा-बजगB


ु ु नहं है। ''
अ-भमयु ने कहा। मगर पापा ने कोई जवाब नहं Hदया।

अ-भमयु ने फर कहा-

‘‘ आज कTची बती का दौरा है, अना तम


ु भी तो चलना चाहती थी। ''

‘‘ हाँ पापा आप भी च-लये। ''

‘‘ हां चलो। शायद म^ भी गरबK के -लए कछ


ु कर पाऊं। अपने यास से मदद
दं ग
ू ा।''
पापा,अना, अ-भमयु राजपरु क कTची बती क तरफ चल पड़े। उबड़ खाबड़
रे त के टलK पर बसी कTची बती। सवBO गरबी के दशBन, न rबजल क स<वधा
ु न
पेयजल। न -शCा व वाय।

अ-भमयु और अना को दे खकर लोगK ने अपने दख


ु ड़े रोने शV
ु कर Hदये।
एक आदमी बोल पड़ा-

‘‘ सर सड़क पर गाwड़यां बहत


ु तेज गत से जाती ह^, अJसर दघB
ु टनाएँ होती ह^। ''

‘‘ हंू । ''

‘‘ और सर rबजल नहं है। नलK म+ पानी नहं आता है। ''

‘‘ हंू । ''

‘‘ हमारे यहाँ पर एक भी ाथ-मक शाला नहं है। ''

‘‘ हाँ कूल आवSयक है।'' पापा ने कहा।

‘‘ मHहलाओं के -लए -शCा केo होने चाHहये। '' एक बTची बोल पड़ी।

अ-भमयु समझ गया मल


ू समया गरबी और बेकार है और इस समया से
नजात पाना आसान काम नहं है। फर भी यास कया जाना चाHहये। अना ने वहं
पर बती क कछ
ु मHहलाओं को एकrOत कया और कहा-

‘‘ आप वयं आगे आय+। सायंकाल पढ़ाने क Xयवथा क जा रह है । आप


सायंकाल पास के मकान म+ एकrOत हो और ौढ़-शCा के कायBlम से जुड़।े ''

बती म+ पानी, rबजल क Xयवथा के -लए पापा ने यास कये। बती के


लोगK ने शV
ु म+ Pयान नहं Hदया। लेकन पापा और अना लगे रहे। अ-भमयु के
शासनक सहयोग से द-लत वगB के लोगK म+ जागत
ृ आने लगी। वे अपने अ4धकारK
को समझने लगे।

अना और पापा बार बार कTची बती जाते। लोगK को समझाते। बTचK को
कूल -भजवाने के यास करते। राrO म+ ौढ़K को पढ़ाने क Xयवथा करते। धीरे धीरे
कTची बती म+ पLरवतBन आने लगे।
सामािजक पLरवतBनK के साथ साथ कTची बती के लोगK म+ वाय के त
भी जागVकता आई । छोटे पLरवार के लाभ भी वे समझने लगे। बढ़ती जनसंcया के
खतरK से बचने के उपायK पर अब खल
ु चचाB करने लग+

कTची बती म+ सधार


ु के कायBlम को सचाm
ु Vप से चलाने के -लए
अ-भमयु ने एक कTची बती सधार
ु स-मत बना द ।

स-मत त सोमवार बती म+ जाती, बती के लोगK क समयाओं को सनती



और समाधान के यास करती। बती के लोगK क समयाएँ भी 4गनी चनी
ु थी।
पानी-rबजल आने के बाद सड़क+ और ना-लयां बन गई। बTचे पढ़ने जाने लगे।
अपराधी लोगK ने बती म+ आना-जाना कम कर Hदया। धीरे धीरे बती क औरत+ ौढ़
-शCा केoK म+ आने लगी। वे Hहसाब सीख गयी। हताCर करना सीख गई। उह+
वाय के बारे म+ जानकार हो गयी। पापा और अना के नय-मत आने के कारण
सरकार अफसर भी बती क समयाओं पर Pयान दे ने लगे। अना ने महसस
ू कया
क बती क सभी समयाओं क जड़ म+ नशाखोर है ,बती के लोग शराब, तIबाकू
और अय मादक पदाथˆ के आHद ह^। वे लोग कTची शराब का उपभोग करते है ।
अना ने बती म+ शराब बद हेतु बती के लोगK को जागVक कया। बती क
मHहलाओं ने अना को सहयोग Hदया। बती क मHहलाओं ने शराब क दकान
ु के
सामने नरतर दशBन और धरना Hदया। पLरणामवVप शराब क दकान
ु को बती
से दरू ले जाया गया। तIबाकू से उDपन खतरK क ओर Pयान Hदलाने के भी साथBक
पLरणाम आये। नशाबंद -श<वरK का आयोजन कया गया।

