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पीडीएफ़ ई-बक

ु – रचनाकार http://rachanakar.blogspot.com क
तत
ु –
यंय उपयास
यश का शकंजा

यशवत कोठार"

स#पण
ू & कालोनी म) नीरवता, रा*+ का ,-तीय हर ।
राजधानी क पाश कालोनी के इस बंगले म) से आती आवाज)
चार5 ओर छायी नीरवता को भंग कर रह" थीं। कभी-कभी दरू कह"ं
पर ;कसी क<
ु ते के भ=कने से इस शाित को आघात पहंु च रहा था।
एक बड़े कमरे म) पांच यिAत थे। केB"य सरकार के वCरD
मं+ी Eी रानाडे, उनके अपने प+ के स#पादक-म+ आयंगार, रानाडे
के GवHवासपा+ सIचव एस. संग और उKोगपत सेठ रामलाल ।
सेठ रामलाल अपनी बढ़ती त5द और चढ़ती उM को स#भालने
के लए एक म,हला को हमेशा अपने साथ रखते थे, और आज वे
राजधानी क स
ु दरतम कालगल&
ॅ शश को साथ लाये थे।
कमरे म) शराब और सगरे ट क बदबू फैल रह" थी। रानाडे ने
कमती शराब का घंट
ू भरा,शश क ओर दे खा और अपने सIचव
को बाहर जाने का इशारा ;कया।
सIचव के चले जाने के बाद उह5ने कहा-
‘‘ बड़ी मसीबत
ु हो गयी है भाइ ! धानमं+ी तो अड़ गये हS-
अब Aया होगा ? सेठजी , त#
ु हारा लाइसेस भी मिH
ु कल है .....''
‘‘ तो मेरा Aया होगा ?'' सेठ रामलाल परे शान होने लगे।......
पहलू बदल कर रानाडे ने कहा-
होना जाना Aया है ? हमने गांधी क समाIध पर कसम
खाई थी, नह"ं तो इस सरकार को कभी का Iगरा दे ते ! कोई
सरजकT
ू ु ड जा रहा है , तो कोई वहां से आ रहा है । कोई दोहर"
सदयता से परे शान हो रहा है तो कोई अपने प+
ु क रं गीनय5 म)
डब
ू रहा है । यहां हर कोई दसरे
ू क पगड़ी को अपने पैर5 म) दे खना
चाहता है । ''
‘‘ ले;कन इन सब छछल" राजनीत का हE Aया होगा ? ''
आयंगार ने सगरे ट का धंुआ उपर उछालते हए
ु प+काCरता का
बघार लगाया।
‘‘ दे खो भाई , साफ बात है .....'' रानाडे कछ
ु दे र Uके और धवल
चांदनी *बछे सोफे पर पसर गये। शश ने उनके हाथ म) जाम
पकडाया।
़ उह5ने एक घंूट लया। आंख) मंद
ू "ं, अपनी सफाचट खोपड़ी
पर हाथ फेरा । द"वार पर टं गे गांधीजी के Iच+ को मन-ह"-मन
णाम ;कया और कहने लगे-
‘‘ अगर मझे
ु हटाने क सािजश जार" रह", तो मS कहे दे ता हंू ,
;कसी को नह"ं बXशंूगा-एक-एक को दे ख लंग
ू ा ! .....''
आयंगार , तम
ु कल अपने अखबार म) , स<ताधार" पाटY म) फट

पर एक तेज-तरा&र स#पादकय लख दो ! ''
‘‘ लगे हाथ यह भी लख दे ना ;क शीZ ह" कछ
ु असंत[ु ट
सांसद , एक अलग पाटY क घोषणा करनेवाले ह।S ''
‘‘ले;कन इससे समया का समाधान थोड़े हो जाएगा !
''आयंगार ने टांग अड़ाई।
‘‘ तम
ु वह" करो जो मS कहता हंू , और आगे-आगे दे खते जाओ,
होता Aया है ! इस बार अगर धानमं+ी को नीचा नह"ं ,दखाया तो
मेरा नाम रानाडे नह"ं ! ''
मS 50 वष& से भारतीय राजनीत म) भाड़झ5क रहा हंू , और ये
कल के लड़के मझु पर साव&जनक Uप से आरोप लगाते हS-मझे ु
बला<कार" और अ<याचार" कहते ह।S अरे भाई , सभी खाओ और
खाने दो । ले;कन नह"ं ! खाएंगे भी नह"ं बौर फैला भी दगे
) । ले;कन
मने
S भी क^ची गोलयां नह"ं खेल" हS ! '' रानाडे ने आवेश से कहा।
‘‘ सेठ रामलाल , तम
ु कल तक मझे
ु दस लाख Uपये
दो;सार-चार और खर"द-बेच करना पड़ेगा। ''
‘‘ त#
ु हार" जो 10 करोड़ क चांद" बाहर भेजी थी, वह पहंु च
गयी या नह"ं ! ''
‘‘ जी हां पहंु च गयी है । '' सेठजी ने उ<तर ,दया।
‘‘ बस तो तम ु दस लाख Uपये भजवा दो ! '' रानाडे ने
आदे शा<मक वर म) कहा।
इसी बीच सIचव ने आकर बताया-
‘‘ सर, पी. एम. का फोन है । ''
‘‘ हां, है लो, मS रानाडे ....''
‘‘ यस, उस फाइल का Aया हआ ु ? ''
‘‘ अभी मेरे पास ह" है ! ......''
‘‘ ले;कन मने
S आपसे कहा था , उसे ज_द" नकाल दे ना ! ....''
‘‘ मS पाटY के संगठन म) यत रहा, सर !.....''
‘‘ दे `खये मटर रानाडे , संगठन और चदे क यवथा का
समय नह"ं है यह। हम) कछ
ु करके ,दखाना है ! चनावी
ु वायदे परेू
नह"ं हए ु तो हम) भी इतहास रaद" क टोकर" म) फक
)
दे गा....''पी.एम. का वर गंज
ू ा।
‘‘ ले;कन इसम) मS Aया कUं, ! ..... Gपछल" बार मेरे चनाव
ु bे+
म) बाढ़ आयी तो आपने सहायता कम कर द"। '' -रानाडे बोल पड़े, ''
इस बार आपके चनाव
ु bे+ म) अकाल है तो फाइल पर ज_द"
नण&य आवHयक हS ! Aया हम सभी ने इसी क कसम खाई थी ?''
रानाडे ने जोड़ा।
‘‘ पर यह बहस का समय नह"ं है ! रात काफ हो गयी। तम

फाइल मझे
ु भजवा दो । '' -पी. एम. ने कहा और फोन रख ,दया।
रानाडे ने फोन रखा। सIचव को फाइल पी. एम. के पास फौरन
भेजने को कहा और शश से एक और जाम लेकर Gपया।
रानाडे के चप
ु हो जाने के बाद कमरे म) शाित छा गयी।
कोई कछ
ु नह"ं बोल रहा था। सभी के चेहरे पर तनाव साफ ,दखाई
दे रहा था ! आयंगार सगरे ट के छ_ले बनाता रहा।
सेठ रामलाल ने जाने क इजाजत मांगी , मगर रानाडे ने
कोई जवाब नह"ं ,दया।
रानाडे ने कहा, ‘‘अ^छा तो ;फर कल के अखबार म) जैसा मने
S
कहा वैसा आ जाना चा,हए !''
‘‘ जी , अ^छा ! '' - आयंगार ने हां-म) -हां मलाई ।
‘‘ अब तम
ु जाओ !''
आयंगार के जाने के बाद रानाडे ने सेठ रामलाल को आंख5
का इशारा ;कया। सेठजी समझ गये।
‘‘ अ^छा शश, तम
ु यह"ं ठहरो, मS चलता हंू । ''
इससे पहले शश कछु कह सके , सेठजी बाहर जा कर अपनी
कार म) बैठकर चल पड़े।
कमरे म) रानाडे और शश बचे रहे । वह" हआ
ु जो ऐसे अवसर5
पर होता आया है । कछु ,दन5 बाद शश के नाम से एक बड़ी
क#पनी के Hोयर खर"दे गये।
संसद-भवन से एक ल#बी केडीलाक बाहर नकल" और तेजी
से आगे बढ़ गयी। इस कार के पीछे तीन-चार अय कार) भी तेजी
से चल पड़ी। ल#बी केडीलाक कार के अदर केB"य सरकार के
वCरD मं+ी रानाडे, और उसके पीछे वाल" कार5 म) उनके अनयायी

थे। सभी केB"य मं*+मंडल क मी,टंग से वाक आउट करके आ
रहे थे।
रानाडे के आवास पर आज बड़ी गहमा-गहमी है । लान म)
इधर-उधर झT
ु ड बनाकर लोग बैठे हS, बतया रहे हS। आनेवाल" कार5
क ल#बाई से आनेवाले क है सयत नापी जा रह" है ।
रानाडे के दोनो सIचव और मस असरानी तेजी से इधर से
उधर भाग-दौड़ कर रहे हS ।
मनसख
ु ानी क अंगलयां
ु टाइपराइटर पर मशीन क तरह दौड़
रह" ह।S पास के कमरे म) टे लGटर तेजी के साथ कागज और
कागज5 पर समाचार उगल रहा था।
डाइंग Uम के बाहर वाले कमरे म) प+-तनIध बैठे थे।
उससे आगे कछ
ु Gवशd यिAत एक कमरे म) रानाडे का इतजार
कर रहे थे। अचानक बाहर ह_ला हआ ु -
‘‘ रानाडे आ गए।'' दोन5 सIचव उधर दौड़ पड़े। कार म) से
रानाडे को सहारा दे कर उतारकर अदरवाले कमरे म) ले जाया गया।
अदर के मं+णा-कb म) रानाडे और उनके अनयायी
ु बैठे और
वाता&eम ारभ हआ ु -
‘‘ अगर कमार
ु वामी को तोड़ा जा सके तो हमार" िथत ठfक
हो सकती है ।'' रामHवर दयाल ने कहा।
‘‘ तम
ु यह Aय5 भल
ू जाते हो , ;क इससे उ<तर म) हमार"
शिAत कम हो जायेगी।'' -रानाडे बोले ।
‘‘ तो ;फर Aया ;कया जाए ? '' रामेHवर ने Iचतातरु हो कर
कहा ।
‘‘ धानमं+ी तो *बलकल
ु भी झकना
ु नह"ं चाहते .....''
‘‘एस. संग, तम
ु जरा उन सांसद5 क सच
ू ी बनाओ जो हमारे
साथ है , और सभी को फोन पर सIचत
ू कर दो-मीट"ंग शाम को
होगी । ''
‘‘ जी अ^छा ! '' एस. संग दौड़कर मनसखानी
ु के पास आया।
फटाफट सची
ू टाइप हु ई और रानाडे को द" गयी।
सची
ू पर एक नजर डालकर रानाडे बोले , ‘‘ कल
ु 120 एम. पी.
मेरे साथ ह।S उ<तर के राgय5 म) मेरे तीन मX
ु यमं+ी हS , इह) भी
बलवा
ु लो । ''
‘‘ अब समय आ गया है ;क खला
ु संघष& कर लया जाए ! '' -
रानाडे बोले।
‘‘ रामेHवर, तम
ु शाम क मीhीरग क तैयाCरयां करो। उसके
तर
ु त बाद ह" एक प+कार-स#मेलन होगा ! '' रामेHवर चल ,दये।
‘‘ सर, *बहार म) मं+ी हCरहर नाथ मलना चाहते हS ! ''
‘‘ अभी मS ;कसी से नह"ं मलंग
ू ा ! प+कार5 से भी कह दो-
शाम क मी,टंग के बाद आय।) ''
‘‘ जी, अ^छा !'' सIचव चला गया।
रानाडे उठकर अदर वाले कमरे म) GवEाम हे तु चल ,दये।
यह कमरा काफ अदर था, ;कसी को अदर आने क इजाजत न
थी। बहत
ु कम लोग जानते थे ;क कमरे म) Aया रहय है । वातव
म) कमरा रानाडे क ऐशगाह था।
रानाडे डनलप के नरम गaदे पर लेट गए। मगर Iच<त
अशात था। तiणा
ृ क भी अजीब हालत है - वे लेटे-लेटे सोचने लगे-
कहां तो गांधी और उनके सपन5 का भारत , आचाय& नरे Bदे व का
समाजवाद और कहां हम जो केवल राजनीतक उठापटक पर ह"
िजदा ह।S कोई तलना
ु ह" नह"ं है ।
उह) अपना अतीत सताने लगा-गर"ब मां-बाप क इकलौती
सतान, दे श के एक गर"ब गांव म) जमा बालक रानाडे । पांच वष&
का हआ
ु , मां चल बसी। बीमार" और बेकार" ने कछ
ु समय बाद
बाप को भी ल"ल लया। सेठ5 ने जमीन हड़[ा ल"। मौसी ने पाला
पोसा। तभी से रानाडे ने राजनीत म) आने क ठानी । शbा-द"bा
पर"
ू नह"ं हो पायी, ले;कन भाषण कला म) जमते गए। तहसील से
िजला, िजला से ात और ात से राजधानी तक क ल#बी दर"

रानाडे ने पार क है । कई पट;कयां खायीं , कई `खलायीं-ले;कन
बढ़ते चले गए । उह) वयं आज आkय& होता है - वे कहां थे, कहां
आ गए ! हर रात वे सहाग
ु रात क तरह मनाते है । उनका Gवचार
है , मानसक शाित और फ_
ु लता हे तु यह आवHयक है !
Gवचार5 के इस महासमB
ु म) अचानक एक धंध
ु ल" आकत

उह) ,दखाई दे ने लगी। धीरे -धीरे आकत
ृ साफ होती गयी। इसी के
साथ उह) कमरे म) एक अजीब सनाटा और रहयपण&
ू आवाज)
सना
ु ई पड़ने लगीं। आकत
ृ उनके पलंग के पास आकर खड़ी हो
गयी, वे डर गये। चीखना चाहते थे, ले;कन चीख नह"ं नकल"।
यह आकत
ृ अकसर उह) अकेले म) परे शान करती है , वे कछ

नह"ं कर सकते। ओझाओं, gयोतGषय5, ताि+क5, हडभोप5-सभी से वे
ताबीज, गTडा, डोरे लेकर दे ख चक
ु े , कछ
ु नह"ं होता ।
आकत
ृ उनक प+वध
ु ू कमला क है , जो बरस5 पव&
ू उनक
हGवस का शकार होकर आ<मह<या कर चक
ु  है । उनका प+
ु पागल
होकर ;कसी नद" म) डब
ू मरा। कहने वाले अभी तक कछ
ु -न-कछ

कहते रहते ह।S रानाडे ने इस डर से बचने के लए नींद क गोलयां
खायीं और सो गये ।
ल#बे समय बाद रानाडे को आज क सबह
ु इतनी ताजी ओर
सहावनी
ु लग रह" थी। रात क खमार"
ु धीरे -धीरे उतर रह" थी टे बल
पर दे श-Gवदे श के मख
ु अखबार थे। वे स`ख&
ु य5 को टटोल टटोलकर
परख रहे थे।
आयंगार ने स<ताधार" पb पर तीखा आeमण ;कया था।
सव&या[त असंतोष के लए उसने धान मं+ी को दोषी ठहराया था
;ले;कन धानमं+ी के अखबार5 ने दे श म) या[त अराजकता, ,हंसा,
लटपाट
ू और हCरजन5 को िजदा जला ,दये जाने का सेहरा रानाडे
के सर पर बांधने क कोशश क थी।
अचानक सIचव ने आकर lयान भंग ;कया-
‘‘ सर, अपने bे+ से Gवधायक हरनाथ आये ह।S''
हरनाथ रानाडे के GवHवासपा+ Gवधायक थे। वे bे+ क हर
छोट"-बड़ी घटना क जानकार" रानाडे को दे ते रहते थे। और रानाडे
इस हे तु कछ
ु काय& करवा दे ते थे।
‘‘ णाम महाराज '', और हरनाथ उनके चरण5 म) झक
ु गये।
हरनाथ अकेले नह"ं थे, उनके साथ ह" एक ;कशोर" बाला थी।
रानाडे ने उसी क ओर मखातब
ु होकर पछा
ू -
‘‘ कहो , Aया बात है ?''
‘‘ सर, .....ऐसा....है .....'' और बेचार" ;कशोर" कछ
ु बोल न सक
। रानाडे ने हरनाथ पर mGd फक
) ;हरनाथ कहने लगे-
‘‘सर, इसके साथ घोर अयाय हआ
ु है ! ये आपके bे+ क
सामािजक काय&कता& ह।S इनका थानातरण अय+ कर ,दया
गया। बेचार" बड़ी दखी
ु हS। घर पर बीमार मां है , और कोई नह"ं ।
आपको Gपता-त_
ु य मानकर आयी हS, इनक मदद कर) !''
‘‘ अ^छा, तो आप वापस थानातरण चाहती ह।S ले;कन यह
Gवभाग तो मेरे पास नह"ं है । और स#बिधत मं+ी मेरे गट
ु के भी
नह"ं ह।S ''
;कशोर" का चेहरा Uआंसा हो गया। रानाडे समझ गए। उह5ने
उसक पीठ पर हाथ फेरा और कहा, ‘‘ खैर, तम
ु नराश मत हो ओ
! अभी तो आराम करो , ;फर जैसा होगा वैसा करगे
) !''
;कशोर" ने पैर छए
ु और हरनाथ के साथ चल" गयी।
उसे एक थानीय होटल के कमरे म) ठहरा ,दया गया।
दसर"
ू रात को होटल के उस कमरे म) फोन आया-
‘‘ तम
ु अभी रानाडे के यहां चल" आओ। त#
ु हारा काम हो
जाएगा !''
रानाडे क कोठf पर रात को सव&व लटाकर
ु ;कशोर" , वापस
आते समय होटल जाने के बजाय आ<मह<या कर गयी। दसरे
ू ,दन
अखबार5 ने बड़ा ह_ला मचाया। ले;कन कछ
ु नह"ं हआ।
ु अखबार5
को Gवnापन और स#बिधत प+कार5 को [लाट बांट ,दए गये धीरे -
धीरे सब ठfक हो गया।

