Vous êtes sur la page 1sur 45

कुण्डलरम ां

ज़ीयो की कुण्डलरम ां
सच
ू ी

1. कवि की च ह
2. लरवऩ
3. एड्स
4. प्रेभ औय गणणत
5. अांक गण्न
6. बफन िस्त्र के
7. तफ औय अफ
8. स ड़ी
9. कभय नह ां है
10. छिऩे सत्म
11. ि रे ि र
12. ददर

13. प्रेभ
14. आधी शद
15. गौल्फ़

16. प्रेभ यस
17. तर क़
18. प्रेभ डगय
19. सुख दख

20. सुनस न
21. आदद कम्प्मट
ू य
22. कम्प्मूटय

23. कम्प्मूटय अित य


24. कम्प्मट
ू य गरू

25. कम्प्मूटय सांस्क्रिछत
26. लशि औय कम्प्मूटय
27. कुसी

28. क ग़ज़
29. ईश्वय क ऩत
30. क ांट
31. लरांग बेद
32. शय फी
33. फ ज़य
34. ऩ दटि म ां
35. प्रि सी
36. ट्र न्सरफ़य
37. जीिन

38. ईश्वय की खोज


39. सूफ़ी की प्रेलभक
40. फांद
ू औय स गय

ऊऩय
01

कवि की च ह

कवित सछु नमे ध्म न से, हो च हे बफरकुर फोय,

सन
ु कय फस कह द स्क्जमे, फहुत खूफ! िन्सस भोय!

फहुत खफ
ू ! िन्सस भोय! अगय मह नह ां होत है ,

फेच य कवि अन्सदय ह घट


ु कय योत है .

कह ज़ीयो, मदद कवि को हो ज मे फीभ य ,

दि मह , कवि सम्पभेरन की कयो तैम य .

ऊऩय
02
लरवऩ

लरवऩ ब ष क रूऩ है, नह ां है उस की ज न,

जो अटके हैं रूऩ ऩय, कयते हैं अऩभ न.

कयते हैं अऩभ न, तो ब ष शभ िती है ,

नीचे तहख़ ने भें ज कय िुऩ ज ती है .

कह ज़ीयो, आओ ब ष को सयर फन में,

आमे सफ की सभझ, उसी लरवऩ भें लरखि में.

ऊऩय
03
एड्स

फीभ य दे खी सन
ु ीां, है ज़ , त उन, कोढ़,

ककन्सतु आजकर एड्स की, फीभ य फेजोड़.

फीभ य फेजोड़, ककसी को मह रग ज मे,

आत्भ-ग्र छन औय सैक्स-ह छन से चैन न ऩ मे.

कह ज़ीयो कविय म, भदि हो म हो न य ,

दोनों क विन श कयती है मह फीभ य .

ऊऩय
04
प्रेभ औय गणणत

मोगेश्वय जफ कय यहे , अऩनी छनमलभत बक्ति,

अनयु ध के रूऩ भें , आई लशि की शक्ति.

आई लशि की शक्ति, प्रेभ-फन्सधन भें फ ांध ,

फोर तुभ हो शन्स


ू म, शन्स
ू म क हूां भें आध .

कह ज़ीयो कविय म, गणणत क ग्म न लभर गम ,

औय बक्ति कयने क बी ियद न लभर गम .

ऊऩय
05
अांक गणन

अांक गण्न से आज कर, लसद्ध कयें सफ क ज,

ककन्सतु इसी से सत्म के, छिऩते हैं कुि य ज,

छिऩते हैं कुि य ज, दे ख कय इस क िरन ,

बफककनी से अक़्सय कयते हैं इस की तुरन .

कह ज़ीयो, बफककनी रगबग सफ अांग ददख ती,

ककन्सतु स्क्जरभ के भख्


ु म अांग को िह ढक ज ती.

ऊऩय
06
बफन िस्त्र के

फचने घय की तऩन से, सोते फ हय रोग,

सजनी को बी जन
ू भें , रगत है मह योग.

रगत है मह योग, भगय कहती, डयते हैं,

स य य त गगन से त ये क्मों गगयते हैं?

कह ज़ीयो, घ मर कयती हो बफन शस्त्र के,

कोठे ऩय सोम न कयो तुभ बफन िस्त्र के.