तIबाकू और अय दवाओं के उपयोग पर रोक से बती के लोगK के जीवन-


तर म+ सधार
ु आने लगा। गरब घरK म+ दोनK समय च5
ू हा जलने लगा। मदˆ क
कमाई से घर म+ शराब के बजाय खाने-पीने का सामान आने लगा। बTचK के कपोषण

पर भी रोक लगी। बती के बTचे और मHहलाएं -मलकर छोटे -मोटे रोजगार म+ लग
गये। कTची बती म+ धीरे धीरे <वकास क गंगा बहने लगी। बती के लोग, अना को
दे वी समझने लगे। अना को भी अपने होने क साथBकता महसस
ू होने लगी। बती
के <वकास के समाचार धीरे धीरे राजधानी तक पहचने
ुँ लगे। पOकारK के सहयोग के
कारण थानीय, ातीय रा–ीय तर के समाचार पOK म+ बती म+ हो रहे पLरवतBनK
पर समाचार कथाएं छपने लगी। लोगK को जानकार -मल तो कई वयं सेवी संथाएं
भी आगे आई। सरकार अनदान
ु भी -मले और राजपरु क यह कTची बती एक
आदशB बती के Vप म+ पहचानी गई। अना को अपना eम साथBक होते दे खकर
आतLरक खशी ु हई।
ु उसके चेहरे पर संतोष क म
ु कान थी। यह दे ख कर अ-भमयु
बोल पड़ा। --
‘‘ आज बड़ी सन दख रह हो, Jया बात है ।''

‘‘ सनता क बात है । कTची बती के <वकास से मझे


ु लगता है म^ने एक अTछा
काम कया। मेरे होने क साथBकता -सs हई।
ु शायद मेर जड़K क खोज भी अब पर

हई
ु है ।''

‘‘ अTछा चलो तI
ु ह+ संतq
ु दे खकर मझे
ु भी अTछा लगता है । पापा कहाँ ह^ ? ''
अ-भमयु बोला-

‘‘पापा आज वापस जाने क बात कर रहे थे, म^ने मना कया है । ''

‘‘ नहं उह+ अब यहं रहना है । मेर ओर से भी कहना। म^ कायाBलय जा रहा ह।ू ँ ''

‘‘ जी अTछा। ''

अना पापा के पास आयी। पापा पर अब उ„ के पड़ावK क छाया पq Hदखाई दे रह
थी। मIमी के जाने के बाद पापा टट
ू गये थे, फर वासी जीवन छोड़कर वे वापस
अपने दे श लौट आये थे। मगर यहाँ भी जीवन का आनद नहं -मला था। पापा
चपचाप
ु , शात पलंग पर लेटे थे। अना ने धीरे से कहा-

‘‘ पापा । ''

‘‘ हाँ बेटे । ''

‘‘ आप वापस जाना चाहते थे। ''

‘‘ हाँ।''

‘‘ लेकन पापा अब आप हमारे साथ ह रHहये। वहाँ अब है भी Jया ? ''

‘‘ वो तो ठaक है मगर-।'' पापा वाJय परा


ू नहं कर सके।

‘‘ मगर-वगर कछ
ु नहं आप को अब हमारे साथ ह रहना है । उनक भी यह इTछा
है । '' अना ने नणाBयक वर म+ कहा।

पापा कछ
ु नहं बोले। श
ू य म+ दे खते रहे । अना चपचाप
ु उह+ दे खती रह।
अ-भमयु, अना पापा अपने <वशाल लॉन म+ बैठे थे। तभी अकबर और सेवानवDृ त
ाचायB भी आ गये। एक अनौपचाLरक वातावरण बन गया। अ-भमयु और ाचायB
-मलकर कूल के पराने
ु HदनK क चचाB करने लगे। अकबर भी बातचीत म+ शा-मल हो
गया। अचानक ाचायB ने कहा-