-2-

धान मं+ी आवास। बड़ा GवIच+ और अनोखा यिAत<व है


धान मं+ी का धीर, ग#भीर ! ऐसा लगता है , जैसे Gवचार5 और
समयाओं के महासमB
ु म) डबे
ू ह।S उM लगभग 75 वष& , शo
ु धवल
व+5 म) , धोती क लांग स#भालने के साथ-साथ दे श और पाटY
क बागडोर स#भालने म) भी नपण।

काया&लय क अTडाकार मेज के पीछे Cरवोि_वंग कसp
ु पर बैठे
हS, फाइल5 का अ#बार और टे ल"फोन5 क कतार । लाल, सफेद,
काला और पीला-चार फोन। एक इटरकाम, कई तरह के बटन ,
कमरे म) दे श के महापqष5
ु के Iच+ ।
आज राव साहब ग#भीर gयादा ह" ह।S सबह
ु से ह" वे पाटY के
आवHयक काय& म) यत ह।S उनके वयं के bे+ म) भयंकर सखा

था, लोग पानी क एक-एक बंूद के लए तरस रहे थे। आ,दवासी
पGrयां और जड़) चबा-चबाकर अपना समय नकाल रहे थे। उड़ती
हुई खबर) भख
ू से मरने क भी आयी थीं, ले;कन राव साहब ने उसे
GवरोIधय5 क चाल कहकर टाल ,दया था। उनके अनसारु -
‘‘ यह गद" राजनीत से ेCरत है । मेरे चCर+-हनन का यास
;कया जा रहा है ।''
;फर भी राव साहब अपने bे+ के त उदासीन हS, ऐसी बात
नह"ं । परस5 ह" वहां का हवाई सवbण
s करके आये है । कल ह"
अफसर5 को फोन पर नये आदे श ,दये ह।S स#बिधत मं+ालय5 के
मं*+य5 को भी आगाह ;कया है । एक कनD मं+ी क tयट"
ू अपने
ह" bे+ के िजला-मX
ु यालय पर लगा द" है । ले;कन यह रानाडे- ‘‘
साला समझता Aया है , अपने आपको-120 एम.पी. Aया हS, इसके
पास, अपने आपको खदा
ु समझता हS ! ''
उह5ने फोन पर आदे श ,दया-
‘‘ सी.बी.आई. के मुख को बलाओ
ु ! ''
थोड़ी दे र बाद सी.बी.आई. मुख ने एuड़यां बजाकर से_यूट
;कया।
राव साहब ने सर के ह_के इशारे से अभवादन वीकार
;कया और बैठने का इशारा ;कया-
‘‘ आपका Gवभाग ठfक चल रहा है ?''
‘‘ जी हां.....''
‘‘ कोई राजनैतक दबाव तो नह"ं है ? ''
‘‘ जी नह"ं ! ''
‘‘ दे `खये, मै। चाहता हंू ;क सभी जगह कानन
ू और यवथा
मजबती
ू से कायम क जाए ओर *बना ;कसी दबाव के सब काय&
कर।)....... अगर कोई परे शानी हो तो सीधे मझे
ु बताएं ! '' राव साहब
बोले ।
‘‘ जी, अभी तो कोई नह"ं ''- चीफ बोले।
‘‘ उस होटल-काTड क- िजसम) एक ;कशोर" क म<ृ यु हो गयी
थी , कौन जांच कर रहा है ? .......''
‘‘ वो, केस तो फाइल हो गया, सर ! ''
‘‘ Aय5 ? Aय5 फाइल हो गया ? ''
‘‘ दै ट वाज ए केस आफ ससाइड
ु ! ''
‘‘ ससाइड
ु ? हाउ कैन यू से ? Aया तमसे
ु पछकर
ू लड़क ने
आ<मह<या क, या त#
ु ह) कोई सपना आया ? ''
सी.बी.आई. मख
ु बगलं झांकने लगे उह) ऐसी उ#मीद नह"ं
थी, ले;कन अब Aया हो सकता है !
‘‘ वेल मन
S , ;कसी ईमानदार अफसर को वापस वह केस दो
और पर"
ू तहककात कराओ ! मझे
ु शक है , इस ह<याकाTड म) कछ

Gवशेष लोग5 का हाथ है ।''
‘‘ ओ.के., सर ! ''
‘‘और दे खो, िजस एस.पी. को लगाओ, उसे कह दे ना-पर"
ू Cरपोट&
मS वयं दे खंग
ू ा ! ''
‘‘ जी, बेहतर ! ''
‘‘ जाइये ! ''
मुख ने बाहर आकर पसीना प5छा ।
रा*+ का थम हर, राव साहब के अlययन-कb म)
टे बलhयब
ू का काश। राव साहब कछ
ु अ<यत मह<वपण&
ू और
गोपनीय फाइल5 के अlययन म) यत ह।S
सIचव ने आकर बताया, ‘‘ एस.पी. इटे ल"जेस मलने आये
ह।S राव साहब के चेहरे पर एक क,टल
ु म
ु कान आयी और उह5ने
एस.पी. को भेजने को कहा। एस.पी. का अभवादन वीकार कर
कहने लगे-
‘‘ कब से इटे ल"जेस म) हो ? ''
‘‘ सर , दस वष& से ! ''
‘‘ अभी तक तम ु उपर नह"ं बढ़े ? ''
‘‘..............''
‘‘ खैर , जो केस त# ु ह) ,दया गया है , वह बहत
ु मह<वपण&
ू है ।
Gपछले कछ ु समय से राजधानी म) मासम ू लड़;कय5 से बला<कार
और ह<या क वारदात) बढ़ गयी हS,....... होटल-काTड के केस का
अlययन ;कया आपने ? ''
‘‘ जी हां ......दै ट इज़ ए केस आफ ससाइड
ु । ''
‘‘ दै ट इज़ ए केस आफ ससाइड
ु '' - ;कतनी आसानी से बोल
गए तम
ु ! ले;कन होटल के बाहर जो कार खड़ी थी, उसम) पड़ोसी
राgय के एक भतपव&
ू ू मं+ी हरनाथ थे ? ''
‘‘ जी, हां .....''
‘‘ वे वहां Aया कर रहे थे ? '' राव साहब ने पछा
ू ।
‘‘ .................''
‘‘ दे खो '' अब राव साहब ने उह) आ<मीयता से समझाया-
‘‘ ऐसे केसेज़ क ग<ु थी सलझाने
ु म) बGw
ु ओर धैय& चा,हए।
परेू केस क टडी करो और दे खो ;क वातव म) Aया हआ
ु ! ''
‘‘ जी ..... ! ''
‘‘ ओ.के. ! '' राव साहब ने कहा और एस.पी. बाहर आ गए।
सIचव ने आकर बताया -
‘‘ सर, अमेCरकन राजदत
ू मलना चाहते ह।S ''
इधर राव साहब क शार"Cरक, मानसक और राजनीतक शिAत म)
नरतर कमी आयी है । शार"Cरक Uप से वे काफ अशAत हो गए
है । सभी राजरोग उह) घेरे हुए ह।S मधमे
ु ह, xलड-ेसर, yदय रोग के
अलावा यदा-कदा उह) वA ृ क से स#बिधत शकायत) भी रहती हS,
ले;कन उह5ने हमेशा दे श और पाटY को शर"र से उपर समझा है ।
यह" कारण है , इस िथती म) भी दे श क बागडोर वे बढ़े
ू घोड़े क
तरह स#भालते चले आ रहे हS। मानसक Uप से भी वे अपने
आपको अब gयादा सbम नह"ं पाते है । GवरोIधय5 ने नरतर
अपनी शिAत का Gवकास ;कया है , और इसी कारण राव साहब
राजनीत के अखाड़े के अनभवी
ु `खलाड़ी होते हए
ु भी अपनी शिAत
को कमजोर होता दे ख रहे ह।S
Gवरोधी पb के कई मख
ु नेताओं पर उह5ने समय-असमय
कई उपकार ;कए ह।S कोटा, परमट, लाइसेस , Gवदे श-या+ाएं अAसर
वे बांटते रहते ह।S अपने दरबार से ;कसी Gवपbी को खाल" हाथ
नह"ं जाने दे ते । ले;कन ;फर भी अब वो बात नह"ं रह" । धीरे -धीरे
उनके चार5 ओर एक जमघट एक*+त हो गया, जो केवल वयं
अपना ,हत-Iचतन कर सकता है । िथत ,दन5,दन *बगड़ने लगी।
राव साहब चाहकर भी इन लोग5 से नह"ं बच सकते ।
उह5ने रानाडे को मं*+मTडल से हटाने क सोची, ले;कन
उसके बाद उ<पन होने वाल" िथत का lयान आते ह" उह)
अपनी कसp
ु डोलती नजर आती और वे चप
ु रह जाते । इस बार
उह5ने रानाडे क जड़) ह" खोखल" करने का नHचय ;कया। तीन
राgय5 म) रानाडे के मX
ु यमं+ी थे। सबसे पहले उह5ने इन तीन5
राgय5 म) अपने GवHवत अनचर
ु भेजने का तय ;कया, ता;क वहां
राजनैतक अिथरता उ<पन क जा सके। अगर इस काय& म) वे
सफल हो जाते हS तो ;फर रानाडे क जड़5 म) मzठा डाला जा
सकेगा, और ;कसी बहाने से वे रानाडे को मं*+मTडल से हटा दगे
) ।
फोन करके उह5ने अपनी GवHवत माया को बलवाया
ु और
उसे पर"
ू योजना समझाने लगे-
‘‘ दे खो माया, अब िथत धीरे -धीरे *बगड़ रह" है । सीमाओं पर
अशाित है , केB म) राजनीतक अिथरता है ..... और रानाडे मान
नह"ं रह) ह।S ''
‘‘ येन-केन-कारे ण हम) रानाडे को डाउन करना ह" है !
राजधानी के होटल-काTड क मने
S नये सरे से जांच के आदे श ,दए
है । रानाडे के `खलाफ एक आयोग बैठाने क भी बात सोच रहा हंू ।
ले;कन इस बीच तम ु उन दे श5 म) जाओ, जहां रानाडे के मX
ु यमं+ी
है , और ;कसी भी तरह वहां क सरकार Iगराओ। जो भी स#भव हो
सके करो और सफल होकर आओ। ''
‘‘ दे `खए, तीन म) से दो दे श5 क सरकार) तो कभी भी Iगराई
जा सकती हS, Aय5;क वहां पर रानाडे समथ&क5 का बहमत ु gयादा
नह"ं है । तीसरे दे श हे तु gयादा मेहनत होगी ! ''
‘‘ कोई बात नह"ं, हम) सब कछ
ु करना है ! ''
‘‘ अब तम
ु जाओ और काय& शU
ु करो, साथ म) कछ
ु अनचर

और ले जाओ। ''
‘‘ ठfक है ! ''
;कसी ात क राजधानी म) मायादे वी Eीवातव का पदाप&ण
बहत
ु बड़ी घटना मानी जाती है । मX
ु यमं+ी जानते हS ;क केB म)
मायाजी का आना Aया मायने रखता है , और इसी कारण उनके
आगमन को अ<यत मह<वपण&
ू माना जाता है । जब से पता चला
;क मायादे वी आ रह" हS, मX
ु यमं+ी भयभीत ह।S उह5ने मायादे वी के
वागत-स<कार क जोरदार तैयाCरयां कं।
एअर-कTडीशड uडxबे से उतरते ह" अपने वागत म)
मX
ु यमं+ी ह" नह"ं , परेू मं*+मTडल को दे खकर वे खश
ु हु ई, ले;कन
उह) तो अपना काम करना था ! Gवधान सभा बद थी। वत&मान
मX
ु यमं+ी के पास 110 Gवधायक थे और Gवपb म) 90 । मायाजी
को 10-15 Gवधायक तोड़कर Gवपb म) मलाने थे।
सबह
ु और रात म) , हर समय उह5ने काम ;कया उह5ने
नोट5 क थैलयां खोल द"ं।
उधर मX
ु यमं+ी और उसके चहे ते मं*+य5 ने भी डटकर
मकाबला
ु ;कया। ले;कन कछ
ु हCरजन Gवधायक5 को मायाजी तोड़ने
म) सफल हो गयीं। एक Gवधायक को उप-मX
ु यमं+ी पद का लालच
,दया गया।
दसरे
ू ,दन अखबार5 म) मख
ु समाचार था-
‘ वत&मान सरकार अ_पमत म) । '
‘ सरकार का इतीफा ! '
‘ नये मं*+मTडल का गठन शी{। '
मायाजी का काम समा[त हो गया था । वे और उनके सIचव
अगले दे श क राजधानी हे तु उड़ चल) ; और मायाजी जब एक
स[ताह के बाद ह" वापस राव साहब से मल"ं, तो राव साहब उनके
काय& से बहत
ु खशु थे, और इस खशी
ु म) उह5ने वह रात माया जी
के नाम कर द"।

3
वे तीन5 राजधानी के एक साधारण दाU के ठे के से पीकर
नकल रहे थे।
एक भतपव&
ू ू मं+ी और वत&मान Gवधायक हरनाथ थे, दसरे
ू एक
प+कार थे राम मनोहर और तीसरे सgजन यापार" ।
‘‘यार, इस दे श का Aया होगा ? '' हरनाथ ने नHो म) हांक
लगायी।
‘‘ होना जाना Aया है -जैसा चल रहा है , चलता रहे गा ! ''
यापार" ने बनया- बGw
ु दशा&यी।
‘‘ दे खो [यारे , इस दे श का भGवiय जनता के हाथ5 म) पण&
ू Uप
से सर|bत
ु है । लोकत+ सर|bत
ु है , अतः हम) Iचता क जUरत
नह"ं है । आप और मेरे-जैसे पढ़े -लखे गंवार5 से gयादा बGwमान
ु है
इस दे श का अनपढ़ मतदाता , जो सह" समय पर सह" कदम
उठाकर सरकार को चेतावनी दे दे ता है । ''
‘‘ तम
ु तो यार , भाषण दे ने लग ! नेता मS हंू या तम
ु हो ? ''
हरनाथ ने जोड़ा।
‘‘ दे खो हरनाथ, अगर सरकार) ऐसे ह" Iगरती रह"ं तो ;फर
मlयावIध चनाव
ु ह5गे और त#
ु हारा वापस मं+ी बनने का सपना
अधरा
ू रह जाएगा। अतः अगर कछ
ु कर सकते हो तो अभी कर
लो। कल का भरोसा मत कर5 ! '' राम मनोहर ने अपना nान
दशा&या।
‘‘ राजनीत और प+काCरता म) बहत ु अतर है ब^चे , ~फ

उठाने से छपाई नह"ं हो जाती। दे खो, अभी तो होटल-काTड भी चल
रहा है । मS दे श का पावरफल
ु एम.एल.ए. हंू , और इसी कारण
मX
ु यमं+ी ने भी धानमं+ी को कहा है ;क मझे
ु इस केस म) फंसा
,दया जाए। इधर रानाडे क नाव म) छे द होता जा रहा है ! ''
‘‘ तो तम
ु Aया कर रहे हो ? ''
‘‘ कUंगा, समय आने पर सब कछ
ु कUंगा ! अभी तो तुम नHो
को जमाने का इतजाम कराओ । ......''
तीन5 ने मलकर एक बोतल और पी, और ;फर चल पड़े ।
‘‘ दे खो, अगर केB से रानाडे हटते हS तो हम तीन5 ह"
नकसान
ु म) रहोगे। ''
‘‘ राम मनोहर, त#
ु हारे अखबार का कोटा मल गया ? ''
‘‘ कहां यार !''
‘‘ तो तुम कल रानाडे से , मेरा नाम लेकर मलो । और
दे खो, अपने अखबार म) होटल-काTड को आ<मह<या का मामला
लख दो। बाक मS दे ख लंग
ू ा। '' हरनाथ बोल।
एस.पी. वमा& के जीवन म) पहला मौका नह"ं था यह , जब
उपर के आदे श5 के अनसार
ु रपट को बदलना पड़ता है । वे ऐसे
काय म) मा,हर है और इसी कारण चीफ ने जान-बझकर
ू उह) इस
काम म) लगाया है ।
‘ दध
ू का दध
ू और पानी का पानी '- करने के लए वमा& ने
पर"
ू फाइल पढ़" और कल सबह
ु हे तु कछ
ु *बद ु नोट ;कए ।
‘ होटल के बाहर जो कार खड़ी थी, उसम) हरनाथ थे। उनके
बयान5 को नोट करना । '
‘ लड़क क पाटमाट& म-Cरपोट& पर एक डाAटर के हताbर
नह"ं - इसको चेक करना। '
‘ होटल के मैनेजर के बयान लेना। '
‘ कार का €ाइवर आज तक लापता है , Aय5 ? '
gय5-gय5 वमा&जी केस म) उतरते गए, <य5-<य5 उह) मजा
आने लगा-अगर इस बार चीफ और पी.एम. क नजर म) चढ़ जाउं
तो सब ठfक हो जाए ।
ले;कन रानाडे और हरनाथ क^चे `खलाड़ी नह"ं थे। दसरे

,दन एक सड़क-दघ&
ु टना म) एक टक ने एस.पी. वमा& क जीप को
कचल
ु ,दया। वमा& क म<ृ यु घटनाथल पर ह" हो गयी।
इस दघ&
ु टना पर सबसे पहला शोक-सदे श रानाडे का ह"
आया।
‘‘ Eी वमा& एक कत&य-परायण और जागUक अIधकार" थे।
उनके असामयक नधन से मझे
ु दख
ु हआ
ु है । परमा<मा उनक
आ<मा को शाित दे ! ''
अखबार5 ने राजधानी म) *बगड़ती हु ई कानन
ू और यवथा
पर ल#बे-चौड़े लेख सIच+ छापे। कछ
ु ने सरकार क नदा क।
आयंगार ने परा
ू दोष स#बिधत मं+ालय पर थोप ,दया जो पी.एम.
के पास था ।
पी.एम. इस अचानक वार से बौखला तो गए, ले;कन उह5ने
धैय& नह"ं खोया। वापस चीफ को बलाकर
ु ;कसी यिAत को लगाने
को कहा। इस बार इस बात का lयान रखा गया ;क बात खले

नह"ं , और गपचप
ु ु सब तय ;कया गया।
इस काय& से नपटकर पी.एम. अपनी टडी Uप म) आए।
आज उनका Iच<त अशात था। गीता उठाई और पढ़ने लगे।
अनाIEताः कम&फलं काय& कम& करोत यः।
स संयासी च योगी च न नरिनन&चा;eयः॥
मन नह"ं लगा, उह) याद आया-
ना दै यं न च पलायनम........