ऊऩय
07
तफ औय अफ

तफ तो घांघ
ू ट दे ख कय, जग उठत थ ्म य,

श्रांग य कवित ओां की, होती थी बयभ य.

होती थी बयभ य, कल्ऩन ऩय आध रयत,

स्क्जस को सन
ु कय सफ होते थे फहुत प्रब वित.

कह ज़ीयो, अफ तन ऩय िस्त्र फहुत ह थोड़ ,

कविमों की कल्ऩन के लरमे, कुि नह ां िोड़ .

ऊऩय
08
स ड़ी

सड
ू नी भदहर ओां की, दे खी जफ ऩोश क़,

एक दभ स ड़ी सी रगी, कैस मे इविफ़ क़.

कैस मे इविफ़ क़, भगय मे सभझ न आई,

स ड़ी की ह तयह क्मों नह ां मे फांधि ई.

कह ज़ीयो, ऩि
ू , स ड़ी क्मों नह ां फांधि तीां?

फोर ,ां ऩेट ददख ने से हभ हैं शभ ितीां.

ऊऩय
09
कभय नह ां है

ऊऩय से नीचे तरक, ढके हुमे सफ अांग,

ककन्सतु फीच की कभय तो, यहती बफल्कुर नांग.

यहती बफल्कुर नांग, मह तो सभझ न आई,

इतनी न ज़ुक जगह, क्मों नह ां मह ढकि ई.

कह ज़ीयो, इस ऩहन िे क य ज़ फत में,

कहते "कभय नह ां है ", कपय क्म उसे छिऩ में.

ऊऩय
10
छिऩे सत्म

जो नह ां है िह द खत , मह तो फड़ कभ र,

आांखों के आगे रगे, है भ म क ज र,

है भ म क ज र, सत्म गहय , म ऊांच ,

स्क्जसने खोज सत्म, िह भस्क्न्सज़र तक ऩहुांच .

कह ज़ीयो कविय म, बेद अफ सभझ भें आम ,

छिऩे हुमे हैं सत्म, ददख ई दे ती भ म .

ऊऩय
11
ि रे ि र

आमेगी अफ कौनसी य ध भेये ऩ स,

इसी फ त को सोच कय, होते किश्ण उद स.

होते किश्ण उद स, यो यहे पूट पूट कय,

हो गमे हैं अफ क ांट िो तो सख


ू सख
ू कय.

कह ज़ीयो, क ांटे की ्म स तबी ज मेगी,

ि रों क ददर रेकय जफ य ध आमेगी.

ऊऩय
12
ददर

ददर क अजीफ ह र है, ददर की उल्ट फ त,

ददर दे कय मह कह यहे , "तड़ऩत हैं ददन य त."

"तड़ऩत हैं ददन य त", भगय कैसे होत है ,

ददर ह नह ां यह तो ददि कह ां होत है ?

कह ज़ीयो कविय म, भ भर मह भस्क्ु श्कर क ,

ददर को दे कय क्मों ऩड़त है दौय ददर क .

ऊऩय
13
प्रेभ

प्रेभ दयू से कीस्क्जमे, ह यो हो म हूय,

आकशिण उन भें अगधक, जो यहते हैं दयू .

जो यहते हैं दयू , ऩ ऩ से फच ज ते हैं,

ककम दे ह सम्पऩकि, एड्स भें पांस ज ते हैं.

कह ज़ीयो कविय म, फ त मह भ न र स्क्जमे,

मदद कयन ह ऩड़े, दयू से प्रेभ कीस्क्जमे.

ऊऩय
14
आधी श द

श द कयने के लरमे, मि
ु क हुआ तैम य,

इधय उधय ड र नज़य, दे खे कुि अखफ य.

दे खे कुि अखफ य, अन्सत भें फोर भझ


ु से,

आधी श द तम हो गई है ह योइन से.

कह ज़ीयो, ऩि
ू उस से, आधी क्म फ क़ी?

फोर , भेय ओय से ऩक्की, उधय की फ क़ी.

ऊऩय
15
गौल्फ़

गौल्फ़ खेरने ऩछत गमे, ऩत्नी हुई उद स,

िै घन्सटे के ि रते, ऩछत न यहें गे ऩ स.

ऩछत न यहें गे ऩ स, तो फकफक कौन सन


ु ेग ,

तबफमत हुई खय फ, दि ई कौन कये ग .