‘‘ कTची बती के काम से िजले का नाम रोशन हआ


ु है । ''

‘‘ हाँ ये बात तो है । '' अकबर बोल पड़ा।

‘‘लेकन िजले म+ अब उWवाद का साया पड़ गया है। कल के अखबार म+ फर एक बम


फटने का समाचार है । '' अकबर बोला-

‘‘ लेकन संतोष क बात है क कोई जान माल का नकसान


ु नहं हआ
ु है । '' अ-भमयु
ने कहा।

‘‘ हाँ लेकन इस तरह कब तक चलेगा। '' अना ने कहा ।

‘‘ यह समया कोई एक िजले या राkय क नहं है । यह एक <वSवXयापी समया है ।


गमराह
ु और भटके हएु लोगK को, पड़ोसी दे शK से मदद -मलती है और ये यवा
ु हमारे
दे श क मc
ु य धारा से कटकर उWवाद बन जाते ह^। इन यवाओं
ु को समझा कर
वापस मc
ु य धारा से जोड़ना ह मc
ु य कायB है । ''

‘‘ लेकन यह तो बड़ा मिS


ु कल काम है । '' पापा बोले।

‘‘ हाँ मिS
ु कल अवSय ह,◌ै मगर असंभव नहं। यHद सब -मलकर यास कर+ तो संभव
है । वातव म+ -मOता या शOता
ु थायी नहं होती, थायी Xयw के वाथB होते ह^।
कल जो बम फटा था, उसम+ 4गर•तार यवा
ु को हम लोगK ने तथा प-लस
ु ने समझाया
और उसने आDमसमपBण करने का <वचार XयJत कया है । ये भटके हए
ु अपने ह
बTचे इह+ घर का राता Hदखाने क आवSयकता हे । ''

‘‘ यह तो एक अTछा समाचार है।'' अना ने कहा।

‘‘ और सनाओ
ु अकबर तम
ु कैसे आये।'' अ-भमयु ने पछा।

‘‘ सर गाँव के कूल म+ जो ौढ़शाला खोल गयी है ,उसम+ उDतर साCरता हे तु प


ु तकK
क आवSयकता थी। ''
‘‘ ठaक है इस वषB सभी केoK म+ प
ु तक+ भेजने के यास कये जा रहे ह^। शायद
इस बजट बाद म+ यह कायB सIपन हो जायेगा। ''

म^ [ट से भी प
ु तक+ lय करने के -लए रा-श दं ग
ू ा। '' पापा बोल पड़े।

सभी ने मौन सहमत XयJत क ।

‘‘ अTछा म^ चलं।ू '' अकबर ने कहा।

‘‘ ठaक है । ''

अकबर के जाने के बाद अना, अ-भमयु और पापा बैठे रहे । कछ


ु समय तक मौन
रहा। फर पापा बोले-

‘‘ <वदे शK म+ इतने बरस रहा मगर यह सकन


ु ू नहं -मला। अपनी धरती अपने
लोग,अपनी -मZट, अपनी हवा, सब कछ
ु अपना और `यारा। ''

‘‘ पापा यह सब सोच कर तो म^ उस समय आपको छोड़कर भारत लौट आई थी। मझे

पिSचमी जीवन क नरथBकता का बोध हो गया था। '' अना बोल।

‘‘ मगर आज भी कतने तभाशाल वैhानक, इजीनयर, डाJटर तवषB <वदे श चले


जाते ह^। अ-भमयु ने कहा।

‘‘ हाँ इस तभा पलायन को रोकने के यास कये जाने चाHहए। आSचयB क बात है
क <वदे शK म+ कये जाने वाले अ4धकांश उTच तकनीक कायB भारतीय कर रहे ह^।
फर भी वे उपेxCत जीवन जी रहे ह^। ''

‘‘ JयK क अपने दे श म+ उह+ साधन नहं -मल रहे ह^। ''

‘‘ साधनK क दलB
ु भता से कोई घर नहं छोड़ता। ''

‘‘ घर छोड़ने का कारण महDवाकांCा है । ''

‘‘ लेकन महDवाकांCी होना बरा


ु नहं है । ''