ु म) न तो द"नता ,दखाओ और न ह" पलायन करो। आज
-यw
उनक िथत भी ऐसी ह" हो रह" है, ले;कन वे द"नता नह"ं ,दखाना
चाहते। गीता से मन उचटा तो आज उह) रGव बाबू क-‘Iच<त जेथा
भय श
ू य ' ..... याद आयी, वे उसे ह" गनगनाने
ु ु लगे।
ले;कन कहां , आज न नभ&यता है और न याय । वे परे शान
हो उठे ।
अभी पर"
ू तरह सवेरा नह"ं हआु है । मौसम साफ है ।
उपाकाल"न काश चार5 तरफ फैलना शU ु ह" हआ
ु है । मद-मद
समीर बह रहा है । राजधानी म) ऐसी सबह
ु ) अIधक नह"ं आतीं ।
राव साहब आज ज_द" उठ लये। Gवशाल कोठf के हरे -भरे
लान म) वे एक खाद" क शाल डाले धीरे -ग#भीर चाल से टहल रहे
थे। उनके साथ उनके GवHवास-पा+ मदनजी चल रहे थे। Gपछले
,दन क पर"
ू राजनीतक गतGवIधय5 से राव साहब को अवगत
कराने क िज#मेदार" है मदनजी क , और उह5ने इस काय& म)
कभी कोई ढ़"ल नह"ं आने द"। राजधानी के ;कस कोने म) कब
कौन-;कतने एम.पी. के साथ ग[ु तगू कर रहा है , उनका अगला कदम
Aया होगा, और इस अगले क काट Aया होगी, तUप
ु का इAका कब
और कैसे चलना चा,हए। मदनजी ने राव साहब का साथ बरस5
नभाया है , नमक खाया है , और अपनी बात को सह" ढ़ं ग से तुत
करना ह।S एस.पी. वमा& क मौत को लेकर वे कह रहे थे-
‘‘ दे खो, अपने रानाडे ने ;कस सफाई से सब काम कर ,दया !
सांप भी मर गया और लाठf भी नह"ं टट"
ू । ''
‘‘ हां, इस बार वे सफल हो ह" गए ! ''
उस ,दन रानाडे के यहां मी,टंग म) तीन5 भतपव&
ू ू मX
ु यमं+ी
और कर"ब 100 एम.पी. थे, सभी मलकर नयी पाटY बनाने क बात
कर रहे थे।
‘‘ हंू .....'' राव साहब कछ
ु नह"ं बोले।
‘‘ तीन5 मX
ु यमं+ी तो रानाडे पर दबाव डाल रहे हS ;क वे भी
स<ता से अलग हो जाएं। ''
‘‘ तो कौन मना करता है ! ''
‘‘ ले;कन रानाडे नह"ं नकल) गे ! वे चाहते हS ;क सरकार को
Iगराकर ;फर अलग ह5 । ''
‘‘ जब जहाज डबता
ू है तो चहे
ू पहले भागते ह।S और Aया
समाचार है ? ''
GवHवेHवर दयाल ने भी अपने सम&थक5 क मी,टंग का
आयोजन ;कया है -
‘‘ ;कतने लोग थे ? ''
‘‘ राgयमं+ी सराणा
ु और मनसखानी
ु थे। ''
‘‘ हंू ''-राव साहब इस बार भी चप
ु रह) वे शात मन टहलने
लगे। मदनजी से रहा नह"ं जा रहा था। आज राव साहब क च[ु पी
उह) बहतु रहयमय लग रह" थी। पता नह"ं कब Aया हो जाए।
‘‘ अ^छा, अब तम
ु चलो ! '' उह5ने मदनजी को जाने का
इशारा ;कया। मदनजी के जाने के बाद उह5ने फोन कर
मनसखानी
ु और सराणा
ु को बलवाया
ु ।अपने चे#बर म) बैठ कर वे
मनसखानी
ु और राgयमं+ी सराणा
ु का इंतजार करने लगे। गह
ृ -
मं+ालय से उहोने इन मं*+य5 के `खलाफ क गयी जांच क
फाइल) भी मंगवा ल"ं। उह) ह" उलट-पलटकर दे ख रहे थे वे। दोन5
मं+ी आए। बैठे।
‘‘ कल आप GवHवेHवर दयाल के यहां मी,टंग म) थे ? ''
सराणा
ु हकलाने लगे। मनसुखानी का पानी उतर गया।
‘‘ जी , हां ......''
‘‘ तो Aया आप उनके साथ हS ? ''
‘‘ ऐसी तो कोई बात नह"ं । ''
‘‘ तो ;फर ? ''
‘‘ बात ऐसी है ;क सराणा
ु ने कटनीत
ू का सहारा लया- मझे

यह Gवभाग पसद नह"ं है । ''
‘‘ तो आपको मझसे
ु मलना चा,हए था। GवHवेHवर दयाल
इसम) Aया करगे ) ! ''
‘‘ ......................''
‘‘ खैर बोलो , Aया चाहते हो ? ''
‘‘ गह
ृ मं+ालय। '' सराण
ु ने सीधी बात क ।
राव साहब bण भर को `झझके ;फर उबल पड़े।
‘‘ त#
ु हारे काम तो ऐसे है ;क जेल भेजा जाए, और तम
ु गह

मं+ालय चाहते हो। ये दे खो त#
ु हार" फाइल) ! ''
‘‘ फाइल5 म) Aया रखा है , साहब ! मेसे साथ 60 एम.पी. ह।S
बोलए, Aया फैसला है ? '' राव साहब के चेहरे पर परे शानी के
Iचह उभर आए-‘‘ और मनसखानी
ु तम
ु Aया चाहते हो ? ''
‘‘ अपने को तो आप उKोग म) लगा द"िजए । ''
‘‘ हंू , अ^छा हो जाएगा ! ''
अगले ,दन समाचार-प+5 म) हे ड लाइन थी-
‘ केB"य मं*+मTडल म) फेर-बदल '
ृ Gवभाग सराणा
‘गह ु को। '
‘ उKोग मं+ालय म) मनसखानी
ु ....'
दे र रात को राƒपत ने आदे श साCरत कर इस फेर-बदल क पGd

कर द" ।

केB"य मं*+मTडल क Gवशेष बैठक चल रह" थी। कछ


ु राgय5
क Gवधान सभाओं और लोकसभा हे तु कछ
ु उपचनाव5
ु पर Gवचार
होना है ।
धानमं+ी राव साहब और रानाडे के समथ&क5 म) सीधी तथा
तीखी झड़प) होने क स#भावना को lयान म) रखते हए ु धानमं+ी
ने ये मी,टंग बला
ु ई है । उह5ने अपने ारि#भक भाषण म) , दे श म)
या[त अकाल और बाढ़ क ओर अपने साIथय5 का lयान खींचा।
बढ़ती मंहगाई, लटपाट
ू , आगजनी, ह<याएं,बला<कार, आरbण के पb
और Gवपb म) दे श के हर कोने म) रोज होनेवाले आदोलन, Gवदे श5
म) दे श क Iगरती हु ई तDा, बढ़ती मBा
ु फत आ,द सभ Hन5
को *बना लाग-लपेट के उह5ने कहा।
मल
ू Hन पर आते हएु उह5ने नकट भGवiय म) राgय
Gवधान-सभाओं के चनाव
ु क बागडोर अपने GवHवत अनचर

मदनजी को स=पने का तय ;कया और लोकसभा उनचनाव5
ु क
बागडोर रानाडे को स=पी ।
रानाडे कहां मानने वाले थे -
‘‘ अगर Gवधान-सभा चनाव5
ु म) उ#मीदवार5 का चयन सह"
नह"ं हआ
ु तो उसका भाव लोकसभा पर भी पड़ेगा, स<ताधार" पb
हार जाएगा ! ''
‘‘ दे खा, सभी काय& एक साथ एक आदमी नह"ं कर सकता।
स<ता का GवकेB"करण आवHयक है ! '' राव साहब रानाडे के इस
वार को झेल गए।
आप और मS , यहां ,द_ल" म) बैठकर दे श के आतCरक
मामल5 पर Gवचार तो कर सकते है , ले;कन गांव5, झ5पuडय5 और
ढा`णय5 म) Aया हो रहा है - यह जानना भी आवHयक है । और इस
बार उ#मीदवार5 का चयन ता_लुका, तहसील और पंचायत5 के
आधार पर होगा। ''
इस बार रानाडे ;फर उलझ पड़े-
‘‘ तो ;फर आप ये चनाव
ु नह"ं जीत पाएंगे । ''
‘‘ चनाव
ु ढा`णय5 म) नह"ं, मैदान5 म) लड़े और जीते जाते ह।S ''
म
ु कराते हएु राव साहब के चेहरे पर शकन तक नह"ं आयी,
उह5ने वैसे ह" हए
ु कहा-
‘‘ जैसे भी हो , हम) स<ताधार" पb क लाज बचानी है ।
‘‘ स<ता क Bौपद" पर सभी , कौरव और पाTडव एक होकर
लगे हएु है । '' रानाडे ;फर फफकारे
ु ।
‘‘आपने Gपछले मास ह" हमारे गट ु के मX
ु यमं*+य5 को गaद"
से उतार ,दया। ''
‘‘ कोई ;कसी को नह"ं उतारता भाई ! सब कम… का फल है ।
अगर उन लोग5 को जाना था तो वे गए ! '' राव साहब अभी भी
शात ह" थे ।
‘‘ नह"ं ! आपने जान-बझकर
ू मेरा पb कमजोर ;कया है । आप
Aया मझे
ु ब^चा समझते हS ! '' रानाडे ;फर गरा&
ु ये ।
‘‘ दे खो रानाडे ''- अब उनके के चेहरे पर eोध क एक ह_क-
सी झायी , ‘‘Aया मS नह"ं जानता ;क एस.पी.वमा& क म<ृ यु कैसे हुई
या होटल- काTड म) कौन लोग दोषी हS ! ''
‘‘ अगर आप जानते हS तो काय&वाह" किजए। हम कब मना
करते हS ! '' इधर रानाडे के समथ&क5 ने हो-ह_ला मचाना शU
ु कर
,दया।
मी,टंग अधर"
ू छोड़नी पड़ी।
कछ
ु समय बाद उ#मीदवार5 के चयन पर ;फर बहस हुई। इस
बार पी.एम. के उ#मीदवार खड़े हए
ु , वहां रानाडे ने ,दगज5 को खड़ा
करने क सफाCरश क। जहां रानाडे के उ#मीदवार थे, वहां
पी.एम.ने ,दगज लोग5 को खड़ा ;कया।
Gपछले चनाव5
ु म) Gवरोधी दल के नेता के Uप म) रामावामी
जीतकर आ गए थे, ले;कन इनके अIधकांश सहयोगी इस चनाव
ु क
वैतरणी को पार नह"ं कर सके, और वे सभी अपने bे+5 म) ेत-
काया बन Gवचरण करने लगे।
रामावामी वैसे तो मBास के हS, ले;कन ,हद" ठfक-ठाक
बोलने लगे हS, इसी कारण अपने आपको राƒीय तर का नेता
मानने लगे। जोड़-तोड़ करके उहोने ,द_ल" म) अपने खास लोग5
को खास ओहदे ,दला ,दए। वैसे भी सIचवालय पर अं†ेजी का
आIधप<य होने के कारण रामावामी को कभी कोई ,दAकत नह"ं
आयी। नाथ& ऐवेयू के छोटे ‡लैट को छोड़कर रामावामी के*बनेट
दजs क एक कोठf को सशोभत
ु करने लगे ।
कई Gवरोधी दल5 म) से एम.पी.को तोड़-ताड़कर उह5ने अपनी
शिAत का Gवतार कर लया। गहरे काले रं ग का चHमा और उसी
रं ग के सट
ू म) जब वे लोकसभा म) Gवपb क ओर से सरकार क
ब`खया उधेड़ना शU
ु करते, तो कनD मं+ी सदन का भार झेलने म)
असमथ& रहते। अIधकांश मं+ी इस काल म) सदन से बाहर चले
जाते। आंकड़5, तˆय5 और घटनाओं का पैना GवHलेषण करने म)
कशल
ु रामावामी सभी मं+ालय5 के ;eयाकलाप पर तीखे हार
करते। अAसर राव साहब वयं उनक िजnासाओं को शात करते
और रामावामी च[ु पी साध जाते। सांयकाल राव साहब उनको
कोठf पर बलाते
ु , बतयाते, साव&जनक मसल5 पर ग#भीर मं+णाओं
का जाल रचते, और अत म) रामावामी कछ
ु समय के लए Gवदे श
चले जाते या अपने भतीजे-भानजे के नाम पर ;कसी नयी फैAटर"
का लाइसेस लेकर आते।
इन ,दन5 भी िथत *बगड़ रह" थी। रामावामी होटल-काTड
और राजधानी म) या[त ,हंसा और मारपीट क घटनाओं पर बहस
क मांग कर रहे थे। Gवपb के सदय उनके समथ&न म) थे। ले;कन
स<ताधार" पb और Gवशेषकर रानाडे के साथी इसका Gवरोध कर
रहे थे। अगर बहस हो तो सब गड़
ु -गोबर होने का अंदेशा था।
रामावामी ने वमा& क रहयमय म<ृ यु क जांच क मांग
क।
स<ताधार" पb इसे भी नकारना चाहता था। ले;कन बहस का
स+
ू राव साहब ने अपने हाथ म) ले लया-
‘‘ मझे
ु अफसोस है ;क एक क<त&य-परायण और ईमानदार
अफसर का ऐसा दखद ु अत हआ। ु हमने केस सी.बी.आई.के वCरD
अIधकार" को दे ,दया है । Cरपोट& आने पर सदन को इसक सचना

दे द" जाएगी, और अगर आवHयक हआ
ु तो दोषी यिAतय5 पर
मकदमे
ु चलाये जाएंगे। ''
‘‘ ले;कन Aया वमा& होटल-काTड क जांच करने के कारण मारे
गए ? ''
‘‘ नह"ं, इस केस का होटल-काTड से स#बध जोड़ना उIचत
नह"ं होगा। '' -रानाडे के एक समथ&क बीच म) ह" बोल पड़े।
राव साहब ने उह) इशारे से मना ;कया और कहने लगे-
‘‘ जब तक जांच क Cरपोट& नह"ं आ जाती, हम) ;कसी कार
क अटकलबाजी नह"ं करनी चा,हए। हम) Cरपोट& आने तक इतजार
करना ह" पड़ेगा ! '' रामावामी इस बार कछ
ु न कह सके। उनके
साथी भी च[ु पी लगा गए। बहस अधर"
ू , हवा म) लटक गयी।
आज असs बाद रामावामी को रानाडे का फोन मला। ;कसी
ग[ु त मं+णा हे तु।
सायंकाल के भोजन पर रानाडे और रामावामी साथ-साथ थे।
रानाडे उह) अपनी योजना समझा रहे थे-
‘‘ दे श क िथत *बगड़ रह" है । घेराव, हड़ताल, तोड़फोड़,
अराजकता क िथत है । ''
‘‘ चार5 तरफ अजीब माहौल हो गया है । लगता है , कानन
ू और
यवथा नाम क कोई चीज ह" नह"ं है ! हर रोज अखबार5 म) ऐसे
समाचार आते हS ;क बस मत पछो
ू ! ''
‘‘ GवHवGवKालय बंद है । मनाफा
ु खोर, तकर स;eय ह।S GवKाथp
आंदोलन कर रहे ह।S
‘‘ ;कसान रै लयां नकाल रहे ह।S मजदर5
ू ने कारखान5 म) काम
करना बद कर ,दया है । सैकड़5 मल5 म) तालाबद" है .....''
‘‘ हालात द|bण म) भी खराब है ..... रामावामी ने कहा- ‘‘
तेलंगाना Gववाद तो कह"ं भाषा क लड़ाई । ''
‘‘ ऐसी िथत म) य,द हम मल जाएं तो राव साहब का
प<ता काट सकते ह।S''
‘‘ सो कैसे ? ''-रामावामी क आंख5 म) चमक आयी। दे खो,
मेरे सौ एम.पी.हS, त#
ु हारे पास पचास-साठ है ; अगर अपन मलकर
नयी पाटY क धोषणा कर दे तो यह अ_पमत क सरकार हो
जायगी- Iगरे गी और राƒपत आपको बलाएं
ु गे। आप सरकार बना
लेना। '' रानाडे क,टलता
ु से म
ु कराया। रामावामी इस दाव को
समझ नह"ं पाये। ले;कन धानमं+ी क कसp
ु का सपना उह5ने
अवHय दे खा था। अगर यह सब स#भव हो तो Aया कहने ! उह5ने
बात को तोलने क गरज से पछा
ू -
‘‘ आपका Aया होगा ? ''
‘ अरे भाई, हम तो त#
ु हारे सहारे पड़े रहगे
) । अब मेर" पटर"
राव साहब से नह"ं बैठ सकती। इस कारण कह रहा हंू । ''
‘‘ कछ
ु कर गजरे
ु ! हम एक Gवशाल रै ल" का आयोजन कर रहे
ह।S दस लाख लोग आएंगे ; तम
ु चाहो तो उसी रै ल" म) घोषणा कर
दो। ''
‘‘ नह"ं ! इतना ज_द" तो स#भव नह"ं होगा ; मझे
ु म+5 से भी
पछना
ू होगा । ''
‘‘ खैर, बाद म) बता दे ना। ''
दोन5 म
ु कराते हए
ु बाहर आये। रामावामी कार म) बैठे और
चल ,दए।
रानाडे बेडUम म) गए। गोल" खायी, सIचव को मस
मनसखानी
ु को भेजने को कहा और सो रहे ।