कह ज़ीयो कविय म, ऩड़ यहे द:ु ख झेरने,

जफ से ऩछत हैं रगे हभ ये गौल्फ़ खेरने.

ऊऩय
16
प्रेभ यस

ऩहरे जफ ऩछत रौटत , कय के फ हय क भ,

ऩत्नी से घय भें उसे लभरत थ आय भ.

लभरत थ आय भ, प्रेभ ध य में फहतीां,

स्क्जस से दोनों की इच्ि में ऩयू होतीां.

कह ज़ीयो, अफ तो ऩत्नी बी क भ ऩै ज मे,

आमें दोनों थके, प्रेभ यस कौन वऩर मे?

ऊऩय
17
तर क़

तर क़ क एक फ़ैसर , जज ने ददम छनक र,

ऩछत-ऩत्नी के फीच भें , फांट ज मे सफ भ र.

फांट ज मे सफ भ र, भगय मह नह ां विच य ,

फच्चे उन के तीन, कयें कैसे फांटि य ,

कह ज़ीयो, ऩत्नी फोर , अफ घय ज मेंग,े

एक औय फच्च ऩैद कय तफ आमेंगे.

ऊऩय
18
प्रेभ डगय

पूर भ न रो शर
ू को, तबी लभरेग चैन,

ियन इस सन्सस य भें , यो-ओगे ददन यै न.

यो-ओगे ददन यै न, रूऩ कफ ऩीि िोड़े,

ददर को घ मर कये औय सफ अांग भयोड़े.

कह ज़ीयो, मह फ त कदठन, ऩय सयर ज न रो,

प्रेभ डगय भें क ांटों को बी पूर भ न रो.

ऊऩय
19
सुख दख

सख
ु दख
ु दोनों हैं मह ां, इन से फचत कौन,

कबी हां स यहे णखरणखर , कबी यो यहे भौन.

कबी यो यहे भौन, स्क्ज़न्सदगी चरती ज ती,

कबी च ांदनी य त, कबी अांगधम य आती.

कह ज़ीयो, दोनों अऩनी यां गत ददखर ते,

णखरते कबी गुर फ कबी क ांटे चब


ु ज ते.

ऊऩय
20
सुनस न

यहते हभ सन
ु स न भें , तड़ऩ यहे ददन य त,

ककसकी हभ फ तें सन
ु ें, ककसे सन
ु में फ त.

ककसे सन
ु में फ त, ऩ स कोई नह ां आमे,

दे ख हभ य ह र, सबी हभ से कतय मे.

कह ज़ीयो कविय म, तयस ददखर ने ि रे,

योमे अऩने स थ, पूट कय, ददर के ि रे.

ऊऩय
21
आदद कम्प्मूटय

लिवि से ऩहरे ब्रह्म थ , कम्प्मट


ू य क रूऩ,

उस भें एक औय शन्स
ू म के, फसे थे बफट्स अनऩ
ू .

फसे थे बफट्स अनऩ


ू , िवि जफ च ह यचन ,

विरपोटन से बौछतक रूऩ ददख म अऩन .

कह ज़ीयो, एक औय शन्स
ू म जगती भें आमे,

प्रकिछत, ऩरु
ु ष दोनों के स्क्जन भें रूऩ ददख मे.

ऊऩय
22
कम्प्मूटय

घय भें कम्प्मट
ू य रगौ, यखै वऩम कू सांग,

चैन न ऩर बय रैन दे , रड़ै ददभ गी जांग.

रड़ै ददभ गी जांग, गणणत के खेर णखर िै,

ख न ऩ न बर
ु ि म अनोखी कर ददख िै.

कह ज़ीयो कविय म, ऩड़ी ऩत्नी बफरतय भें ,

कोसत, बमौ अनथि आ गई सौतन घय भें .

ऊऩय
23
कम्प्मूटय अित य

करमग
ु भें क्म हो यह , इस ऩय ककम विच य,

जग भें ककतने ऩ ऩ हैं, कौन कये उद्ध य.

कौन कये उद्ध य, सफ अऩनी फ त गढ़ यहे ,

"मद मद दह धभिरम ग्र छन" क श्लोक ऩढ़ यहे .

कह ज़ीयो कविय म, छनय श न हो इस मग


ु भें ,

कम्प्मट
ू य अित य आ गमे हैं करमग
ु भें .