‘‘ सवाल अTछा या बरेु का नहं है। सवाल ये है क हमारा दे श के त भी कोई


कतBXय है या नहं। िजस दे श म+ पैदा हए
ु , पले, बढ़े उसी दे श को केवल वयं क
गत के -लए छोड़ कर चले जाना उ4चत हे Jया ? '' अ-भमयु ने तीखे वर म+
कहा।
‘‘ शायद तम
ु ठaक कह रहे हो। मगर यवा
ु मन क उमंगK को रोकना मिS
ु कल होता है,
उस समय तो मन पंछa बन कर उड़ जाना चाहता है । ''पापा ने कहा।

‘‘ पंछa बनकर उड़ने के -लए इस दे श का आकाश छोटा नहं है पापा। इस महान दे श


क महान <वरासत म+ काम करने का आनद ह कछ
ु और है । ''- अ-भमयु बोला।

‘‘ शायद यह सब सोचकर तम


ु यहं रह गये। '' अना ने हसते
ँ हए
ु कहा। सब हं स
पड़े।

0 0 0

अ-भमयु अपने कायाBलय म+ बैठा था। आज उसके पी ए ने बताया क कछ


ु लोग
उपभोJता आदोलन के बारे म+ बात करने के -लए आने वाले ह^। उपभोJता आदोलन
परेू समाज पर भाव डाल रहा था। शासन ने भी उपभोJता के संरCण हे तु कानन

बना Hदये थे। उपभोJता संगठन के तन4ध आये। संगठन के अPयC ने सबका
पLरचय कराया। फर कहा-

‘‘ सर िजले म+ उपभोJता के HहतK को Pयान म+ रखने के -लए एक उपभोJता


यायालय बना है, मगर इसम+ अभी भी नयिJ
ु त नहं हई
ु है । ''

‘‘ यह कायB शीf कर Hदया जायगा।'' अ-भमयु बोला।

‘‘िजले म+ उपभोJताओं को अगर याय -मल सके तो बहत


ु अTछा रहे गा।'' स4चव बोल
पड़े।

‘‘ ठaक है । उपभोJताओं के HहतK क रCा के -लए शासन ने कानन


ू बना Hदया है ।
मगर केवल कानन
ू से काम नहं चलता है । आप जनता को जागVक कLरये। उह+
उपभोJता क़ाननK
ू क जानकार दिजये। उपभोJता को hात होना चाHहये क िजस
सेवा को वो सश5
ु क ा`त कर रहा है , उस सेवा म+ होने पर उसे हजाBना -मल सकता
है । यह जानकार जन-मानस तक पहचाने
ुँ म+ आप लोग Jया कर रह+ ह^। '' अ-भमयु
ने पछा।

‘‘ सर हम मीwडया के माPयम से लोगK को जानकार दे रहे ह^। ''


‘‘ यह काफ नहं है नJ
ु कड़ नाटकK के माPयम से भी लोगK को बताइए। ौढ़ -शCा
केoK म+ जाइये और लोगK को उपभोJता आदोलन के बारे म+ बताइये। कछ
ु उदाहरण
भी दिजये। ''

‘‘ उदाहरण कैसे सर। '' अPयC ने पछा


ू !

‘‘ उदाहरण rब5कुल पq और XयवहाLरक होने चाHहए। यHद एक XयिJत ने घड़ी


खरद है और घड़ी खराब हो गयी है तो उस XयिJत को हजाBने वVप नई घड़ी
-मलेगी या घड़ी का परा
ू पैसा और यह बात अय वतुओं पर भी लागू होगी। ''

‘‘ उपभोJता को अपनी बात कहने का भी अ4धकार है । यHद कोई कIपनी उसे


मआवजा
ु नहं दे ती है तो उपभोJता अदालत म+ जा सकता है ।'' स4चव बोला।

‘‘ rब5कुल सरकार व वक ल का खचाB नहं होता है ।'' एक अय साथी बोल पड़ा।

‘‘ तो आप लोग कबे के ब<sजी<वयK


ु , अPयापकK व जागVक लोगK को एकrOत
क िजये और इस आदोलन से जनता को अवगत कराइये। शासन आपको आपके
वांछत सहयोग दे गा।'' अ-भमयु ने कहा और समा`त कया।