लोकसभा के उपचनाव
ु नकट से नकटतर आ रहे थे।
स<ताधार" पb म) नरतर बढ़ती फट
ू , गट5
ु क राजनीत और
सबसे उपर राव साहब क कम होती शिAत । रानाडे ल#बे समय
से ऐसे ह" ;कसी मौके क तलाश म) थे। अभी नह"ं ◌ंतो ;फर कभी
नह"ं ! वे इस अवसर का भरपरू फायदा उठाना चाहते थे।
अपने GवHवत सहयोIगय5- रामेHवर दयाल, सेठ रामलाल और
कछ
ु अय नेताओं को लेकर वे GवEाम हे तु राजधानी के पास के
पय&टक-थल म) भमगत
ू हो गए। Gवचार-Gवमश& चलने लगा।
‘‘ शायद अब यह सरकार gयादा समय नह"ं चलेगी। '' -
रामेHवर दयाल बोल पड़े।
‘‘ सवाल सरकार के चलने या Uकने का नह"ं है , सवाल हम
सबको साम,ू हक ,हत का है । ''
‘‘ सेठजी, सनाइए
ु आपका काम कैसा चल रहा है ? ''
‘‘ आपक कपा
ृ है , साहब ! जब से Gपछला लाइसेस मला है ,
मS बहत
ु यत हो गया हंू । पड़ोसी राgय म) एक बड़ा उKोग
अमर"क तकनीक सहायता से लगाने वाला हंू । अभी कल ह"
अमेCरक डेल"गेशन को साइट ,दखाई थी। ''
‘‘ तो अड़चन Aया है ? ''
‘‘ हजर
ु ू , थानीय सरकार जमीन का मआवजा
ु बहत
ु gयादा
मांग रह" है । कछु असामािजक त<व5 ने थानीय नवासय5 को
उ_टा-सीधा सखा ,दया है । वे लोग आदोलन पर उताU ह।S ''
‘‘ हंू ......। '' रानाडे ने खामोशी साध ल"। कछ
ु समय बाद बोले-
‘‘ तमने
ु पहले Aय5 नह"ं बताया ? सेeेटर", जरा मX
ु यमं+ी को
फोन करके पछो।
ू ''
‘‘ हां सर, सी.एम.ने कहा है - वे आज रात को राजधानी ह" आ
रहे हS, वह"ं बात हो जाएगी। ''
सेठजी, आप पाटY-फTड म) दस लाख Uपये द"िजए ; इसके
एवज म) सरकार आपक क#पनी के चाल"स तशत Hोयर तथा
उ<पा,दत माल का पचास तशत भाग खर"दे गी। इस आशय का
समझौता उKोग मं+ी से मलकर कर ल) । ''
‘‘ जी, ठfक है ......''
‘‘ और सनो
ु ''- रानाडे ने कहा, ‘‘ राजधानी म) जाकर यह
समाचार साCरत कराओ ;क कछ
ु Gवशेष कारण5 से रानाडे यहां आ
गए हS, और शी{ ह" नया गल
ु `खलने वाला है । ''
‘‘ अभी मS आयंगार को फोन करके यह काम करा दे ता हंू । ''
इधर राजधानी म) रानाडे के समथ&क5 और राव साहब के बीच
तेज-तरा&र वाता&एं हुई। राव साहब परे शान हो गए- Aया कर) , कछ

समझ म) नह"ं आता।
मदनजी और कछ
ु अय वCरD GवHवासपा+ मि+य5 के साथ
वे अपने काया&लय म) बैठे ह।S
‘‘ Aया कर) ? रानाडे Uठकर कोप-भवन म) बैठे ह।S ''
‘‘ इधर संसद का स+ शी{ होने वाला है । ''
‘‘ उपचनाव
ु भी नजद"क ह।S ''
‘‘ ऐसे नाजक
ु मौके पर रानाडे का यह यवहार ठfक नह"ं है ;
ले;कन Aया कर।)''
‘‘ दल क ओर से अनशासना<
ु मक काय&वाह" क जाए '' - मदन
जी के इस सझाव
ु पर कोई सहमत नह"ं हआ।
ु अनशासना<
ु मक
काय&वाह" का मतलब दल का Gवघटन। दल का Gवघटन याने
स<ता^युत होना ! गांधी, नेहU के अनयायी
ु स<ता कैसे छोड़ सकते
थे।
अतः यह तय हआ
ु ;क मदनजी और एक वCरD मं+ी पय&टक
GवEाम-थल तक जाएं और रानाडे से बात कर) ।
मदनजी को आते दे खकर रानाडे समझ गये, जUर कोई GवHेप
समाचार या संIध-संदेश लेकर आये ह।S रानाडे को मदनजी ने
समझाना शU
ु ;कया-
‘‘ दल का Gवघटन रोका जाना चा,हए। गांधी क समाIध पर
ल" गयी शपथ को याद करो, कदमकआं
ु के संत को याद करो ; यह
समय ऐसा नह"ं है । उपचनाव
ु , संसद -स+ सर पर है । .....''
‘‘ ले;कन हम भी कब तक झक
ु े रह) गे। राव साहब तो अड़ गये
हS- ये नह"ं होगा, वो नह"ं होगा। तम
ु चले जाओ। रानाडे यह सब
सनने
ु का आद" नह"ं है । ''
‘‘ ठfक है , भाई ''- मदनजी ;फर भी शात रहे , ‘‘ हम) मल-
बैठकर कछ
ु तो हल नकालना ह" होगा। पहले सराणा
ु और
मनसखानी
ु अड़ गये, अब तम।
ु सरकार है या कोई पराना
ु टक, जो
जब चाहे , जहां चाहे Uक जाए ! ''
‘‘ आ`खर इस सबम) आप हमसे Aया चाहते हS ? ''
अब मदनजी सीधी सौदे बाजी पर आ गये। राव साहब ने उह)
इस काय& हे तु अIधकत
ृ भी ;कया था।
‘‘ चलये, आप उप-धानमं+ी हो जाइये ! ''
‘‘ Aया यह ताव राव साहब का है ? ''
‘‘ आप ऐसा ह" सम`झये। राव साहब को मनाने क
िज#मेदार" मेर" ! ''
‘‘ और वह होटल-काTड ? ''
‘‘ चलये, उस पर भी धल
ू डालते ह।S ''
‘‘ और कछ
ु ? ''
टे लफोन पर यह समाचार राव साहब को ,दया गया। रानाडे
राजधानी वापस आये।
राƒपत भवन से रानाडे को उप-धानमं+ी बनाये जाने क
Gवnि[त जार" क गयी। अतम&न म) राव साहब इस सौदे बाजी से
सखी
ु नह"ं थे। स<ता के ताबत
ू म) सफ& कछ
ु कल) और ठक
ु गयीं।
रानाडे - समथ&क नये जोश-खरोश के साथ अपने पांव मजबत

करने लगे। हरनाथ, सेठरामलाल, शश, एस.संह - सभी खश
ु थे।
उस ,दन रानाडे क कोठf पर खशयां
ु मनायी गयीं। और
राजधानी के गंवार दे खते रह गये ।

अभी सबह
ु हु ई है । सरू ज ने धप
ू के कछु टकड़े
ु राव साहब क
`खड़क से अदर फक ) े । राव साहब को बराु लगा- यह ,ह#मत
;कसने क है । जब आंख) पर"
ू खल"ं
ु , खमार"
ु कम हु ई तो धप
ू को
दे खकर च[ु पी साध गये। समझ गये, इस धपू का वे कछु नह"ं
*बगाड़ सकते।
ातः काल"न अखबार, जUर" CरपोटŠ उनके पास पहंु चायी गयीं।
चाय क चि
ु कय5 के साथ उह5ने पारायण शU
ु ;कया। उह) समझ
म) नह"ं आ रहा था, ये सब Aया हो रहा है ? उह) रानाडे को
उपधानमं+ी बनाना पड़ा। सराणा
ु और मनसखानी
ु को वCरD
Gवभाग दे ने पड़े। ऐसा Aय5 और कब तक ? .....
आ`खर Aय5 ? Aया वे इतने शिAतह"न हो गये ? राgय5 म)
सरकार) Iगराई जा रह" ह।S दल म) ;कसी भी समय Gवभाजन हो
सकता है । तमाम यास5 के बावजद
ू वे शायद दल"य Gवघटन को
नह"ं रोक सकगे
) । .........
दे श5 म) अकाल और भख
ू से लोग5 के मरने के समाचार ह।S
खद
ु उके ह" bे+ म) लगभग 100 लोग भख
ू से मर गये। एक
Gवदे शी समाचार-एजेसी के अनसार
ु , आ,दवासय5 म) और gयादा
लोग5 के मरने के समाचार ह।S
Gवदे श5 से लगातार दबाव आ रहा है , Gवदे श5 से आयातत
सामान नरतर कम आ रहा है । पे‹ोलयम और क^चा तेल
नया&तक दे श5 क सरकार5 के दबाव के कारण केB"य सरकार और
राव साहब परे शान ह।S
इधर GवKाIथ&य5 ने दे शयापी आदोलन छे ड़ ,दया-‘‘ uड†ी
नह"ं, रोजगार चा,हए। ''
‘‘ नारे नह"ं, रोट" चा,हए। ''
कछ
ु Gवरोधी दल5 के नेता भी इन छा+5 के साथ थे।
रामावामी ने तो खलकर
ु इन छा+5 का साथ दे ना शU
ु कर ,दया।
GवHवGवKालय5 म) घनौनी राजनीत के कारण कलपतय5
ु ने
इतीफा दे ,दया। कछ
ु GवHवGवKालय5 को परेू स+ के लए बद
करना पड़ा।
छा+5 और यवा
ु वग& के लोग5 क बन आयी। पलस
ु -आदोलन
के कारण पलस
ु से सरकार और जनता दोन5 का भरोसा उठ गया।
अब हर काम म) लोग छा+5 क मदद लेत।े राशन नह"ं मला-
छा+5 ने िजलाधीश को घेर लया। ऐसी घटनाएं आम हो गयीं। राह
चलते डाके, नकबजनी, बला<कार आ,द क घटनाएं होने लगीं।
odाचार तेजी से पनपने लगा। इससे ew
ु होकर छा+5 और यवा

संगठन5 ने od यिAतय5 का सर मT
ु डा कर नागCरक अभनदन
करना Hा◌ुU ;कया। ऐसा लगता ह" नह"ं ;क कानन
ू और यवथा
नाम क कोई चीज है ।
समाज म) तरह-तरह के तGDत और नैतक mGd से उ^च
वग& के लोग5 ने अपने संगठन बनाने शU
ु कर ,दये।
अगर कह"ं छा+5 और यवा
ु वग& पर लाठf चाज&, अEगै
ु स ये
गाल"-हार होता तो साम,हक
ू नदा होने लगी। सरकार क
भ<स&ना क जाने लगी।
राव साहब सोच-सोचकर परे शान होने लगे। पसीने को प5छा,
कूलर आन ;कया और पसर गये।
अजीब िथत हो गयी थी। एक odाचार" को राgयतर"य
पर
ु कार और एक ह<यारे को अलंकरण दे ,दया गया। इस बात को
लेकर बड़ा बखेड़ा मचाया गया। बGw
ु जीGवय5 , लेखक5, कलाकार5 ने
नराश होकर सरकार का साथ छोड़ने क ठानी। मगर इस सरकार
से वे भी कछ
ु करा सकने म) असमथ& रहे ।
सरकार" तौर पर रोज घोषणा होती-‘िथत सामाय है '-‘सब
कछ
ु ठfक है '- ‘महगाई पर काबू पा लया जायगा '-‘ गर"बी दस वष&
म) और बेरोजगार" बीस वष& म) मटा द" जाएगी। ' ले;कन
आHवासन5 क सरकार लड़खड़ाने लगी। पैबद लगे कपड़े क तरह
अब सरकार ,दखाई दे ने लगी थी।
राव साहब ने चार5 तरफ दे खा- कह"ं से कोई काश क ;करण
नह"ं आ रह" है । वे भी Aया कर) ! स<ता है तो उसे भोग।)
अपने साIथय5 के साथ Gवचार-Gवमश& करने पर भी वे ;कसी
नiकष& पर नह"ं पहंु च पाते। एक GवHवGवKालय ने एक सजाया‡ता
यिAत को डी. लh. दे द" - सन ु -सनकर
ु राव साहब क परे शानयां
और gयादा बढ़ती। सभी राजरोग उह) वैसे भी परे शान रखते ।
कई बार सोचते-अब सब छोड़ द) ; ले;कन इतना आसान है
Aया छोड़ना !
ये स<ता, ये मद, ये आनद ;फर कहां ! खाओ और खाने दो '
क राजनीत म) भी वे Gपछड़ रहे थे।
रोज कोई-न-कोई नया सरदद& उनक जान को लगा रहता।
कल ह" Gवरोधी दल के नेता रामावामी के नेत<ृ व म) छा+5 ने
दश&न ;कया। उह5ने राƒपत को nापन ,दया-
‘‘संसद सदय Aया कर रहे हS ? ''
‘‘ हम) सफेद हाथी नह"ं, सेवक चा,हए। ''
अपने bे+ म) राव साहब काफ समय से नह"ं जा पाये थे,
इसलए GवरोIधय5 ने पोटर बंटवाये थे। एक पोटर पर लखा था-
‘‘ इस bे+ के एम.पी. Gपछले 4 वष… से लापता ह।S रं ग गेहुं आ,
उM 75 वष& , सफेद कपड़े और टोपी लगाते हS, ल#बाई 5 फट 8
इंच, मधमे
ु ह और रAतचाप के रोगी ह।S लानेवाले या पता बताने
वाले को उIचत इनाम ,दया जाएगा।
- जनता ''
इस पोटर को पढ़कर राव साहब के आग लग गयी ; ले;कन
Aया कर सकते थे ! खून का घंूट पीकर रह गये।
‘‘ एक वोट Aया दे ,दया, मझे
ु अपने बाप का नौकर समझते
हS, साले ! ''
‘‘ और भी तो कई काम ह।S ''
‘‘ यहां Gवदे शी डेल"गेशन5 से मलंू या पाटY-संगठन स#भालंू,
या bे+ म) मर रह" जनता से मलंू। एक बार हे ल"का[टर से दे ख
आया। और Aया कर सकता हंू ! मरने वाल5 के साथ तो मरा नह"ं
जा सकता ! ओर ;फर अमर कौन है ? आज नह"ं तो कल, सभी
मरगे
) ! मेरे राgय म) नह"ं तो ;कसी ओर के राgय म) मरगे
) । ;फर
दखी
ु होकर भी Aया होगा ? ले;कन नह"ं, फेटे -साफेवाले मोट" बGw