ऊऩय
24
कम्प्मूटय गुरू

कम्प्मट
ू य भें गुण फहुत, लभल्त इस से ग्म न,

इस भें इतनी कुशरत , दे ते सफ सम्पभ न.

दे ते सफ सम्पभ न, कपयें सफ ऩीिे , आगे,

स्क्जसे न इस क ग्म न, दयू िह इस से ब गे.

कह ज़ीयो कविय म, फन मह सच्च ट्मट


ू य,

सफ हैं इस के चेरे, गुरु है फस कम्प्मट


ू य

ऊऩय
25
कम्प्मूटय सांस्क्रिछत

कम्प्मट
ू य को दे ख कय, चककत हो यहे रोग,

घय, दफ़्तय म रकूर भें , है इन क उऩमोग.

है इन क उऩमोग, फ़ैसरे मे ह कयते,

भ निगण तो इन भें केिर डेट बयते.

कह ज़ीयो, भन से बी चांचर है इन की गछत,

मे भशीन ह नह ,ां आज कर मे हैं सांस्क्रिछत.

ऊऩय
26
लशि औय कम्प्मूटय

लशि भें शक्ति सभ ई है , इस क सफ को ग्म न,

अधि न य श्वय है फन , उन क रूऩ भह न.

उन क रूऩ भह न, फसे स्क्जसभें नय, न य ,

एक, शन्स
ू म क होत लभरन फहुत सख
ु कय.

कह ज़ीयो, लशिजी अफ कम्प्मट


ू य फन आमे,

स्क्जस भें एक, शन्स


ू म के अनऩ
ु भ बफट्स सभ मे.

ऊऩय
27
कुसी

कर क य जफ व्मरत थ , कयत घय भें क भ,

योज़ग य के रूऩ भें , लभर गम उसे इन भ,

लभर गम उसे इन भ, रग िह आकफ़स ज ने,

ककन्सतु रग िह इधय उधय सफ िक़्त गांि ने.

कह ज़ीयो, उस से लभरने की भस्क्ु श्कर ऩड़ गई,

कैसे ठहये एक जगह, जफ कुसी लभर गई.

ऊऩय
28
क ग़ज़

दफ़्तय के सांस य भें , क ग़ज़ हैं सफ ओय,

कफ इन से ऩीि िुटे , रग यहे हैं ज़ोय.

रग यहे हैं ज़ोय, भगय कुि कय नह ां ऩ ते,

क ग़ज़ के दरदर भें नीचे धांसते ज ते.

कह ज़ीयो, क ग़ज़ से अऩनी ज न िुड़ ओ,

जरि दो म पांू क भ य कय इन्सहें उड़ ओ.

ऊऩय
29
ईश्वय क ऩत

भ ांग भस्क्न्सदय भें फहुत, लभर लसफ़ि अऩभ न,

भस्क्रजद के बी स म्पने, लभर नह ां कुि द न,

लभर नह ां कुि द न, भगय एक भमख़ ने भें ,

ददमे नोट ऩय नोट िह ां ऩीने ि रों ने.

कह ज़ीयो कविय म, फहुत नटखट हो ईश्वय,

ऩत कह ां क दे ते, यहते औय कह ां ऩय.

ऊऩय
30
क ांट

सख
ू क ांट ऩेड़ ऩय, तकत है आक श,

अऩनी ह रत दे ख कय, होत फहुत उद स,

होत फहुत उद स, ऩ स कोई नह ां आम ,

धर
ू , हि औ' धऩ
ू से ऩीक्तड़त उस की क म .

कह ज़ीयो कविय म, ककसी ने दख


ु नह ां फ ांट ,

स थ दे यह उस क , एक दस
ू य क ांट .

ऊऩय
31
लरांग बेद

लभछनरट्र स्त्रीलरांग है , भन्सर रम ऩस्क्ु ल्रांग,

नह ां ज नते असर भें , क्म है उसक लरांग.

क्म है उसक लरांग, हभने तो स्त्री भ न ,

लभछनरट्र कहकय ह फस उसको ऩहच न .

कह ज़ीयो, जफ गचट्ठी क उिय नह ां ऩ ते,

सभझ भौन न य क , "ह ां" क अथि रग ते.

ऊऩय
32
शय फी

ऩज
ू भें क्म शक्ति है , इस क ककम फख न,

ऩज
ू से ऩिित दहरें, लभरें सबी ियद न.