उपभोJता आदोलन के सlय कायBकताBओं ने िजले के गांवK म+ जाकर लोगK से


बातचीत शV
ु क । पास के एक गांव म+ जब वे पहंु चे तो एक कसान ने पछा
ू -

‘‘ म^ने एक कIपनी से एक फXवारा -संचाई के -लए खरदा है जो कम समय म+ ह


खराब हो गया है। मझे
ु Jया करना चाHहये। ''

‘‘ सवB थम तम
ु सIबिधत कIपनी को -लखो, rबल क त अपने पास रखो। यHद
दकानदार
ु या कIपनी तI
ु हारा फXवारा नहं बदलती है या उसक नश5
ु क मरIमत
नहं करती है तो तम
ु िजला उपभोJता यायालय म+ अपना वाद दायर कर सकते हो।
वहां से तI
ु ह+ याय -मल जायेगा। ''

‘‘ लेकन म^ तो गरब, अनपढ़ और कIपनी सवB समथB ।''

‘‘ उससे कोई फकB नहं पड़ता है तुमने श5


ु क Hदया है और कIपनी को तI
ु हारा काम
करना होगा।''

लोगK के समझाने पर कसान ने कIपनी को पO -लखा गांव के माटर जी ने मदद


क , कछ
ु HदनK म+ ह कIपनी का आदमी आकर उसका उपकरण ठaक कर गया। गांव
म+ यह समाचार फैला तो उपभोJता आदोलन क साथBकता लोगK क समझ म+
आयी। धीरे धीरे लोगK म+ उपभोJता अ4धकारK के त जानकार बढ़ने लगी। एक नये
सामािजक पLरवतBन का आधार तैयार हआ।

0 0 0

सHदB यK के Hदन थे। लॉन म+ अ-भमयु, अना और पापाजी बैठे थे। बंगले के चौक दार
ने सचना
ू द क कछ
ु कू ल बTचे -मलना चाहते ह^ अ-भमयु ने उह+ अदर बला

लाने क आhा द। कछ
ु कू ल बTचे अपने कल
ू गणवेश म+ आ गये। अ-भमयु
और अना ने बड़े `यार से उनसे बातचीत शV
ु क बTचK ने बताया क वे अ-भमयु
के पैतक
ृ गांव से आये हे । िजला तरय व खेलकद
ू म+ भाग लेकर वापस गांव चले
जाय+गे।

अना ने पछा
ू -

‘‘ तम
ु लोगK के गांव म+ वाय सIबधी जानकार है ? ''

‘‘ हाँ मेम अब वाय -शCा क जानकार -मलती है । ''

‘‘ अTछा ये बताओ सभी के पास पतक


ु + ह^। '' पापा ने पछा।

‘‘ नहं सर कछ
ु बTचK के पास प
ु तकK क कमी है। ''

एक बTचे ने शालनता से उDतर Hदया।

‘‘ JयK ? '' अ-भमयु ने जानना चाहा।

‘‘ सर गरबी के कारण प
ु तक+ नहं खरद पाये। '' एक अ4धक उ„ के छाO ने कहा।

अ-भमयु मौन रह गये। पापा ने पछा।


ू ''

‘‘ अTछा तI
ु हारे कूल म+ ऐसे कतने छाO है िजह+ पतकK
ु क आवSयकता है ।''

‘‘ सर करब बीस छाOK को प


ु तकK तथा गणवेश हे तु यHद छाOवत
ृ -मल सके तो
कपा
ृ हो।'' एक अय छाO बोल पड़ा।
अना फर सोच म+ डब
ू गयी। अ-भमयु को अपने ह गांव के बTचK क िथत म+
कोई सधार
ु नहं Hदखा। वो मन ह मन दखी
ु हआ।
ु पापा बोल पड़े।

‘‘ अना मेरे यास से इस गांव के सभी गरब कूल छाOK को प


ु तक+ तथा गणवेशK
को Hदये जाने चाHहये। ''

‘‘ हाँ पापा यह ठaक रहे गा। '' अना ने सहमत XयJत क । इस वाताBलाप के बीच म+
ह अना ने दे खा क एक छाO सहमा सा दरू खड़ा था। अना ने उसे अपने पास
बलाया
ु , `यार से उसके -सर पर हाथ फेरा और पछा
ू -