के छोटे लोग5 क समझ म) ये सब बात) कहां आती हS ! झट से
पोटर छापा और Iचपका ,दया ! अरे उस bे+ म)
बांध,नहर,*बजल",सड़क ;कसने लगवाई ? सब भल
ू गये ! ''
‘‘ हंू ..........''
उनका आ<मालाप भंग हआ ु , सIचव ने आकर कहा-
‘‘ सर, इरानी डेल"गेशन के आने का समय हो गया है ......''
‘‘ अ^छा, उह) बाहर *बठाओ, मS अभी आता हंू । ''
इरानी डेल"गेशन से बात कर उह5ने कछ
ु Gवदे शी
संवाददाताओं को इटरयू ,दया।
इस काय& से नपटकर राव साहब ने कछ
ु मख
ु Gवरोधी
नेताओं, कछ
ु Gवरोधी मं*+य5 क सची
ू बनाई और इटे ल"जेस
Gवभाग को इन लोग5 क फाइल) तैयार करने को कहा।
‘‘ हर ग[ु तचर के पीछे एक और ग[ु तचर लगा दो, ता;क रपट
साफ और स^ची आए। ''
राव साहब अब कछु संतोष से आराम करने लगे।
7
वामी असरान
ु द के आEम को राजधानी म) लाने और
जमाने म) रानाडे का Gवशेष योगदान रहा है । एक ातीय कबे म)
रानाडे साधारण काय&कता& थे, और असरान
ु द ने नयी-नयी अपनी
दकान
ु लगाई थी। ले;कन अजीब Gवलbण यिAत<व था वामी
असरान
ु द का, ल#बा-छरहरा यिAत<व, Gवशाल भजाएं
ु , उनत
ललाट और भार" शोि◌Tात नयन। उपर से ल#बी केशराश और
दाढ़"। दरू से ह" ;कसी सw पUष
ु का oम हो जाता। और इस oम
को उनक वाक् पटता
ु बनाए रखती। रानाडे को उह5ने अपनी
तकड़म से Gवधानसभा का ,टकट ,दला ,दया, Gवपb म) जान-
बझकर
ू एक कमजोर उ#मीदवार खड़ा ;कया गया। रानाडे का
Gवतार मX
ु यमं+ी और राgयपाल तक कर लया। यदा-कदा वे
लोग उनके आEम म) पधारते और आEम तथा वहां क बालाओं
को कताथ&
ृ करते। अपने बढ़ते भाव के कारण ह" वामी
असरान
ु द ने रानाडे को तीन वष… म) ह" उपमं+ी बनवा ,दया।
समय का चe चलता रहा। असरान
ु द और रानाडे क म+ता
बढ़ती गयी। रानाडे ने अपने Gवभाग क ओर से आEम हे तु योग
क कbाएं खलवा
ु ई। योग सीखने हे तु <येक िजले म) योग-केB
थाGपत कराये ।इन केB5 का ातीय संचालक वामी असरान
ु द
को बनाया गया।
धीरे -धीरे रानाडे ने असरान
ु द क और असरान
ु द ने रानाडे
क मह<ता को वीकार कर लया, और एक उपचनाव
ु क गाड़ी म)
बैठाकर रानाडे को असरान
ु द राजधानी पहंु चा आए।
लगे हाथ वे भी राजधानी आ गए। दे र सवेर यह"ं आना था।
अब असरान
ु द ने अपने परेू पंख पसारे और घेरे म)
धानमं+ी, Gवदे शी राजदत5
ू और अय संथाओं को लया।
राजधानी म) Gवदे श से जो भी ‘आता, उसे भारतीय दश&न, योग
और स#बिधत ;eयाओं हे तु असरान
ु द का आEम ,दखाया जाता।
आEम क छटा ह" नराल" होती। सव&+ हर" दब
ू , कत
ृ क
शुw हवा, वातानकलत
ु ू कमरे और योय आंल भाषा वीणाएं, जो
दे शी-Gवदे शी साहब5 को मोह लेतीं। असरान
ु द ने आEम के लए
एक बड़ी *बि_डंग खड़ी कर ल" ; सरकार", गैर-सरकार" और Gवदे शी
पैसा ले लया और अ^छf तरह से जम गए।
अपने भाव से वामी असरान
ु द ने शी{ ह" रानाडे को मं+ी
बनवा ,दया। रानाडे ने संसद म) अAसर आEम पर होनेवाल" बहस5
और चचा&ओं के अवसर पर वामीजी को बचाया है ।
रा*+ के आठ बजे ह।S रानाडे ने अपनी कार का मंुह वामीजी
के आEम क ओर ;कया।
उनक कार को आता दे ख -ारपाल अदब से हटा। एक बाला
ने तेजी से आगे बढ़कर कार का दरवाजा खोला और रानाडे को
बाहर नकलने म) मदद द"। एक अय बाला ने अदर जाकर
वामीजी को lयानावथा म) ह" सIचत
ु ;कया। वामीजी ने lयान
भंग कर उह) भीतर ह" लाने को कहा। रानाडे कई गलयारे , छोटे -
बड़े कमरे पार करके एक बड़े हाल म) दा`खल हए। ु वहां से एक
छोटे , वातानकलत
ु ू , साउं डफ
ू कमरे म) गए। वामीजी ने वागत
;कया-
‘‘ बधाई ! वागत !! अब तो आप उपधानमं+ी हो। ''
रानाडे ने चरण पश& कर कतnता
ृ nाGपत क-
‘‘ सब आपका आशीवा&द है , भू ! .... आपक सलाह से ह" सब
कछ
ु स#पन हआ ु है । ''
‘‘ वो तो ठfक है, ले;कन अब आगे Aया ो†ाम है ? ''
‘‘आप सझाइये
ु ! हम तो अनयायी
ु ह।S ''
‘‘ अब तम
ु शिAत और संगठन का पनग&
ु ठन करो ता;क यथा
समय तम
ु अंतम सीढ़" चढ़ सको। '' वामी बोले, ‘‘याद रखो रानाडे,
स<ता केवल ताकत से आती है । गीता म) भगवान कiण
ृ ने ,
रामायण म) राम ने, सभी ने स<ता को बाहबल
ु से ह" माना है । ''
‘‘ जी हां......''
‘‘ अ^छा बोलो, Aया लोगे ? आज बहतु ,दन5 बाद तम
ु आए
हो, त#
ु हारा वागत तो होना ह" चा,हए ? ''
‘‘ कछ
ु भी चलेगा- Gवदे शी शराब और स
ु दर"। '' रानाडे बोले।
‘‘ वो तो खैर है ह" ! हम त#
ु हार" आदत) जानते ह।S '' और
वामी तथा रानाडे ने सि#मलत ठहाका लगाया।
‘‘ इस बार Gवदे श से शानदार xलू ;फ_म आई है ; कहो तो
,दखाएं। ''
‘‘ नेक और पछ ू ? अवHय ? वामीजी ने एक बटन
ू -पछ
दबाया और पदs पर ;फ_म चलने लगी। आठ मल"मीटर क ;फ_म
के mHय5 को दे खकर रानाडे क त*बयत खश
ु हो गयी। ;फ_म क
समाि[त पर रानाडे बोले-
‘‘हां, Gवपb के नेता रामावामी यहां आए थे ? ''
‘‘ Gपछले शनवार रात यह"ं Uके, ओर जैसा तमने
ु कहा था,
उनके फोटो ;फ_म वगैरा बनवा लये ह।S कहो तो ,दखाएं ! ''
‘‘ नह"ं, ;फर कभी दे ख ल) गे। ''
‘‘ हां भाई, वह अनदान
ु क रकम अभी तक नह"ं मल" । ''
‘‘ ;कतनी थी ? ''
‘‘ पचास लाख। ''
‘‘ ठfक है , मS कल ह" स#बिधत Gवभाग को आदे श दे दं ग
ू ा।
वैसे भी Gव<त-वष& समाि[त पर है । ''
‘‘ अ^छा तो ;फर तय रहा ! '' वामीजी म
ु कराये, ‘‘ तम
ु कमरा
नं.12 म) आराम करो। वहां सब यवथा हो जाएगी। ''
रानाडे चल पड़े।
जब से रामावामी को अनचर5
ु ने यह बताया ;क वामी
असरान
ु द ने उनके भी फोटो ा[त कर लये हS, तब से वे कसमसा
रहे थे ; ले;कन कर) Aया ? एक दो बार वामी से फोन पर बात
करने क कोशश क तो वामी असरान
ु द मले नह"ं ।
रामावामी ;कसी मौके क तलाश म) थे, ता;क आEम और
असरान
ु द के `खलाफ बवंडर फैलाया जा सके।
अचानक आज उसे एक आइuडया सझा।
ू उसने कु . बाला को
इस कायर हे तु तैयार कर लया, और एक ेस-काफरस
) म) वामी
असरान
ु द -ारा बाला से ;कये गए कIथत बला<कार क एक
का_पनक कहानी गढ़कर सना
ु द"।
दसरे
ू ,दन रानाडे के Gवपbी अखबार5 ने नमक-मच& लगाकर
बाला और वामी तथा आEम के Gववरण फोटो स,हत छापे। कछ

अखबार5 ने राजधानी म) या[त सेAस के यापार पर स#पादकय
भी लख ,दए। वातव म) बाला कछ
ु समय तक आEम म) काम
भी कर चक
ु थी। अतः घटना को स<य बनते gयादा दे र नह"ं
लगी।
रानाडे इस आbेप से बौखला गये। ले;कन वामी असरान
ु द
वैसे ह" शात रहे , उह) कोई दःख
ु या लान नह"ं हुई। शात मन
से उह5ने अपने lयान-कb म) lयान का आयोजन ;कया।
ल#बे समय तक वे समाIधथ रहे । आEम का काय& उह5ने
यथावत ् चालू रखा। पलस
ु और ेस को उह5ने सभी कार का
सहयोग ,दया ; ले;कन पलस
ु कोई सराग
ु नह"ं पा सक, लौट गयी।
आEम म) जो कछ
ु भी अनIचत
ु था, सभी रात को ह" हटा ,दया
गया था। इस कारण वामी निHचत थे।
शाम हुई, रात हुई। आEम म) आज उदासी अवHय थी, ले;कन
काय& सब चल रहे थे।
वीरानी के इस माहौल म) वामी असरान
ु द ने अपने कछ

अनचर5
ु को गोपनीय आदे श ,दए। दसरे
ू ,दन अखबार5 म) स`ख&
ु यां
थीं-
‘रामावामी क कोठf के बाहर बाला क रहयपण&
ू म<ृ यु। '
‘ म<ृ यु से पव&
ू बाला ने असरान
ु द को नदष सा*बत कर
,दया था। '
रामावामी इस घटना से बेहोश-से हो गए। आEम और
वामी असरान
ु द पव&
ू वत ् जमे रहे ।

राजधानी म) राजनीतक गतGवIधयां तेजी से चल रह" थीं।


अपने-अपने खेम5 म) , अपने-अपने गट5
ु म) सभी अपने-अपने ढं ग से
शतरं ज क चाल) खेल रहे थे। आज शतरं ज के [यादे भी अपनी
शान ,दखा रहे थे। जब से रानाडे उप-धानमं+ी बन गये, उनक ह"
स<ताधार" पाटY का एक गट
ु ,जो उनके `खलाफ था, बहत
ु gयादा
परे शान था। इधर इस गट
ु के नेताओं ने मलकर सराणा
ु और
मनसखानी
ु को अपनी ओर कर लया था। अब स<ताधार" पb म)
अलग से सभी गट5
ु क पहचान बन गयी थी।
रानाडे तथा उनका गट
ु सबसे शिAतशाल" था, बहत
ु से
मह<वपण&
ू Gवभाग इस गट
ु के पास थे। दसरा
ू शिAतशाल" गट

सराणा
ु व उन असंतd5
ु का था, जो स<ता म) तो थे, ले;कन
मह<वाकांbी बहत
ु अIधक थे। राव साहब उपर" तौर पर पाटY म)
एकता ,दखा रहे थे। संवाददाताओं, अखबार5, Gवदे शी संवाद-
एजेिसय5 को अAसर यह" कहते ;क पाटY म) कोई मतभेद नह"ं है ,
सब कछ
ु सामाय और ठfक चल रहा है ले;कन पाटY क आंतCरक
िथत Gवफोटक थी। लोकसभा उप-चनाव5
ु के नकट आ जाने के
बाद भी पाटY क ओर से कोई साम,ू हक यास नह"ं ;कये जा रहे
थे। िजह) ,टकट मला था, वे पाटY-फंड से अIधक-से-अIधक Uपया
ा[त करने के चAकर म) थे।
ा[त Uपय5 से ह" चनाव
ु लड़ा जाना था, अतः रानाडे और
उसके साIथय5 का मह<व और भी gयादा बढ़ गया। जो रै ल" उन
लोग5 ने Gपछले ,दन5 आयोिजत क थी, उसक सफलता से उनके
हौसले और भी gयादा बल
ु द हो गये थे। इस रै ल" म) आस-पास के
राgय5 से लगभग दस लाख यिAतय5 ने भाग लया। गैर-सरकार"
आंकड़5 के अनसार
ु लगभग एक करोड़ Uपय5 का यय ;कया गया।
इस अपयय के कारण राव साहब दखी
ु थे, ले;कन Aया करते ! अब
उनक पकड़ पाटY और सरकार दोन5 से ह" छटती
ू जा रह" थी। ऐसे
अवसर पर राव साहब ने के*बनेट क मी,टंग का आयोजन अपने
नवास थल पर ;कया।
अपने ारि#भक भाषण म) राव साहब ने रानाडे को उप-
धानमं+ी बनाये जाने क पGd
ु करते हए
ु उनको काय क शंसा
क, ले;कन बीच म) सराणा
ु व मनसखानी
ु ने दखल ,दया-
‘‘ Aया इस नयिA
ु त के पीछे ;कसी Gवदे शी शिAत का हाथ है
? ''
‘‘ तो ;फर एक उप-धानमं+ी हमारे गट
ु का भी हो, ता;क
संतलन
ु बराबर रहे ।
‘‘ ऐसा कैसे हो सकता है ! ''
‘‘Aय5 नह"ं हो सकता ? '' जब एक उप-धानमं+ी हो सकता है
तो दो भी हो सकते ह।S पाटY को Gवघटन से बचाने के लए यह
आवHयक भी है । '' मनसखानी
ु ने सराणा
ु क बात पर बल ,दया।
राव साहब के बोलने से पहले ह" रानाडे कहने लगे-
‘‘ दे `खये, इस तरह सरकार) नह"ं चलती। Aया आप चाहते हS
;क सभी को बार"-बार" से धानमं+ी या उप- धानमं+ी बना ,दया
जाए। यह स#भव नह"ं है । ''
‘‘ Aय5 स#भव नह"ं है ? आप GवEामथल म) भमगत
ू हो
गए, जब वापस आये तो उप-धानमं+ी थे। ''
‘‘ अगर ऐसा नह"ं हआ
ु ,'' मनसखानीु ने कहा, ‘‘ तो हमारे गट

के सभी सदय <यागप+ दे दगे ) । '' इस बात से सभी च[ु पी साध
गये।
राव साहब ने वापस बात छे ड़ी।
‘‘ बात-बात पर इतीफे और स<ता से अलग हो जाने क बात)
मS Gपछले काफ समय से सनु रहा हंू ; ले;कन कोई अलग नह"ं
होता, हर कोई अपनी मह<वाकांbा क एक और सीढ़" चढ़ जाना
चाहता है । ता;क वे भी जब हट) तो शायद स<ता के सव^च िHखर
से हट) । ''
राव साहब के कˆय म) स<य था, अतः सभी सर झकाकर

सनने
ु लगे ; कोई भी बोलने क िथत म) नह"ं था।
‘‘ तो ;फर Aया ;कया जाए ? '' राव साहब शायद फैसला
करना चाहते थे।
‘‘ अगर मेरे हटने से बात बन सकती हो, तो मS हट जाउं । ''
‘‘ नह"ं-नह"ं, आपके हटते ह" तो पाटY डब
ू जाएगी ! '' रानाडे ने
जोर से कहा।
रानाडे क बात को कैसे इनकार करते राव साहब , अतः जमे
रहे ।
‘‘ अगर रानाडे चाह) तो एक उप-धानमं+ी का पद और बना
द) .......''
‘‘ मझे
ु Aया एतराज हो सकता है ! '' रानाडे ने नराश भाव से
कहा। सांयकाल राƒपत भवन से एक Gवnि[त जार" हुई, िजसम)
सराणा
ु को भी उप-धानमं+ी बनाने का समाचार था।
आज सराणा
ु के समथ&क खश
ु थे। उनक कोठf पर अदर के
कमरे म) वाता&लाप जार" था-
‘‘ अपने से पहले ह" गलती हो गयी ! '' सराणा
ु कह रहे थे, ‘‘
अगर उस वAत धानमं+ी के चनाव
ु म) खड़ा हो सकता तो आज
मS ह" धानमं+ी होता ! ''
‘‘ हां, ये तो है ! '' मनसख
ु ानी बोले।
‘‘ खैर, दे र आयद दU
ु त आयद ! '' सराणा
ु ने पांव सोफे पर
पसारे और आंख) मंद
ू ल"ं।
‘‘ अब Gवधान सभा चनाव5
ु म) अपने गट
ु को िजतवाना है ,
ता;क राgय5 म) शिAत का Gवकास होता रहे । ''
‘‘ हां, इसके लए कछ
ु कदम उठाने चा,हए। '' मनसखानी
ु बोले।
‘‘ तो आप बताइए Aया कर) ? ''
‘‘ करना Aया है , हम) चनाव
ु -फTड म) से gयादा पैसा अपने
उ#मीदवार5 को ,दलाना है । चदा भी उह) gयादा मलना चा,हए,
ता;क वे अIधक GवHवास के साथ चनाव
ु लड़ सक) और जीतकर आ
सक।
) ''
‘‘ले;कन चदे और चनाव
ु -फTड पर तो रानाडे का कxजा है । ''
हCरसंह बोल पड़े।
‘‘ वो तो ठfक है ! ले;कन पाटY म) फTड कम ह" है । जो अपने
उKोगपत और क#पनयां हS, उनसे कहकर सीधा पैसा ले लो। ''
‘‘ वो कैसे ? '' मनसख
ु ानी बोले।
‘‘ अरे भाई, वैसे भी चनाव
ु के बाद कम-से-कम तीन राgय5 म)
अपने †प
ु क सरकार होगी-यह बात उKोगपतय5 को अभी से
समझा दो, और Aया ! ''
‘‘ हां, उनसे सीधा पैसा हम) मल सकता है । ''
‘‘ ले;कन सभा उप-चनाव
ु भी आ रहे है । ''
‘‘ इसम) हम) कछ
ु नह"ं करना है । िजह) ,टकट मला है , वे
रानाडे या राव साहब के आदमी हS, जीत) या हार) !'' सराणा
ु बोले।
‘‘ अगर हार जाते हS तो रानाडे क बदनामी gयादा होगी,
Aय5;क वे ह" इस चनाव
ु के भार" ह।S हम) Iचता करने क कोई
जUरत नह"ं है ।''