लभरें सबी ियद न, शय फी ने नह ां भ न ,

ऩज
ू से ऩीन फहतय, इस को सच ज न .

कह ज़ीयो, ऩज
ू भें लसफ़ि ऩज
ु य झभ
ू े,

ऩीकय ्म र दे खो स य भस्क्न्सदय घभ
ू .े

ऊऩय
33
फज़य

ज ते हैं फ ज़ य से रेने को स भ न,

िह ां एक ह चीज़ की, होतीां कई दक


ु न.

होतीां कई दक
ु न, सभझ भें नह ां आत है ,

फेच य ग्र हक इस से चकय ज त है .

कह ज़ीयो, जफ हय दक
ु न ऩय चीज़ िह है,

क्मों ज ते उस जगह जह ां ऩय बीड़ खड़ी है ?

ऊऩय
34
ऩ दटि म ां

ख न ऩीन चर यह , रोग हो यहे दां ग,

भरती के भ हौर भें ख़फ


ू आ यह यां ग.

ख़ूफ आ यह यां ग, फ त सफ मह कय यहे ,

फयु ऩेट क ह र, द ितें फहुत चय यहे .

कह ज़ीयो कविय म, योज़ ऩ टी भें ज न ,

जीिन क उद्देश्म मह ां फस ऩीन , ख न .

ऊऩय
35
प्रि सी

रौटें गे छनज दे श को, ऩ कय कुि धन-ध भ,

ऩ ांच फयस भें ऩ लरमे, विक्तडमो, क य, भक न.

विक्तडमो, क य, भक न लभरे, कपय भन भें आई,

एक र ख ड रय रेकय ज मेंगे ब ई.

कह ज़ीयो, जफ एक र ख बी खये हो गमे,

फोरे, अफ क्म ज में फच्चे फड़े हो गमे.

ऊऩय
36
ट्र न्सरफ़य

तीन फयस अफ हो गमे, िोड़ेंगे मह दे श,

इस से सबी उद स हैं, होत सफ को क्रेश.

होत सफ को क्रेश, भन बी कुि ब य होत ,

ककतनी जरद फीत गमे ददन, मक़ीां न होत .

कह ज़ीयो, अफ टूटे ग मह सन्स


ु दय सऩन ,

औय कह ां ऩय शीघ्र रगेग डेय अऩन .

ऊऩय
37
जीिन

जीिन तो शतयां ज है , भ नि हैं फस गोट,

य त-ददनों के फोडि ऩय , ख ते यहते चोट.

ख ते यहते चोट, उद सी इस से होती,

छनमछत णखर ती खेर, ह य भ नि की होती.

कह ज़ीयो कविय म, खेर भें जीिन फीत ,

ख ईं सफ ने भ तें , कोई बी न जीत .

ऊऩय
38
ईश्वय की खोज

जैसे सयू ज भें फसे, जग के सबी प्रक श,

ईश्वय के अन्सदय फसे, सफ धती, आक श.

सफ धती, आक श, उन्सहें वििेक से ज न ,

स्क्जसने उन्सहें फन म , उसे नह ां ऩहच न .

कह ज़ीयो कविय म, फवु द्ध से ईश्वय ऩ न ,

जैसे द ऩक से सयू ज की खोज कय न .

ऊऩय
39
सूफ़ी की प्रेलभक

अजीफ भेय प्रेलभक , ि य कये अछत िूय,

फद्रे अऩने रूऩ को, रगे अटऩट हूय.

रगे अटऩट हूय, भझ


ु े अचयज है ब य ,

कैसे यक्खांू भेर, फड़ी चांचर मह न य .

कह ज़ीयो, जफ सोऊां, फहुत दयू हो ज ती,

जफ दे खांू उठ ज ग, भेय अस्क्रतत्ि लभट ती.

ऊऩय
40
फूांद औय स गय

स गय भें फांद
ू ें फसीां, उन क आदद न अांत,

फांद
ू ों भें स गय फस , कहते हैं मह सांत.

कहते हैं मह सांत, बेद दोनों भें ऐस ,

आत्भ , ऩयभ त्भ भें अन्सतय होत जैस .

कह ज़ीयो, ऩयभ त्भ को आत्भ भें ऩ ते,

जैसे फांद
ू ों द्व य स गय दे खे ज ते.

ऊऩय