‘‘ तI
ु हारा नाम Jया हे ? ''

‘‘ मोहIमद शरफ ।''

‘‘ कस के लड़के हो।''

‘‘ अकबर का। ''

‘‘ अTछा तो तम
ु अकबर के बेटे हK। '' अ-भमयु बोला।

‘‘ हाँ अंकल।'' अब लड़का खल


ु गया था।

‘‘ अकबर भाई को नमकार कहना।'' अना बोल पड़ी।

‘‘ अTछा गांव म+ कसी छाO को छाOवत


ृ -मलती है ? पापा ने पछा।

छाOK ने कोई जवाब नहं Hदया।

अTछा एक काम करना। गरब छाOK से एक-एक ाथBनापO -लखवाकर कूल के


ाचायB से अWे<षत करवाकर मझे
ु भेज दे ना म^ अपने यास से गरब छाOK के -लए
वजीफा दं ग
ू ा।'' पापा ने नणाBयक वर म+ कहा।

कूल के छाOK को अTछा लगा। वे सभी को णाम कर वापस जाना ह चाहते थे।
क अना ने सबको -मठाई खाकर जाने को कहा। बTचे चहकने लगे। अ-भमयु,
अना और पापा को भी अपना बचपन याद आ गया। कछ
ु समय बाद बTचे चले
गये।

समय गजरता
ु रहता है XयिJत के पास छट
ू जाती है जीवन क कड़वी मीठa याद+ ।
आज फर अ-भमयु को अपना अतीत याद आ गया था।
वे कछ
ु उदास हो उठा। सांझ गहरा गयी थी। वे सब अदर चले गये।

अन ने कमला को बलवा


ु -लया था। पापा भी थे। अ-भमयु ने भी समय नकाला
था, सभी -मलकर परानी
ु बातK को याद कर रहे थे। अ-भमयु के संघषB क गाथा एक
खल
ु कताब क तरह थी, एक सामाय अPयापक से उTच पद तक पहचने
ँ क कथा
जो सTचाई, ईमानदार और नैतक म5
ू यK पर आधाLरत थी। अ-भमयु को दे श से ेम
था, जातO से ेम था। लगातार काम करने से अ-भमयु को लोगK का `यार भी
-मला था। जातािOक म5यK
ू म+ आथा के कारण अ-भमयु सवBO आदर पाता था।
वे चारK बैठे थे तो पापा बोले-

‘‘ अ-भमयु आप अब भावी जीवन के बारे म+ Jया सोचते ह^। ''

‘‘ मझे
ु अपने जीवन के भ<वतXय से Jया करना है । XयिJत से बड़ा है दे श , दे श का
भ<वतXय उkkवल होना चाHहए। XयिJत आते ह^,चले जाते है , महान दे श रहना चाHहए
और यह हम सब का लƒय होना चाHहए। ''

‘‘ फर भी Jया सोचते हो तम।


ु '' अना बोल।

‘‘ सोचना Jया है । कमB\येवा4धकारते। बस मझे


ु चलते जाना है माइ5स टू गो rबफोर
आई लप। ''

‘‘ फर भी। '' कमला ने करे


ु दा। ''

‘‘ कछ
ु नहं, अपने -लए कछ
ु नहं चाHहए। दे श अCु\ण रहे और इसम+ यHद मेरा कोई
योगदान संभव हो तो अवSय हो।''

‘‘ लेकन यHद कोई साथ न दे तो।'' कमला ने फर पछा।


‘‘ कोई बात नहं एकला चालो रे । '' अ-भमयु बोला।

‘‘ म^ चाहता हू ँ क मेरा दे श नभBय हो ओर सभी का -सर गवB से उनत हो। सवेरे का


सरजू सभी को काश दे । वो सभी को rबना भेदभाव से अधकार से काश क ओर
ले जाये। यह मेर अ-भलाषा है । एक नया सवेरा हो और सभी को रोशनी -मले, यह
रोशनी सभी के जीवन को आलोक से भर द+ । आओ हम सब -मलकर एक नये सवेरे
का वागत कर+ ;उसे णाम कर+ । ''

‘‘ तमसो माँ kयोतगBमय। ''


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ु बाहर, जयपरु-302002 फोनः-2670596