अभी सबह
ु हु ई है । अखबार5 के हाकर5 और दधवाल5ू क
साइ;कल5 क घं,टयां सना ु ई दे रह" है । राजधानी के हाकर आवाज
लगा रहे हS-
‘‘ उप-चनाव
ु -bे+ म) हCरजन5 को िजदा जलाया गया।''
‘‘ पलस
ु दे खती रह" । ''
‘‘ कई औंरत5 क ह<या । ''
‘‘ बला<कार और बब&रता का घण
ृ ापद कारनामा । ''
एक के बाद एक हाकर इसी कार क आवाज) लगाते चले
जा रहे ह।S
संवाद-समतय5 के माफ&त जो परेू समाचार आये, वे इस
कार थे-
‘‘ गांव मोलेला म) चार हCरजन5 को तीन रोज पव&
ू िजदा
जला ,दया गया। कछ
ु हCरजन5 ने थाने म) जाकर रपट लखाई तो
पलस
ु ने उह) मार-पीटकर भगा ,दया। ''
इस समाचार का आना था ;क स<ताधार" पb और अफसर5
म) खलबल" मच गयी। त<काल धान मं+ी राव साहब ने bे+ के
िजलाधीश से वायरलेस पर सीधे बात) क
‘‘ िथत कैसी हS ? ''
‘‘ सर, पर"
ू तरह नय+ण है । ''
‘‘ तम
ु लोग5 ने पहले कदम Aय5 नह"ं उठाया ? ''
‘‘ सर, कछ
ु पता ह" नह"ं चल पाया । ''
‘‘ और दे खो, दोषी आदमय5 को अGवल#ब Iगर‡तार कर लो ।
''
‘‘ जी हां .....''
‘‘ ;कसी कार क ढ़"ल क जUरत नह"ं है । ......हां, Aया नाम
था उस लड़क का, िजसक ह<या कर द" गयी ? ''
‘‘ जी ‘ भर"
ू ......''
‘‘ अ^छा उसके मां-बाप ....?''
‘‘ उह) भी मार डाला गया। ''
‘‘ और आप सभी दे खते रहे ? Hोमफल
ु , हम वयं आकर
दे ख)गे। ''
‘‘ जी अ^छा ! ''
जब से इस घटना का पता चला है , आसपास के गांव5,
ढा`णय5 और खेड़5 म) आतंक का साMाgय छा गया है । पलस
ु वैसे
भी कछ
ु नह"ं करती, ले;कन ,दन-दहाड़े झ5पडी को आग लगाकर
िजदा जला ,दये जाने क घटना ने तो लोग5 क सोचने-समझने
क शिAत ह" छfन ल" और .......
हे भगवान ् एक <यbदशp के अनसार
ु ऐसी मौत दHु मन को
भी न मले ! ले;कन मह<व बढ़ गया इस उपचनाव
ु के कारण। नह"ं
तो इस दे श म) ऐसी घटनाओं क ओर कोई lयान नह"ं दे ता।
GवरोIधय5 ने गांव के अदर ह", जल" हुई झ5पड़ी क राख पर टटा

टे बल रखकर मी,टंग का आयोजन कर ,दया। नेता जो राजधानी से
आए थे, कहने लगे-
‘‘ मS आपको बता दं ,ू कानन
ू और यवथा इस सरकार के बस
का काम नह"ं। पलस
ु बेकार है , नाकारा और आदोलन म) यत
ह।S िजस दे श क पलस
ु रbा करने के बजाय भbण करने लग
जाए, वहां ऐसा ह" होता है ! ''
‘‘ मS आप से यह कहना चाहता हंू ;क आप सरकार के भरोसे
मत र,हये। कल भर"ू मर", आज कोई और मरे गा, और आप लोग
इसी कार है रान, परे शान होते रहगे
) । सरकार" नेता और वोट
लेनेवाले राजधानी चले गए, और आप को इन है वान5 के भरोसे
छोड़ गए। मS तो कहता हंू ;क पलस
ु सबसे अIधक संग,ठत गT
ु ड़5
का महकमा है । ये सब चोर और सूअर ह।S ''
‘‘ अबे, उसको गाल" दे ने से Aया होगा ! '' भीड़ म) से आवाज
आयी। नेता ने अपना पसीना प5छा, आवाज क तरफ हाथ फैलाकर
कहने लगे-
‘‘ कछ
ु नह"ं होगा, मS जानता हंू , कछ
ु नह"ं होगा ! ले;कन भर"

क मौत से Aया हम सबको कोई सबक नह"ं लेना चा,हए ? ''
‘‘ हमार" भी मां हS, बहन) हS ; Aया उह) भी िजदा जला ,दया
जाना चा,हए ? मS पछता
ू हंू , कहां हS वे सरकार" अफसर और
कानन
ू -कायदे ? Aया गर"ब क इgजत नह"ं होती ? ''
‘‘ आप लोग शायद नह"ं जानते, सभी अफसर और बड़े नेता
राजधानी म) बैठकर इस घटना पर ल"पापोती कर रहे हS, ता;क
चनाव
ु म) इसका बरा
ु असर नह"ं पड़े । ''
ो तनक Uके, ;फर लहजा बदलकर कहने लगे-
‘‘ शी{ ह" स<ताधार" पb के लोग यहां आएंगे। आप उनसे
क,हए-हम) आHवासन नह"ं, ह<यारा चा,हए। जब तक ह<यारे पकड़े
नह"ं जाएंगे, हम चनाव
ु नह"ं होने दगे
) !....... मS संसद म) आपक
आवाज को बल
ु द कUंगा। ''
ो बैठ गए। सभा म) शाित थी, अब थानीय नेताओं ने इस
घटना पर दख
ु कट ;कया। सभा समा[त हुई।
इस छोटे -से गांव क ;कमत म) इतना सौभाय शायद गलती
से लख ,दया गया। बनास नह"ं के तट पर यह गांव, कल
ु दो हजार
क आबाद"। कछ
ु अह"र, कछ
ु हCरजन, कछ
ु क#
ु हार ; सभी Eमजीवी।
बेचारे मिH
ु कल से अपना पेट पालते थे। क#
ु हार लोग मलकर
मू त&यां बनाते। टे राकोटा क ये मू त&यां GवHव-सw तो थीं, ले;कन
बेचारे क#
ु हार5 को इसका मोल Aया पता ! यदाकदा कोई Gवदे शी
आता, इनके Iच+ खींचकर ले जाता, और ये गर"ब, इसी म) खश।

कछ
ु *बचौलये इनसे सामान खर"दते और ब,ढ़या मनाफ
ु े पे बेच
दे ते।
गांव म) एक मा+ पढ़ा-लखा था हCरया क#
ु हार, जो शहर से
बारहवीं कbा म) फेल होकर गांव आ गया था। हादसे के ,दन वह
गांव म) ह" था। रात का समय था। हCरजन टोला म) से वह गजर

रहा था, अचानक उसे कछ
ु खसर
ु -पसर
ु सना
ु ई द", ;फर एक लड़क
क चीख, और थोडी दे र बाद परेू टोले म) आग लगा द" गयी।
हCरया बेचारा भागा, और धर म) अपने बापू और मां को बताया-
‘‘ अरे दे खो, वठे कई बेइCरयो सब झोपड़ा बलCरया है । राख
बेइया& ! ''
‘‘ अरे दौड़ो-दौड़ो। ''
आसपास के कछ
ु लोग दौड़े, ले;कन तब तक सब कछ
ु वाहा
हो गया था। तब से ह" हCरया कछ
ु उदास-सा हCरजन टोला क
ओर दे खता रहता। उस ,दन Gवरोधी पb क मी,टंग म) भी वह"
बोला था ; ले;कन बोलने से Aया होता !
गांव के पटवार", माटर और थाने को इसक सचना
ू द" गयी
, ले;कन कछ
ु नह"ं हआ।
ु तब हCरया ने शहर जाकर अखबार वाल5
से स#पक& साधा। ऐसी चटपट" खबर और उपचनावु ! अखबारवाले
लपके आए। अपने फोटो-कैमर5 और टे पCरकाड&र5 से लैस होकर जब
वे लोग गांव म) उतरे , तो गांव म) नया डर याप गया।
ये तो बाद म) हCरयाने उह) समझाया, तब गांववाल5 ने
अखबारवाल5 को कछ
ु दबे-दबे शxद5 म) बताया।
कछ
ु ह" ,दन5 म) दे श के सभी अखबार5 म) समाचार आ गए।
सा[ता,हक5 ओर मासक5 ने भी अपना धम& नभाया। ातीय
दै नक समाचार-प+5 के स#पादक5 ने स#पादकय लख मारे , और
अब बार" आई, Gवरोधी दल5 क। एक दल फेर" लगाकर वापस
जाता तो दसरा
ू फेर" लगाने को तैयार !
अफसर5, मं*+य5, और नेताओं क चरण-रज वतं+ता के बाद
पहल" बार इस गांव म) पड़ने लगी।
छोटा गांव इनके आतˆय के भार से दबा जा रहा था। गांव
के लोग5 क समझ म) नह"ं आ रहा था ;क ये सब Aया और Aय5
हो रहा है ?
उस ,दन Gवरोधी पb क मी,टंग समा[त होने पर गांव के
बजग&
ु ु उदाबा के घर के बाहर गांव के लोग इकzठे होकर आग
तापने और बतयाने लगे-
‘‘ का रे खूमा, यो सब कŒ वैइCरयो ? जीने दे खो सोई धोव<य5
पकड़ने अठे आइCरय5 ! ...........
‘‘ अबे मंू कई बताउं बा ! मने तो यंू लागे के अणार" धोवती
र" लांग अबे खलवा
ु वार" है । ''
‘‘ हां, यइज
ू द"खे। नी तो आज तक कोई नी आयो ! ''
‘‘ हो, अबे आपां दे ख Cरया हां ! '' खूमा ने आग क ओर पांव
;कए और तापने लगा। उदा ने आकाश क ओर दे खा-कोई तारा
टटकर
ू Iगर गया।
‘‘ दे ख, वो आकाश म) दे ख, कोई तारो टटो
ू है । अबे, जUर कई
न कई वेगा !''
‘‘ वेई तो वेई, अबे आपा कŒ कर सकां ! ''
खम
ू ा और उदा चप
ु हो रहे ।
नाथू बेचारा ,दन भर के पCरEम से Aलात था, ले;कन ;फर
भी बोल पड़ा-
‘‘ अणी भर"
ू ने कणी मार"। बापड़ी बारा तेरा साल र"जह"। ''
‘‘ कई केइ सका ! कई-कई वेजा। अबे तो कई भरोसो इस
नीरयो। मंू भी अबे तो चपचाप
ु दे खूं।'' खमा
ू ने कहा। उदा ;फर भी
उदास ह" रहा। खमा
ू ने Iचलम सलगाकर
ु कश खींचा और Iचलम
उदा क ओर कर द"।
‘‘ अबे थार" कई मरजी है ? पलस
ु आवेगा, आपाणा xयान
लगा......''
‘‘ xयान-xयान लेगा ओर कई वेगा। भर"
ू तो पाछf आवेगानी !
''
‘‘ पण अबे xयान कण
ु दे गा।'' खमा
ू ने धंआ
ु उगलते हए
ु कहा।
‘‘ अबे कTडी मोत आई जो xयान दे गा, वे कई आपाने छोड़
दे गा। आपाने xयान का झगड़ा म) नी पड़नो। ''
हCरया भी आकर बैठ गया था, कहने लगा-
‘‘ xयान तो दे णा पडसी ! आपाइस अगर xयाण नी दांगा, तो
फेर ह<यार5 ककर
ू पकडाये़ गा ? ''
‘‘ अरे भाया, थू टाबर है , मत बच म) पड ! अ`ण राज-काज म)
मंू परो
ू डबू यो हंू । खमा
ू ने बजगा&
ु ु ना अदाज म) कहा।
‘‘ मार" पर"
ू दस बीगा जमीन ये खाई गया, मां सब कई नी
कर सAया। सब सअर
ू , चोर ने बइमान हे । ''
‘‘ जवार लाल के मरे या पाछो कोइ गत रो आदमी नी ब^यो
है । ये तो Iगw है Iगw, जो आपाणी लास रो मांस भी नोच-नोचने
खावेगा। ..... आज भर"
ू र" लास खावेगा, काले मार" और परसंू थार"
लास खावेगा ! ''
‘‘ पण काका '' हCरया ;फर बोला, ‘‘ आपांने अयाय के `खलाफ
आवाज तो उठाणी पड़सी। जो आज हCरजनां के लारे xयो, वो ने
अगर सजा कराई दो तो ठfक रहे । ''
‘‘ थंू नी समझेगा ! '' उदा ने उसे टोका- ‘‘ आपTो अठे गर"बी
सब संू मोटो दोस है , और वणीर" सजा आपा सब भगत
ु रया है । ''
‘‘ तो थां सब xयान नी दोगा ? ''
‘‘ हां, माणी मरजी तो कोई नी। ये तो xयान लेई ने पराजाई,
पछे आपांने रै णो तो अठे इज पड़ेगा। ''
‘‘ तो पछे ठfक है । मंू तो xयाण दं ग
ू ा ! ''
‘‘ जसी थार" मरजी ! '' हCरया चल ,दया। उदा, खमा
ू भी अपने-
अपने घर चले गए।
जब से यह खौफनाक हादसा हआ ु है , गांव के लोग रात को
बाहर नह"ं नकलते, अपनी-अपनी झ5पuड़य5 म) आंत;कत-से पड़े
रहते ह।S
इधर रात-,दन मं*+य5, अफसर5 और नेताओं क गाuड़य5 क
आवाजाह" के कारण परे शानयां और भी बढ़ गयीं।
थानीय नेता और उपचनाव
ु के उ#मीदवार5 ने तो अपना डेरा
ह" यहां डाल ,दया, ता;क हर छोट"-बड़ी घटना का lयान रहे । कछ

प+कार भी ;कसी मसालेदार समाचार के इतजार म) यदाकदा इधर
आ जाते। गांव के शांत और सामाय जनजीवन म) एक तफ
ू ान -सा
आ गया था, ले;कन गांव वाल5 को इससे कछ
ु भी ा[त नह"ं हआ

था। मAका क रोट" और क^चा कांदा ‘[याज' खानेवाल5 को ;कसी
ने भी यह नह"ं कहा ;क अब गेहू ं क रोट" और सxजी खाओ !
Gवरोधी पb क मी,टंग क पर"ू Cरपोट& मदन जी ने अपने
अनचर5
ु से ा[त कर ल" थी। वे राव साहब क कोठf पर यह" सब
बताने को इतने सवेरे आये ह।S अभी राव साहब टहलने को लान म)
आए ह" हS ;क मदनजी ने दTडवत ् कर रपट सनाने
ु का अभयान
ारं भ ;कया-
‘‘ Gवरोधी पb के नेता रामावामी ने बहतु अ^छा भाषण
,दया।......ऐसी मी,टंग मने
S बरस5 से नह"ं दे खी । ''
‘‘ तम
ु वयं गए थे वहां ? ''
‘‘ जी हां ! अगर रामावामी क मी,टंग का असर हा गया तो
आपके <याशी के जीतने का कोई आधार नजर नह"ं आता। लोग5
म) इस घटना को लेकर बड़ा रोष है ; परा
ू bे+ ह" एक होकर Gवरोध
म) जा रहा है । परेू लोक-सभा bे+ म) घमा
ू हंू म,S सभी जगह सरकार
के लए केवल गालयां ह।S ''
‘‘ हंू .......!'' राव साहब कछ
ु नह"ं बोले।
‘‘ तम
ु गांव के बारे म) कछ
ु बताओ।''-अचानक राव साहब
कहने लगे।
‘‘ छोटा-सा गांव है , और झगड़े क जड़ थी भर"।
ू कछ
ु लोग5
का कहना है ;क हCरया क#
ु हार और हCरजन भर"
ू म) कछ
ु [यार-
यार था, और इसी कारण क#
ु हार5 ने हCरजन5 को जला ,दया।''
‘‘ अ^छा.....! रामावामी ने वहां Aया कहा ? ''
‘‘ मS आपक आवाज संसद म) उठाउं गा। मS ये कUंगा, वो
कUंगा। हम) भर"
ू के ह<यारे को पकड़ना है , आ,द-आ,द।''
‘‘ हंू ....!'' ;फर एक ल#बी च[ु पी। राव साहब क यह" आदत थी
जो मदनजी को पसंद नह"ं है ; ले;कन Aया कर) , कछ
ु तो सहना ह"
पड़ता है !
‘‘ अब Gवप|bय5 ने िजला मX
ु यालय पर धरना दे ना शU
ु कर
,दया है । उह5ने इस घटना को लेकर ‘दे श बद ' का आयोजन
भी कर ,दया है .........! ''
‘‘ हंू .......! ''
‘‘ अगर ये सफल हो गये, तो यह सीट तो आपके हाथ से गई
सम`झये ! ''
‘‘ ऐसा नह"ं होगा ! एक काम करो, वहां पर ऐलान कर दो ;क
राव साहब वयं आएंगे और उनके दख
ु -दद& सनगे
ु ) । ''
‘‘ हां, अगर आप जाएं तो हवा बदल सकती है । ''
‘‘ और दे खो, GवरोIधय5 को Gवरोध कट करने दो। लोकत+
क मजबती ू के लए यह बहत
ु आवHयक है । सभी अIधकाCरय5 को
आदे श दे दो ;क ताकत का इतेमाल नह"ं कर।) ''
‘‘ जी अ^छा ! ''
‘‘ अ^छा, अब जाओ ! ''
राव साहब ने अपने सIचव को बलवाया
ु , ‘‘ हम मोलेला
जाएंगे, ो†ाम बनाओ ! और सनो
ु , एक Gवशेष ेस-का~ेस बलाओ

। ''
‘‘ जी....''
आनन-फानन म) धानमं+ी -नवास पर प+ तनIधय5 क
भीड़ इकhठf हो गयी। धानमं+ी आये और कहने लगे-
‘‘ जो कछु मोलेला म) घ,टत हआ
ु , वो तो आप सभी को
मालूम ह" है । मने
S घटना क यायक जांच के आदे श दे ,दये ह।S
मS कानन
ू और यवथा को सव^च ाथमकता दे रहा हंू । मS
वयं इस गांव म) जाकर दखी
ु और संत[त लोग5 से मलंग
ू ा, उनके
बीच बैठू ं गा, ता;क वतिथत
ु से वा;कफ हो सकंू .....''
'' कछ
ु लोग5 का कहना है ;क भर"
ू क मौत म) स<ताधाCरय5
का हाथ है ।'' -एक संवाददाता ने पछा।

'' बकवास है । उस गांव म) हम लोग5 का Aया काम ! ''
‘‘ नह"ं, कछ
ु थानीय नेता; िजनक पहंु च उ^च पदासीन5 तक
है , इसके लए िज#मेदार बताये जाते ह।S''-एक संवाददाता जो
मोलेला जाकर आया था, कहने लगा।
‘‘ नह"ं, ऐसा नह"ं हआ
ु ! तमु लोग उलटे -सीधे वAतय छापकर
जनता को गमराहु करते हो। ''
‘‘ तो Aया भर"ू क मौत वाभाGवक तर"के से हुई ? ''
‘‘ अभी मS कछ
ु नह"ं कहंू गा। जांच क रपट आने
दो।...........अ^छा ! ''
यह कह धानमं+ी तेजी से अदर चले गये। प+-तनIध
और Gवदे शी संवाददाताओं ने धानमं+ी के साथ जाने के इरादे से
अपने ो†ाम बनाये।

धानमं+ी का का;फला तेजी से धल


ू उड़ाता हआ
ु मोलेला गांव क
ओर बढ़ रहा था।
गांव के नजद"क आकर उह5ने सामने से आते हए ु एक
अध&नन †ामीण को दे खकर गाड़ी रोकने का इशारा ;कया। तर
ु त
परा
ू का;फला Uक गया।
उह5ने †ामीण को पास बलाया।
ु †ामीण हAका-बAका, डरते-
डरते उनके पास आया-
‘‘ खमा अनदाता, घणी ख#मा ! जै रामजी क ! ''
‘‘ जै रामजी क ! '' राव साहब ने कहा, ‘‘ कहो भाई, ठfक तो
हो ?''
‘‘ हां, हजर
ु ू ! ''
‘‘ दे खो, त#
ु हारे शर"र पर कपड़ा नह"ं है ; तम
ु यह कमीज पहन
लो !'' यह कहकर राव साहब ने अपनी कमीज उतार" और †ामीण
को दे द" । बेचारा †ामीण असमंजस म) पड़ गया-Aया करे Aया न
करे !
थानीय नेता जोशी ने कहा, ''अरे , ले लो ! हजर
ु ू मेहरबान है
साले ! '' और †ामीण ने कतक<
ृ ृ य होकर कमीज पहन ल"। साथ
वाल" ब^ची को राव साहब ने पचकारा
ु और ेड के टकड़े
ु खाने को
,दये। ब^ची ने कभी ेड दे खी नह"ं थी ; समझ न पाई ;क इसका
Aया करे ।
इस बार भी थानीय नेता ने उबारा-
‘‘ खा ले.....खा ले.....खाने क है ! ''
‘‘ अ^छf है । ''
†ामीण और उसक प+ी
ु अपने राते चल ,दये।
राव साहब ने नयी कमीज पहनी और का;फला आगे चला।
कछ
ु समाचार प+5 ने राव साहब क दानशीलता का ऐसा Iच+
खींचा ;क वयं कण& भी शमा& गया।

10

राव साहब के वागत म) थानीय नेता और अफसर *बछे जा


रहे थे। गांव से काफ दरू ह" उन लोग5 ने तोरण -ार बनवाये थे।
जगह-जगह राजथानी वेश-भषा
ू म) लड़;कय5 ने मंगल-गान गाये।
ि+य5 ने आरती उतार"। राव साहब फल
ू -मालाओं से लदे -लदे डाक-
बंगले तक पहंु चे। *बना GवEाम ;कये वे सीधे उस थल के लए
पैदल ह" चल पड़े , जहां भर"ू और उसके मां-बाप को िजदा जला
,दया गया था।
तेज धप
ू थी। राव साहब पैदल सबसे आगे गांव क गलय5
से गजर
ु रहे थे; साथ म) अनेक छटŽ
ु ौये और अफसर । बेचार5 को
पैदल चलना पड़ रहा था। मन-ह"-मन वे सभी इसे बढ़े
ू क सनक
समझ रहे थे।
‘‘ साला खद
ु भी मरे गा और हम) भी मारे गा ! ''
‘‘ अरे , इसका Aया है -आज मरा कल दसरा
ू ,दन !हम) तो
िजदगी गजारनी
ु है ।''
‘‘ ले;कन Aया कर) ! नौकर" है । ''
‘‘ तो चलो पैदल !....सब कपड़े खराब हो गये। ''
<ोजी से चलते हए
ु राव साहब पास क हCरजन क झ5पड़ी पर
पहंु चे-
‘‘ जै रामजी क, काका ! ''
भीतर से आतं;कत, आशं;कत बढ़ा
ू बाहर आया।
‘‘ भर"
ू और उसके मां-बाप यह"ं रहते थे ? ''
‘‘ जी, अनदाता ! ''
‘‘ आपके CरHतेदार थे ? ''
‘‘ हां हजर
ु ू , वे मारा काका रा बेटा हा। ''
‘‘ अ^छा....मझे
ु बहत
ु दख
ु हुआ है ।'' राव साहब वह"ं जमीन पे
मुtढ़े को लेकर बैठ गये। बढ़ा
ू रोने लगा। और आHचय& के साथ
सभी ने दे खा, राव साहब भी उसके साथ-साथ रोने लगे। उह5ने बढ़े

को सा<वना द" और कहने लगे-
‘‘ काका, अब Aया हो सकता है ! ले;कन मS इस मhट" क
कसम खाता हंू ....'' राव साहब ने पास पड़ी उठा ल" ‘‘ ;क भर"
ू के
ह<यारे को जUर दTड दं ग ू ा।''
बढ़ा
ू ये सब दे ख-सनकर
ु कतक<
ृ ृ य हो रहा था। राव साहब ने
आसपास के घर5 म) झांका। एक जगह पानी Gपया, कछ
ु और बात)
कं, और अपने का;फले को लेकर वापस लौट आये।
सायंकाल उसी थल पर राव साहब ने मी,टंग का आयोजन
करवाया। थानीय नेताओं के बोलने के बाद राव साहब उठ खड़े
हए
ु -
‘‘ माताओ, बहना ओर भाइयो !
आप पर बड़ा भार" दःख
ु आ पड़ा है । मझे
ु मालम
ू है ;क
हमार" गलती या लापरवाह" के कारण ऐसा हआ। ु मS आप सभी से
इसक माफ मांगता हंू । bमा कर) ! '' अब राव साहब असल" *बद ु
क ओर अ†सर हए ु -
‘‘ भर"
ू क मौत और उसके मां-बाप को िजदा जला ,दये
जाने क खबर सनते
ु ह" मS यहां दौड़ा चला आया। मने
S अपने सभी
काय&eम रaद कर ,दये। अफसर नह"ं माने। मने
S कह ,दया-मS पहले
यहां आउं गा, और आया। मS मानता हंू ;क मेरे इस तरह यहां आ
जाने से भी भर"ू के ह<यार5 क पकड़ हो जायेगी, ऐसा नह"ं है ;
ले;कन मझे
ु बताया गया ;क आप लोग आतं;कत है , भयभीत हS;
बयान नह"ं दे ना चाहते। मS कहता हंू आप नभ&य र,हये, नभ&य
बनये। पहले वाले अकम&Tय पलसु अफसर5 को हटाकर नये योय
अफसर5 को लगाया गया है । ये लोग आपके जान-माल क पर"

रbा करगे
) ..........''
‘‘ इस मAXानबाजी से Aया होगा ? हम चनाव
ु नह"ं होने दगे
)
! '' भीड़ म) से आवाज आयी। एक डी.आई.जी. और कई अय लोग
उधर दौड़े। राव साहब ने उह) डांटा।
‘‘ नह"ं , आप लोग यह"ं ठहCरये ! ''
उह5ने भीड़ क ओर मखातब
ु होकर कहा-
‘‘ ठfक है , आप म) रोष है - होना चा,हए ! अभी आप लोग
उ<तेिजत ह।S ले;कन थोड़े ठं डे ,दमाग से सोIचये। Aया इस काTड
का सीधा स#बध लोकसभा चनाव
ु से है ? नह"ं....
‘‘ ले;कन ;फर भी अगर आप लोग नह"ं चाहते तो चनाव
ु नह"ं
ह5गे। हम चनाव5
ु को थIगत कर दगे
) ..........
‘‘ अब आप ये सोIचये, भर"
ू क ह<या ;कसने क, और उसको
पकड़वाने म) आप Aया मदद दे सकते है । अगर आप लोग सहयोग
कर) तो, हम तीन ,दन म) भर"
ू के ह<यार5 का पता लगा ल) ............
‘‘ अब मS एक दसर"
ू बात आपसे कहना चाहंू गा। मझे
ु बताया
गया ;क ऋण-योजना म) इस गांव को अभी तक कछ ु नह"ं
मला.........
‘‘ जब तक राgय-सरकार और इसके अIधकार" कछ
ु बध
कर) , मS अपने कोष से पचास-हजार Uपये इस काय& हे तु दे ता हंू !''
समथ&क5 ने जोर से तालयां बजाई। जब तालय5 क आवाज कछ ु
कम हुई तो राव साहब ;फर बोले-
‘‘ भर"
ू के नकटतम CरHतेदार काका को मS पांच हजार Uपये
का अनदान
ु दे ता हंू । ये Uपया वापस नह"ं लया जाएगा।''
राव साहब Uके नह"ं , बोलते चले गये, मS जानता हंू ;क
Gपछले ,दन5 Gवरोधी दल5 ने यहां पर सभाएं कं, धरने ,दये, रै लयां
नकाल"ं। ले;कन एक बात आप भी याद र`खये, धरन5 और रै लय5
से समयाओं का हल नह"ं नकलता। समयाओं को ;eयािवत
करना पड़ता है । .........
‘‘ GवरोIधय5 के पास केवल एक काम है , सरकार क आलोचना
करना। ले;कन आलोचना से Aया होता है ! हमने Gपछले वष… म)
जो काय& ;कये हS, वे हमार" गत के माण ह।S
‘‘ मS आपसे ;फर नवेदन करता हंू ;क आप भर"
ू के ह<यार5
को पकड़ने म) हमार" मदद कर।) साथ ह" आपको आज से ह" ऋTा-
योजना का लाभ मलना भी शU
ु हो जाएगा। ''
राव साहब ने मी,टंग म) ह" कछ
ु गर"ब5 को अपने हाथ से
ऋण-योजना के कागज और Uपये बांटे। तलय5 क गड़गड़ाहट और
कैमर5 क चकाच=ध के बीच †ामीण5 का दःख
ु पता नह"ं कहां खो
गया। मी,टंग क समाि[त के बाद राव साहब एक बार ;फर गांव
के लोग5 से मले, बतयाये और शहर क ओर चल पड़े।
दसरे
ू ,दन सभी मख
ु अखबार5 म) थम पD
ृ पर राव साहब
†ामीण5 को ऋण GवतCरत कर रहे थे। समथ&क अखबार5 ने सभा
क सफलता को बढ़ा-चढ़ाकर बताया और Gवपbी अखबार च[ु पी
साध गये थे। इन समाचार5 से Gवरोधी दल5 के नेताओं का भाव
और हवा जो गांव म) बनी थी, सब साफ हो गयी। Gवपbी राव
साहब के इस च5चले को नह"ं समझ पाये।
राव साहब क कोठf के लान म) राव साहब और मदनजी
Gवचरण कर रहे ह।S राव साहब शात और ग#भीर, मदनजी वाचाल-
‘‘ कमाल कर ,दया साहब आपने ! Gवप|bय5 को वो धोबीपाट
मारा है ;क आपका जवाब नह"ं ! गांव का ब^चा-ब^चा आपके गण

गा रहा है । हरे क क जबान पर केवल आपका नाम है ।
‘‘ हंू .............!''
‘‘ इस ऋण-योजना ने तो गजब ढा ,दया ! लगभग सभी
पCरवार5 को ऋण मल गया। हर एक ने कोई-न-कोई धधा शU

कर ,दया........''
‘‘ होना भी चा,हए। गर"ब5 का उदय होगा, तभी तो सभी का
उदय होगा ! ''
‘‘ सर, एक बात है -गांव म) आपके जाने से तो परा
ू माहौल ह"
बदल गया। अब Gवपbी दल5 के लोग तो उधर जाने म) भी कतराते
ह।S ''
‘‘ हां, हो सकता है ! ले;कन तम
ु ये बताओ ;क परेू bे+ क
हालत कैसी है ?''
‘‘ *बलकल
ु फट ;कलास सर ! अब ये उपचनाव
ु तो आपक
जेब म) आया सम`झये। ''
‘‘ और वहां के गांववाले बयान के लए तैयार हए
ु या नह"ं ?''
‘‘ हो जाएंगे ! ऋण-योजना म) परोb Uप से ऐसी शत& लगा दे ने
पर सब ठfक हो जाएगा। ''
‘‘ अ^छा अब तम
ु जाओ ! ''
राव साहब अदर आए। कछ
ु जUर" फाइल) नपटाई, गोल"
खाई और सो रहे ।
उदा बा के झ5पड़े के बाहर ;फर रात के समय गांव के बड़े-
बढ़5
ू ने इकzठा होना शU
ु ;कया। राव साहब के गांव से वापस चले
जाने के बाद यह तीसरा ,दन था। कछ
ु पCरवार5 को ऋण मल
गया था। मले चेक को भनाने
ु म) गांव के लोग5 को ,दAकत हो
रह" थी। कछ
ु गांववाल5 को शहर आकर तहसील से Uपया ले जाने
को कहा गया था।
‘‘ कारे खमाण
ु , थने कतरा Cर[या म_या ? ''
‘‘ काका, अंगोठ5 तो मS एक हजार Cर[या पे लगायो, पण काट-
कटं
ु ने मने आठ सौ Cर[याइजद"दा। ''
‘‘ अरे , भागता चोर र" लंगोट" भल" ! ''
‘‘ हां काका, जो आया वोई पाया ! ''
‘‘ अबे थू अणा Cर[या रो कई करे गा ? '' उदा ने सवाल
उछाला।
‘‘ कई कUंगा ? अरे अबे Aयंू पछो
ू हो, वो Cर[या तो वणी दन
वाTया रा आदमी लेइया। वो नराइ दनाउ मांगतो हो। मारे पां तो
अबे कई नी ब^चो। थोड़ा-घणा Cर[या रो धान लायो। अकाल रो
वकत है । खावा ने तो छावे ! ''
‘‘ हां खमा
ू , या बात तो है । मार" भी हालत असीज है । '' उदा
बोला।
‘‘ थार"- मार" न सबक हालत असी है ! ये राव साहब तो
अणी वात Cर[या बांट गया ;क आपांरो lयान भर"
ू पू हट जावे। ''
पता नह"ं कहां से हCरया क#
ु हार आ गया और उसने उपरोAत बात
कह"।
‘‘ अरे छोरा, जो मर यी वा तो यी। आंपा सार" उमर रोवां
तो भी कई नी वेई सके। दे Xयो वTडो काको राव साहब रा क<या
गण
ु गाई रयो। ''
‘‘ हां, पांच हजार Cर[या रो मरहम वTडा जखम पे लाग गयो
है ।''- हCरया ने कहा।
‘‘ अणी वातेइज़& तो केउं ;क आंपा सब अबे कŒ कर सकां !
'' खमा
ु ने कहा। ;फर उसने Iचलम सलगा
ु ई , सब पीने लगे।
रात धीरे -धीरे गहराने लगी और गांव को अपनी Iगर‡त म)
लेने लगी।

11

राव साहब क मी,टंग और उसक सफलता का जो खाका


राƒीय, ातीय व थानीय अखबार5 ने खींचा था, उसे पढ़ सनकर

Gवरोधी दल के नेताओं के पैर5 के नीचे से जमीन नकल गयी।
कहां तो वे सोच रहे थे ;क यह उपचनाव
ु भर"
ू बाई क कपा
ृ से अब
उनक जेब म) हS ; ले;कन राव साहब ने परा
ू पासा ह" पलट ,दया।
Gवपbी दल5 के संयुAत उ#मीदवार दोषी ने ;फर राजधानी म)
अपने आकाओं के -ार खटखटाये। रामावामी और उसके म+
दोषी के साथ Gवचार करने लगे।
‘‘ हां तो दोषी, राव साहब ने गांववाल5 म) पैसा बांट ,दया ? ''
‘‘ हां, बांटा तो अनदान
ु है , ले;कन उह5ने गांववाल5 के पास
बैठकर उनसे बात क। एक के घर पानी Gपया। इन बात5 से काफ
फरक पड़ा है । '' -दोषी बोले।
‘‘ तो Aया परेू bे+ म) इसक चचा& है ? ''
‘‘ हां और Aया ! अखबार5, रे uडयो, टे ल"Gवजन क मदद से इन
बात5 का ऐसा चार-सार ;कया जा रहा है , जैसे राव साहब बड़े
दे वता आदमी हS और उह5ने परेू bे+ का उwार कर ,दया । ''
‘‘ अ^छा..........''
‘‘ और तो और, एक नद& ल"य उ#मीदवार भी राव साहब के
उ#मीदवार जोशी के समथ&न म) बैठ गया। ''
‘‘ अरे यह तो गजब हो गया ! '' रामावामी के म+ ने कहा।
‘‘ अरे साहब, गजब तो तब होगा, जब मेर" जमानत भी नह"ं
बचेगी ! ''
‘‘ दे खो दोषी, जब ओखल" म) सर दे ,दया है तो मस
ू ल से
मत डरो। रामावामी ने कहा।
‘‘ वो तो ठfक है वामी साहब, ले;कन मS तो अ^छा-भला
कमा-खा रहा था, कहां राजनीत म) फंस गया ! ''
‘‘ जब फंस ह" गए हो तो धीरज रखो। और शाित से आगे
का काय&eम बनाओ। ''
अब रामावामी आराम से पसर गए। थोड़ी दे र चप
ु रहे और
;फर कहने लगे-
‘‘ उस गांव म) ;कसका भाव gयादा है ? ''
‘‘ एक लड़का है हCरया क#
ु हार, वह" कछ
ु पढ़ा-लखा है ;
ले;कन थोड़ा सनक है ।''
‘‘ हंू .....तो Aया उसे अपने पb म) ;कया जा सकता है ? ''
‘‘ मिHु कल ह" है ! वो राजनीत से बहत
ु दरू रहता है । ''
‘‘ दरू को तो पास लाना पड़ेगा। ''
‘‘ दोषी, तम
ु एक काम करो-येन-केन कारे ण उसे अपने पb
म) करो, और उसी से भर"
ू -ह<याकाTड वापस उछलवाओ। ''
‘‘ अ^छा, ठfक है ! ''
‘‘ और मझे
ु सIचत
ू करो ! '' रामावामी ने कहकर दोषी को
रवाना कर ,दया।
अब कमरे म) रामावामी और उसके म+ अकेले ह" रह गये।
‘‘ उस ह<याकाTड का Aया हआ
ु ? ''
‘‘ कौन-सा ? ''
‘‘ अरे वह", जो लड़क त#
ु हार" कोठf के बाहर मर" पायी गयी
थी। ''
‘‘ कछ
ु नह"ं यार, वयं वामी असरान
ु द ने कोई केस नह"ं
;कया। ''
‘‘ मने
S भी gयादा मगजप^ची नह"ं क। ''
‘‘ अ^छा ? ''
‘‘ पलस
ु के पास पX
ु ता सबत
ू तो थे नह"ं, इस कारण वह भी
कछ
ु नह"ं कर सक। ''
‘‘ मने
S गहमं
ृ +ी से भी बात कर ल"ं अब कछ
ु नह"ं होगा ! ''
‘‘ नह"ं, मने
S सोचा-यह केस त#
ु ह) ,दAकत करे गा। ''
‘‘ नह"ं-नह"ं, ऐसी कोई बात नह"ं है । ''
‘‘ तब तो ठfक है ? '' म+ बोल पड़े।
रामावामी ने एक उबासी ल"। दवाखाई और म+ के साथ
सरा
ु दे वी का आनद लेने लगे।
गांव का पिHचमी भाग है यह। दरू तक छोटे -छोटे खेत। कभी
इनम) हCरयाल" लहराती है , ले;कन इस बार अकाल है । अनावGृ d के
कारण परा
ू bे+ अकाल†त है ।
पहाड़ सब नंगे हो गए है । इधर-उधर मंह
ु मारते जानवर और
सख
ू े पड़े कओं
ु को दे खकर कलेजा मंह
ु को आता है । ऐसे थान पर,
खेत क मेड़ पर हCरया क#
ु हार कछ
ु शहर" लोग5 से घरा हआ
ु बात)
कर रहा है ।
‘‘ दे खो हCरया, भर"
ू बाई क ह<या का राज अगर नह"ं
खला
ु , तो लानत है त#
ु हार" िजदगी पर ! ''
‘‘ मS अकेला Aया कर सकता हंू ? ''
‘‘ अरे तम
ु बहतु कछ
ु कर सकते हो! गांववाल5 को समझाओ,
िजला मX
ु यालय पर धरना दो, रै ल" करो ! ''
‘‘ ले;कन इन सबसे Aया होता है ? ''
‘‘ अरे , हम सभी Gवरोधी भी तो त#
ु हारे साथ ह।S ''-दोषी बोला,
‘‘ अगर राव साहब ने कछ
ु पैसा बांट ,दया तो Aया तम
ु लोग5 का
जमीर ह" मर गया ? ''
‘‘ सवाल जमीर का नह"ं है । अब भर"
ू तो वापस आएगी नह"ं
हम सभी चाहे कछ
ु भी कर ल) ! ''- हCरया ने नराश भाव से कहा ।
‘‘ अरे भाई, तम
ु बात को समझने क कोशश Aय5 नह"ं करते
कल भर"
ू क ह<या हुई, परस5 और ;कसी क होगी।'' दोषी ने ;फर
उसे उखाड़ने क कोशश क-
‘‘ अगर तम
ु इस गांव के लोग5 म) असंतोष फैला दो, तो हम
Gवधानसभा और लोकसभा म) आवाज उठाएंगे। *बना यहां कछ ु हए
ु ,
हम भी Aया कर सकते हS ! '' bे+ीय Gवधायक ने कटनीत
ू ,दखाई

‘‘ हां, ये बात तो है ! अगर यहां पर कछ
ु हो तो हम लोग भी
दे र-सबेर आवाज उठा सकते ह।S ''- हCरया बोला।
‘‘ रामावामी भी हमारे साथ ह।S'' दोषी ने कहा।
‘‘ अ^छा......'' हCरया शात ह" रहा।
‘‘ और स<ताधार" पb का एक गट
ु भी वैसे इस चनाव
ु के
कारण राव साहब से नाराज है । हCरया, तम
ु चाहो तो त#
ु हार"
;कमत चमक सकती है ! '' दोषी ने अब चारा फकना
) शU
ु ;कया।
थोड़ी दे र क ना-नच
ु के बाद दोषी और उसके साथी हCरया को
शहर ले गए, और वहां उसे अ^छf तरह से समझा-बझाकर
ु वापस
गांव छोड़ गए।
_ो;कन राव साहब के अनचर
ु मदनजी ने ये कम भी फेल
कर द"। हCरया का शव गांव के एक सख
ू े कएं
ु म) बरामद हआ।

पलस
ु ने मामला दज& कर लया।
रामावामी ने हCरया क मौत क समत िज#मेदार"
स<ताधार" पb पर थोप द"। उह5ने अपने ेस-वAतय म) कहा-
‘‘ इस चनाव
ु के नाजक
ु समय म) , इस bे+ म) एक के बाद
एक मौत ने गांव वाल5 का मनोबल तोड़ ,दया है । हCरया एक
स;eय और समझदार काय&कता& था ; वह हमारे <याशी दोषी के
लए काम कर रहा था। यह एक राजनीतक ह<या है । ''
इतना ह" नह"ं, रामावामी और उसके समथ&क5 ने संसद म)
भी बहस क मांग क। सrाधार" पb इस हमले से बौखला गया,
ले;कन राव साहब शात रहे ; और अत म) बहस का जवाब दे ते
हए
ु उह5ने कहा-
‘‘ सभी जानते हS, हCरया एक सनक और मानसक Uप से
Gवकत
ृ लड़का था। शहर म) फेल हो जाने के बाद वह गांव चला
गया। गांव म) उसक उल-जलल
ू हरकत5 से गांववाले परे शान थे।
;कसी सनक के कारण ह" वह कएं
ु म) Iगर गया और उसक म<ृ यु
हो गयी-पलस
ु और पोटमाट& म क रपट5 से यह" सा*बत होता है ।
''
इतना कहने के बाद राव साहब तनक Uके और ;फर बोले-
‘‘ उपचनाव
ु कौन जीतता है , यह मह<वपण&
ू नह"ं ; ले;कन यह
आरोप ;क हCरया क ह<या राजनीतक है , *बलकल
ु बेबुनयाद हS ! ''
इसके समथ&न म) राव साहब के सांसद5 ने हष&lवन क।
रामावामी के समथ&क5 ने वाक् आउट करना पसद ;कया।
इधर Gवधानसभा चनाव
ु के पCरणाम5 म) स<ताधार" पb मात
खा गया। पांच म) से तीन दे श5 म) Gवरोधी दल5 क सरकार) बन
गयीं। इसी आधार पर लोकसभा म) भी उ#मीद थी। भर"
ू ह<या-
काTड, हCरया क मौत आ,द कारण उनक और भी मदद कर रहे
थे। ऐसी Gवकट िथत म) राव साहब को राƒपत ने बलवाया।

‘‘ दे श क हालत ,दन-,दन खराब हो रह" है । '' -मतभापी
राƒपत बोले।
‘‘ नह"ं, ऐसी तो कोई बात नह"ं है ! ''
‘‘ अ_पसंXयक5 पर अ<याचार बढ़ रहे ह।S ''
‘‘ ..................''
‘‘ GवHवGवKालय बद ह।S मल) और फैAटCरयां बद ह।S चार5
तरफ अराजकता है । Aय5, आ`खर ऐसा Aय5 हो रहा है ? ......जहां
राƒपत शासन है , वहां सब ठfक चलता है । Aय5 नह"ं आपवलोग
कछ
ु समय के लए राजनीत से हट जाते हS। कछ
ु समय के लए
राƒपत शासन लागू कर द) , सब ठfक हो जाएगा ! ''
‘‘ ये कैसे हो सकता है ? ऐसे कोई कारण नह"ं हS ;क राƒपत
शासन लागू हो। मेर" सरकार पण&
ू बहमत
ु म) ठfक तरह से काम
कर रह" है । ''
‘‘ तो ;फर यह अराजकता Aय5 ? ''
‘‘ इतने बड़े दे श म) थोड़ी-बहत
ु तो चलता ह" है ! '' राव साहब
ने कहा।
‘‘ नह"ं, राव साहब, िथत ठfक नह"ं है । आप कछ
ु किजए,
नह"ं ◌ंतो मS ह" कोई कदम उठाउं गा। '' यह कहकर राƒपत अदर
चले गए।
राव साहब बाहर आए। प+-तनIधय5 से बात नह"ं क राव
साहब ने, और अपनी कोठf पर आ गए।
पता नह"ं ;कन कारण5 से, राव साहब और राƒपत क Ž5ट
क खबर रानाडे और अय लोग5 को मल गयी। उह5ने राव
साहब को आगाह ;कया ;क इस िथत म) हम) तर
ु त कछ
ु सXत
कदम उठाने चा,हए। ले;कन राव साहब इस िथत म) नह"ं थे ;क
कछ
ु करते। अपनी कोठf पर उह5ने के*बनेट क मी,टंग बला
ु ई।
रानाडे ने इस मी,टंग का ब,हiकार ;कया। मी,टंग क समाि[त के
पव&
ू ह" रानाडे और उनके समथ&क5 ने अपना इतीफा भेज ,दया।
राव साहब क सरकार अ_पमत म) हो गयी। इधर राव साहब
कछ
ु समझ), तब तक रानाडे ने नयी पाटY ग,ठत कर ल"। और राव
साहब ने अपना इतीफा राƒपत को भेज ,दया।
राƒपत ने राव साहब का इतीफा मंजूर कर लया। राजधानी
म) तेजी से बदलते हए
ु घटना-eम पर परेू GवHव क आंख) लगी हुई
थीं।
रानाडे और उसके समथ&क5 ने एक पाटY का गठन कर उसे
GवIधवत ् मायता ,दला द"।
ऐसी िथत म) राƒपत ने काननी
ू सलाहकार5 क राय लेकर
Gवपb के नेता रामावामी को सरकार बनाने हे तु आमं*+त ;कया।
इस समाचार के साCरत होते ह" राजनीतक गतGवIधयां अ<यIधक
ती हो गयीं।

12

राƒपत भवन से जब रामावामी बाहर नकले तो रा*+


ार#भ हो चं;ू क थी। बाहर मंडराते ेस-फोटो†ाफर5 और
संवाददाताओं ने उह) घेर लया।
म
ु कराते हए
ु वे उनसे बचकर नकल गए। अपनी ल#बी गाड़ी
म) बैठकर रामावामी कोठf पर आए। कोठf म) उनके आने से पव&

ह" यह समाचार पहंु च चक ु ा था, अतः चार5 तरफ हष& क लहर)
,हलोर) ले रह" थीं। बाहर लान म) , सड़क पर और आग ु तक5 हे तु जो
कb बनाए गए थे, सभी तरफ भीड़ थी। रामावामी अपने सIचव
स,हत अदर वाले कमरे क ओर चल पड़े।
कमरे म) पहंु चकर रामावामी ने रानाडे तथा अय Gवरोधी
दल5 के नेताओं को आज रात के भोज हे तु आमि+त ;कया। तेजी
से सIचव ने टे ल"फोन मलाए और आनन-फानन म) सभी बध
होते चले गए।
आज रामावामी को लगा, शायद उनका बरस5 का सपना परा

होने वाला है । अगर रानाडे और कछ
ु अय दल साथ दे द) , तो वे
इस बार धानमं+ी का ताज पहन ल) गे।
रा*+ के भोज पर उह5ने नेताओं से वाता&लाप ारं भ ;कया।
रानाडे को लेकर वे अपने एकात शयनागार म) आए।
‘‘ बधाई ! '' रानाडे ने कहा, ‘‘ अब तो आप ह" पी.एम. ह5गे !''
‘‘ अगर आपका सहयोग मला तो । ''
‘‘ ऐसी Aया बात है ! मS तो हमेशा ह" आपके साथ हंू । पहले
भी मS इस स#बध म) आपसे कह चका ु हंू ।
रामावामी कछ
ु दे र तो चप
ु रहे , ;फर बोले-
‘‘ तो Aया आप और आपके सभी समथ&क मेरे साथ हS ? ''
‘‘ दे `खये, औपचाCरक Uप से हम आपके साथ तभी ह5गे, जब
आपके पास सरकार बनाने लायक एम.पी. हो जाएंगे। ''
‘‘ ले;कन अभी तो आपने सहयोग का वादा ;कया था । ''
‘‘ वो तो मS कह ह" रहा हंू । ले;कन जब तक अय दल और
एम.पी. आपको पी.एम. के Uप म) वीकार नह"ं करते, मS अकेला
कैसे सपोट& कर सकता हंू ! ''
‘‘ इसका मतलब, आपका सपोट& बेकार ह" है ! ''
‘‘ आप कछ
ु भी सम`झये ! हां अगर अय लोग आपके साथ
आ गए तो हम भी आपके साथ ह5गे। ''
यह कहकर रानाडे ने खाल" Iगलास रखा और बाहर क ओर
चल पड़े।
रानाडे के जाने के बाद रामावामी कछ
ु दे र तक सोचते रहे ,
;फर वापस आकर सराणा
ु और मनसखानी
ु आ,द से बातचीत करने
लगे। ले;कन कोई भी सहयोग हे तु त<काल तैयार नह"ं हआ।

रामावामी ने अपने समथ&क मXु य मं*+य5 को भी राजधानी
बलवा
ु लया।
तीन ,दन तक वे लगातार जोड़-तोड़ करते रहे , ले;कन शायद
सफलता उनके भाय म) नह"ं लखी थी। रामावामी ने अपनी
सरकार बना सकने क असफलता से राƒपत को अवगत करा
,दया।
इस सचना
ू से राजनीतक िथत और भी अIधक खराब हो
गयी। स<ताधार" पb म) Gवघटन और Zवीकरण
ु एक साथ चलता
रहा। उधर Gवरोधी पb भी असंग,ठत रहा। रामावामी अपनी
असफलता के कारण परे शान, उदास और टटे
ू हएु रहने लगे।
राƒपत ने सभी स#भावनाओं को दे खते हए
ु , संसद म) सबसे
बड़े गट
ु के नेता को सरकार बनाने क दावत दे द"। स<ताधार" पb
म) Gवघटन के बाद रानाडे का गट
ु सबसे बड़ा बन गया था।
रानाडे वयं राƒपत से मलकर इस स#बध म) कोशश कर रहे
थे। इस आम+ण से रानाडे को मन क मराद
ु मल गयी।
उह5ने Gवरोधी दल5 म) से कछ
ु का सहयोग ा[त ;कया, कछ

खर"दा-बेचा, एक नेता को उप-धानमं+ी बनाने का लालच ,दया
और अपनी सरकार बनाने क घोषणा कर द"।
सराणा
ु , मनसख
ु ानी, हरनाथ और वामी असरान
ु द, सभी
रानाडे के मं*+मTडल म) आ गए।
रानाडे शपथ-†हण समारोह के बाद संसद के स+ हे तु तैयार"
करने लगे। इस परेू चe म) रानाडे का साथ बाहर से भी कछ
ु दल5
ने ,दया।
संसद स+ के आने से कछ
ु समय पव&
ू सब कछ
ु ठfक-ठाक
चलता रहा, ले;कन धीरे -धीरे रानाडे के समथ&क5 म) असंतोष पैदा
होने लगा। िजन एम.पी. को कछ
ु नह"ं मल पाया, वे अलग होने क
धमक दे ने लगे।
आि◌खर म) संसद स+ के ,दन तक रानाडे क सरकार अ_पमत म)
हो गयी। रानाडे इस समाचार को नह"ं सह सके। उह) ,दल का
दौरा पड़ा और उह) अपताल म) भतp होना पड़ा।
राƒपत ने Gवरोधी दल5 के नेताओं से Gवचार-Gवमश& ;कया।
कछ
ु लोग5 ने सरकार बनाने का दावा भी ;कया। समथ&क एम.पी.
क सIचयां
ू भी तुत क गयीं।
ले;कन जांच होने तक राƒपत ने शासन क बागडोर पव&
ू वतp
कै*बनेट को ह" स=प द"। तमाम जांच5 के बाद और दाव5 क
स<यता तथा दे श क िथत को दे खते हए
ु , राƒपत ने आकाशवाणी
से अपने सारण म) कहा-
‘‘ मेरे दे शवासयो !
अभी िथत इतनी नाजक
ु है ;क कछ
ु भी नह"ं कहा जा
सकता। कोई भी दल सरकार बनाने क िथत म) नह"ं है ।
अतः मS मlयावIध चनाव5
ु क घोषणा करता हंू । सभी दल
जनता के पास से नया जनादे श लेकर आएं, ता;क हमारा लोकत+
सर|bत
ु रहे ! ''
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यह रचना 1983 म) स<सा,ह<य काशन-भात काशन


,द_ल" -ारा काशत है ।

-पा+ व घटनाएं का_पनक-

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-यशवत कोठार", 86, ल‘मी नगर, ’पर"


ु बाहर, जयपरु - 2, फोन -

2670596
e-mail ID - ykkothari3@yahoo.com